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जेएनयू विवाद: कन्हैया कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 August 2016, 16:51 IST

जेएनयू विवाद में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली है. हाईकोर्ट ने जमानत शर्तों के खुलेआम उल्लंघन का आरोप लगाने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है.

याचिकाओं में कहा गया था कि कन्हैया कुमार 6 महीने के लिए मिली अंतरिम जमानत की शर्तों को ताक पर रख रहे हैं, लिहाजा उनकी जमानत खारिज की जानी चाहिए. इस साल 9 फरवरी को कन्हैया समेत कुछ छात्रों पर जेएनयू कैंपस में कथित रूप से देशविरोधी नारे लगाने का आरोप है.

याचिका में 3 और 9 मार्च के कन्हैया के उन भाषणों को आधार बनाया गया था, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने सेना के जवानों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

इससे पहले पिछली सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि हम कन्हैया कुमार की जमानत खारिज करने के पक्ष में नहीं हैं. 

2 सितंबर तक जमानत की मियाद

हाईकोर्ट में मेहरा ने कहा कि हम नहीं चाहते कि उनकी जमानत खारिज की जाए. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार फिलहाल 6 महीने की जमानत पर हैं, जो 2 सितंबर को खत्म हो रही है.

पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा था कन्हैया ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है, जिसे सरकार ने भी माना. लेकिन पुलिस यह बताने से बचती रही कि वो कन्हैया की जमानत खारिज करने के पक्ष में है या नहीं.

हाईकोर्ट इस पर काफी नाराज भी दिखा कि आखिर जांच एजेंसी अपना पक्ष कोर्ट को क्यों नहीं बता पा रही है? कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पुलिस को कहा था कि आपने सिस्टम का मजाक बना कर रख दिया है. 

पुलिस पर सख्त टिप्पणी

इससे पहले अदालत ने कहा था, "जांच एजेंसी क्यों तय नहीं कर पा रही है कि कन्हैया की जमानत खारिज होनी चाहिए या नहीं. आप अपने हलफनामे में कह रहे हैं कि कन्हैया जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, उसने भड़काऊ भाषण दिए हैं.

और फिर आप कह रहे हैं कि कोर्ट तय करे कि जमानत खारिज होनी चाहिए या नहीं. कोर्ट को जो करना है वो करेगी लेकिन पुलिस अपना स्टैंड कोर्ट को साफ-साफ क्यों नहीं बता पा रही है?"

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को कहा था कि 3 मार्च और 9 मार्च को दिया गया भाषण साफ तौर जमानत की शर्तों का उल्लंघन है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि दिल्ली पुलिस को खुद कोर्ट आकर कन्हैया की जमानत खारिज करने के लिए याचिका लगानी चाहिए थी, लेकिन जब पुलिस ने यह नहीं किया तो उन्हें मजबूरन कोर्ट आना पड़ा. 

एलजी के वकील गैरहाजिर

इस मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है. कन्हैया के केस में उपराज्यपाल नजीब जंग की तरफ से नियुक्त किये गए दो विशेष लोक अभियोजक गुरुवार को कोर्ट में पेश नहीं हुए.

हाल ही में एलजी और दिल्ली सरकार के अधिकारों को लेकर आए फैसले के बाद अब एलजी वही वकील भेज सकते हैं, जिन पर मंत्रिपरिषद की सहमति हो.

चूंकि यह दोनों वकील एलजी नजीब जंग ने खुद नियुक्त किए थे. लिहाजा ये गुरुवार को कोर्ट में पुलिस का पक्ष रखने के लिए मौजूद नहीं थे.

First published: 11 August 2016, 16:51 IST
 
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