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एस्सार लीक्स: न्यायिक जांच की मांग पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 July 2016, 13:25 IST
(एजेंसी)

कथित एस्सार फोन टैपिंग केस में न्यायिक जांच पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस मामले में याचिका दाखिल करते हुए अदालत से न्यायिक जांच की मांग की गई थी.

आरोप है कि 2001 से 2006 के दौरान एस्सार ग्रुप ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पीएमओ स्टाफ के अलावा अंबानी बंधुओं, सुरेश प्रभु, प्रमोद महाजन, अमर सिंह समेत कई वीवीआईपी के फोन टैप कराए थे.

क्या है एस्सार फोन टैपिंग मामला?

सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल ने आरोप लगाया है कि 2001 से 2006 के दौरान एस्सार ग्रुप ने अंबानी बंधुओं, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी पीएमओ के स्टाफ, सुरेश प्रभु और प्रमोद महाजन के अलावा कई वीवीआईपी की फोन टैपिंग कराई थी.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था. सुरेन उप्पल ने इस मामले में एक जून को प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी.

सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल ने 29 पेज की एक शिकायत पीएमओ को भेजी है. उप्पल का कहना है कि वह एस्सार समूह के पूर्व कर्मचारी अल बासित खान के वकील हैं, जिस पर कथित तौर पर फोन टैपिंग का आरोप है.

सुरेन उप्पल का दावा है कि अल बासित खान के निर्देशन में ही फोन टेपिंग के पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था.

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साथ ही उप्पल का कहना है, "जब फोन कॉल को रिकॉर्ड किया गया, उस दौरान खान एस्सार के सिक्योरिटी हेड थे. उन्होंने कंपनी प्रबंधन से निर्देश मिलने के बाद ऐसा किया था."

बताया जाता है कि एनडीए सरकार में मंत्री रहे प्रमोद महाजन का फोन भी टैप किया गया था. कुछ फोन टैपिंग टेलीकॉम लाइसेंसिंग के सिलसिले में हुई थी.

2001 में एस्सार के प्रशांत और रविकांत रुइया ने उसे फोन टेलीकॉम लाइसेंस से जुड़े मामले में फोन टैपिंग करने को कहा था. उप्पल की शिकायत में उन नंबरों का भी साफ तौर पर जिक्र है, जिनके फोन टैप किए गए.

वहीं इस मामले की एसआईटी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई है.

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First published: 11 July 2016, 13:25 IST
 
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