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निर्भया कांड: 16 दिसंबर की उस काली रात से अब तक क्या हुआ...

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2017, 14:55 IST

दिल्ली गैंगरेप, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. जानें उस रात कब, क्या हुआ था? 

1. 16 दिसंबर, 2012 और रविवार का दिन. निर्भया शाम को साकेत स्थित सेलेक्ट सिटी वॉक मॉल में ‘लाइफ ऑफ पाई’ मूवी देखने के बाद 23 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट छात्र अपने दोस्त अवनिंद्र के साथ रात 9 बजे ऑटो से मुनिरका पहुंची थी. वहां स्टैंड के पास खड़े होकर दोनों बस का इंतजार कर रहे थे.

2. 9.15 बजे आईआईटी की तरफ से सफेद रंग की आई चार्टर्ड बस के परिचालक ने उन्हें बस में बैठने के लिए कहा था. उनके बस में सवार होते ही परिचालक ने दरवाजा बंद कर दिया था. बस में चालक समेत छह लोग सवार थे. कुछ दूर आगे जाने पर बस के परिचालक व उसके साथियों ने युवती से छेड़खानी शुरू कर दी थी.

3. विरोध करने पर उन्होंने युवती के दोस्त की रॉड से बुरी तरह पिटाई की थी. इसके बाद उन्होंने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था. इस दौरान बस ने करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी. दोषियों ने महिपालपुर में होटल एरिया के सामने चलती बस से दोनों को निर्वस्त्र हालत में नीचे फेंक दिया था. उस दौरान वहां से गुजरने वाले एक कार सवार की नजर पड़ने पर उसने पुलिस को इसकी सूचना दी थी.

4. 10.22 बजे दिल्ली कैंट थाने को सूचना मिली कि महिपालपुर से दिल्ली कैंट की तरफ आने पर जीएमआर कंपनी के गेट नंबर एक के सामने एक लड़का और लड़की बेहोशी की हालत में पड़े हुए हैं. मौके पर पहुंची पुलिस दोनों को सफदरजंग अस्पताल लेकर गई. घटना के कुछ दिन बाद उसे सिंगापुर के अस्पताल भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी.

5. पुलिस ने वारदात में शामिल बस चालक राम सिंह, परिचालक मुकेश कुमार व अक्षय कुमार उर्फ अक्षय ठाकुर, उनके साथियों पवन कुमार और विनय शर्मा को गिरफ्तार किया था. मामले में पुलिस ने एक नाबालिग को भी पकड़ा था. दिल्ली की साकेत कोर्ट ने नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया था, जबकि बाकी सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी.

6. तिहाड़ जेल में 11 मार्च 2013 को राम सिंह ने खुदकशी कर ली थी. अन्य दोषियों ने फांसी की सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सजा को चुनौती दी है. तीन साल बाल सुधार गृह में बिताकर नाबालिग रिहा हो गया था. पांच मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया.

 

First published: 5 May 2017, 9:11 IST
 
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