Home » इंडिया » Delhi High Court ban on oxytocin medicine manufacturing and sales
 

कम उम्र की लड़कियों को एडल्ट बनाने वाले इंजेक्शन की बिक्री पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 September 2018, 13:01 IST

लड़कियों को गैरकानूनी तरीके से उम्र से पहले वयस्क बनाने के लिए गलत तरह से इस्तेमाल में ले जाएं वाली ऑक्सीटोसिन दवा पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बैन लगा दिया है. हालांकि इस विवादित दवा को बेचने-खरीदने और उसकी मैन्यूफैक्चरिंग पर पहले से ही केंद्र सरकार ने बैन लगा रखा है. हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस दवा की बिक्री और बनाने पर 1 अक्टूबर तक के लिए स्टे लगा दिया है.

केंद्र सरकार के बैन को लेकर ऑक्सीटोसिन दवा बनाने वाली कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. अदालत से ये गुहार लगाई गई कि इस दवा को बनाने को लेकर लगे बैन को हटा दिया जाए.

बिना टॉनिक के दूर होगी आयरन की कमी, इन चीजों के सेवन से दो दिन में दिखाई देगा फर्क

ऑक्सिटोसिन के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के पीछे मुख्य वजह इस दवा का दुरुपयोग था. सरकार को इससे जुड़ी तमाम शिकायतें मिलीं जिसमें कहा गया कि देह व्यापार में धकेली गई कम उम्र की लड़कियों को उम्र से पहले वयस्क करने के लिए ऑक्सिटोसिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं. इसके अलावा दूसरी बड़ी शिकायत थी कि अक्सर डेयरी चलाने वाले लोग गाय-भैंस से ज्यादा दूध लेने के लिए भी इस इंजेक्शन का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं.

 

सार्क देशों में तकरीबन 112 कंपनियां ऐसी हैं जो ऑक्सिटोसिन दवा बनाती हैं. इसी साल 27 अप्रैल को इसकी बिक्री पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह से बैन लगा दिया था. अगले ही महीने ऑक्सिटोसिन की मैन्युफैक्चरिंग पर भी केंद्र सरकार ने बैन लगा दिया जिसके बाद ऑक्सिटोसिन दवाई बनाने वाली कंपनियां कोर्ट पहुंच गई थीं.

हलांकि, ऑक्सिटोसिन का इस्तेमाल डॉक्टर उस वक्त करते हैं जब गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी कराने के लिए उनके दर्द को कम करना जरूरी होता है. लेकिन अक्सर देखा गया कि दवा बनाने वाली कंपनियों ने इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया. इसे बेचने वाली दुकानों पर भी बिना डॉक्टर की सलाह के ये दवा बिकती रहीं, इसलिए सरकार को यह फैसला करना पड़ा.

इन चीजों का करेंगे इस्तेमाल तो कभी बीमार नहीं पड़ेंगे आप, बनी रहेगी इम्युनिटी

कई बार छोटी बच्चियों को उम्र से पहले विकसित करके उन्हें गलत तरीके से ह्यूमन ट्रैफिकिंग और वेश्यावृति के लिए तैयार करने में भी इस दवा का इस्तेमाल किया जाने लगा था. इसी कारण से कोर्ट ने इस दावा की बिक्री और मैन्युफैक्चरिंग को लेकर ये बड़ा कदम उठाना पड़ा.

First published: 1 September 2018, 12:50 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी