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मुर्गियों के अधिकारों को लेकर दिल्ली HC ने जारी किया निर्देश, छोटे पिंजड़े में रखना क्रूरता

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 November 2018, 13:11 IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने मुर्गियों को छोटे-छोटे पिंजरों में रखना क्रूरता बताते हुए कहा है कि मुर्गियों को भी चलने फिरने का अधिकार है इसलिए उन्हें बड़े पिंजड़े में रखा जाए. इस मामले में ये टिप्पणी चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वी के राव की पीठ ने दी है. इसी के साथ जजों की पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय के सचिव को मुर्गियों के प्रजनन और आवागमन पर दिशानिर्देश बनाने के लिए एक समिति गठित करने के लिए निर्देश दिया साथ ही इस समीति की अध्यक्षता करने के भी निर्देश दिए हैं.

इस मामले में अदालत ने कहा, ''समिति को इस मुद्दे पर विधि आयोग की सिफारिशों, अन्य राज्यों के सुझावों तथा भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के नजरिये के अलावा पॉल्ट्री किसानों सहित अन्य पक्षों पर विचार करना चाहिए.''

इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए कोर्ट ने कहा पांच फरवरी 2019 की तारीख दी है और समीति को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया. अगली सुनवाई के पहले तक कोर्ट ने कहा कि कोई अंतिम फैसला किए जाने तक मुर्गियों को तारों वाले छोटे पिंजड़ों में रखने की अनुमति नहीं दी जाए. इस मामले मेें जजों ने कहा कि बड़े पिंजड़ों का इस्तेमाल किया जाए जिससे कि मुर्गियां आराम से चल फिर सकें.

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इस मामले में सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि फिलहाल मुर्गियों का कोई भी पिंजड़ा पशु कल्याण कानून के तहत बताई गई आकार जरूरतों को पूरा नहीं करता. गौरतलब है कि कोर्ट के ये फैसला उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया जिसमें दावा किया गया कि अंडे देने वाली मुर्गियों को छोटे पिंजड़ों में रखना अत्यंत क्रूरता जैसा है.

First published: 6 November 2018, 13:13 IST
 
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