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हाई कोर्ट: सोशल मीडिया पर भी SC/ST के ख़िलाफ़ टिप्पणी जुर्म

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 July 2017, 10:17 IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि सोशल मीडिया पर दलित या अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करना दंडनीय अपराध है. अदालत ने कहा है कि सोशल मीडिया से इतर ग्रुप चैप में भी इस तरह की टिप्पणी नहीं की जा सकती. ऐसा करने वाले शख़्स पर कानून का डंडा पड़ सकता है.

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में SC और ST (अत्याचार निषेध) ऐक्ट, 1989 है और यह सोशल मीडिया पर की जाने वाली टिप्पणियों पर भी लागू होगा. अदालत ने यह भी साफ किया है कि इस अधिनियम के दायरे में व्हाट्सऐप जैसे एप्लीकेशन भी आ सकते हैं, जो कि एक क्लोज़्ड ग्रुप माना जाता है.

यह फैसला जस्टिस विपिन सांघी ने दिया है. इस दौरान उन्होंने कहा, "फेसबुक यूजर अपनी सेटिंग को 'प्राइवेट' से 'पब्लिक' करता है, इससे जाहिर होता है कि उसके 'वॉल' पर लिखी गई बातें न सिर्फ उसके फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोग, बल्कि फेसबुक यूजर्स भी देख सकते हैं. हालांकि, किसी अपमानजनक टिप्पणी को पोस्ट करने के बाद अगर प्राइवेसी सेटिंग को 'प्राइवेट' कर दिया जाता है, तो भी उसे एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1) (एक्स) के तहत दंडनीय माना जाएगा."

दिल्ली हाई कोर्ट में यह सुनवाई एक दलित महिला की याचिका पर हो रही थी. दलित महिला का आरोप था कि उसकी देवरानी जो कि राजपूत जाति से हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर जातिसूचक शब्द कहकर प्रताड़ित कर रही थीं.

First published: 4 July 2017, 10:17 IST
 
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