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दिल्ली हाई कोर्ट: लंबे समय तक यौन संबंध न बनाना भी हो सकता है तलाक का आधार

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 September 2016, 16:05 IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में बताया कि दंपति द्वारा लंबे समय तक यौन संबंध स्थापित न हो पाने की सूरत में भी तलाक लिया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि जीवन साथी द्वारा बगैर पर्याप्त कारण के यौन संबंध बनाने से लंबे समय तक इनकार मानसिक यातना के बराबर है और यह तलाक का आधार हो सकता है.

जस्टिस प्रदीप नंदराजग और प्रतिभा रानी ने एक व्यक्ति को तब तलाक की अनुमति दे दी, जब उसकी इस बात पर ध्यान दिया कि शादी हो ही नहीं पाई. वह उनके दफ्तर गई और उसके खिलाफ अधिकारी के पास झूठी शिकायत दर्ज करा दी, जिसकी वजह से उसे नौकरी छोड़नी पड़ी.

पीठ ने कहा, ये सभी कार्य व्यक्तिगत रूप से और कुल मिलाकर पति के साथ निर्दयता से पेश आने के बराबर है.

इसके साथ ही अदालत ने परिवार न्यायालय के एक अप्रैल के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उसने शादी को शारीरिक संबंधविहीन पाते हुए विवाह को रद्द कर दिया था.

वह महिला इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थी, लेकिन शुक्रवार को अदालत ने उसकी अपील खारिज कर दी.

यह फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि पत्नी या पति दोनों में से कोई भी यदि बिना पर्याप्त कारण के लंबे समय तक यदि शारीरिक संबंध बनाने की इजाजत नहीं देता तो वह उसके जीवनसाथी के साथ मानसिक यातना के बराबर है.

अदालत को 46 वर्षीय पति ने बताया कि वर्ष 2007 के नवंबर में उसकी शादी हुई थी. पत्नी ने चिकित्सीय समस्या बताकर शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया था.

अगले साल जनवरी में वे दोनों हनीमून के लिए शिमला गए थे, लेकिन वहां भी पत्नी ने कहा कि छूने की कोशिश करने पर वह बालकनी से नीचे कूद कर जान दे देगी. इसके बाद दोनों दिल्ली लौट आए थे.

पत्नी ने दहेज की मांग कर परेशान करने और पति के बहुत अधिक शराब पीने का आरोप लगाया था. उसने अदालत को यह भी कहा था कि इससे पहले शादी होने की बात और पहली पत्नी से एक बच्ची होने की बात उसके पति ने छुपा ली थी.

First published: 11 September 2016, 16:05 IST
 
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