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दिल्ली सरकार स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए 54 फेलो नियुक्त करेगी

प्रणेता झा | Updated on: 14 July 2016, 8:10 IST

दिल्ली सरकार स्कूली शिक्षा नीति लागू करने के लिए विशेष फेलोशिप शुरू करेगी. इससे पहले दिल्ली सरकार ने कक्षा 9 के बच्चों की मदद के लिए 'चुनौती 2018' अकादमिक योजना की घोषणा की थी. 

ये विशेष फेलोशिप 22 से 35 साल के ऐसे नौजवानों दी जाएगी जिनके पास शिक्षा या सामाजिक क्षेत्र में काम करने का कम से कम दो साल का अनुभव हो. दिल्ली सरकार 54 फेलो चुनेगी जिन्हें कम से कम एक साल के लिए 40 हजार प्रतिमाह की फेलोशिप दी जाएगी, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है.

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प्रत्येक फेलो को दिल्ली सरकार के आठ कार्यक्रमों, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी, मेंटर टीचर प्रोग्राम, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फॉर टीचर ट्रेनिंग, काउंसलिंग एंड गाइडेंस, मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम, लर्निंग एसेसमेंट, प्रिंसिपल लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम और स्पेशल एजुकेशन में से किसी एक से जोड़ा जाएगा.

सभी फेलो दिल्ली के शिक्षा विभाग स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम करेंगे.

चुनौती 2018

दिल्ली सरकार के डायरेक्टर (शिक्षा) के प्रधान सलाहकार शैलेंद्र शर्मा कहते हैं कि सभी फेलो को विशेष उद्देश्य के तहत नियुक्त किया जा रहा है. इसमें सबसे अहम 'चुनौती 2018' को लागू कराने में मदद करना है.

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष  सिसोदिया ने 29 जून को 'चुनौती 2018' की घोषणा की थी. इसका उद्देश्य आठवीं के बाद सरकारी स्कूल से ड्रॉप आउट होने वाले छात्रों की संख्या पर नियंत्रण पाना है.

दिल्ली सरकार चाहती है कि नौवीं कक्षा का सबसे कमजोर छात्र भी 2018 में दसवीं पास कर सके.

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शर्मा कहते हैं, "केंद्र की नो-डिटेंशन पॉलिसी (एनडीपी) के तहत छात्रों को कक्षा नौ से पहले फेल नहीं किया जाता. ऐसे में कुछ छात्र बुनियादी लिखना-पढ़ना भी नहीं सीख पाते. नौवीं कक्षा के करीब 50% छात्र फेल हो जाते हैं."

उन्होंने आगे बताया, "चुनौती 2018 का उद्देश्य शिक्षा में पिछड़ेपन को दूर करना है. हम छठी कक्षा से लेकर उससे आगे तक की कक्षाओं के बच्चों पर ध्यान देंगे. हमारा विशेष जोर नौवीं कक्षा के बच्चों पर होगा. ये फेलो इस कार्यक्रम को लागू करने में मदद करेंगे."

नो-डिटेंशन पॉलिसी

शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत एनडीपी को लागू किया गया. इसके तहत किसी भी छात्र को आठवीं तक फेल नहीं किया जाता है. इस नीति के आलोचक इसे सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में आ रही गिरावट के लिए जिम्मेदार बताते हैं. इस नीति के लागू होने के बाद नौवीं कक्षा में फेल होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ने से भी आलोचकों की बात को बल मिला. 

दिल्ली का आम आदमी सरकार भी एनडीपी की विरोधी है. सिसोदिया ने पत्रकारों को बताया, "साल 2013-14 में नौवीं कक्षा में 44% छात्र फेल हुए थे, जबकि 2014-15 में 48.26% छात्र पास नहीं हो सके. वहीं 2015-16 में 49.22% छात्र फेल हुए."

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दिल्ली सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. दिल्ली सरकार ने इस संबंध में 2015 में एक नया विधेयक प्रस्तावित किया जिसका तहत एनडीपी केवल तीसरी कक्षा तक लागू करने का प्रस्ताव था लेकिन गृह मंत्रालय ने इस विधेयक को लौटा दिया. केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के 13 अन्य विधेयक भी उचित प्रक्रिया का पलान नहीं किए जाने के तर्क के साथ लौटा दिए थे.

हालांकि एनडीपी के समर्थक कहते हैं कि बच्चे इस नीति के कारण नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षण की खराब गुणवत्ता के कारण फेल होते हैं और खरा स्कूल सिस्टम का खमियाजा बच्चों को नहीं भुगतना चाहिए.

शर्मा कहते हैं कि कोई एनडीपी के पक्ष में हो या विपक्ष में, सरकारी स्कूलों में शिक्षण और शिक्षा का स्तर सुधारना बहुत जरूरी है.

शर्मा कहते हैं, "हम अलग-अलग छात्रों की जरूरत के अनुसार उनपर ध्यान देंगे. इसी की सबसे ज्यादा जरूरत है."

First published: 14 July 2016, 8:10 IST
 
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