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दिल्ली पुलिस की गुंडागर्दी: आतंक की कहानी, पीड़ितों की जुबानी

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 2 February 2016, 8:17 IST

शनिवार को रोहित वेमुला की आत्महत्या के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों की दिल्ली पुलिस द्वारा की गई बर्बर पिटाई पर अब सवाल उठ रहे हैं.

वेमुला की जन्मतिथि पर उसकी जाति को मुद्दा बना रहे संघ और तमाम दूसरे दक्षिणपंथी संगठनों के खिलाफ शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस के जवानों ने बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया. इस घटना की तस्वीरें और वीडियो अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं.

इस लाठीचार्ज के चौतरफा विरोध की एक वजह यह भी है कि अब तक प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा एक भी उकसाऊ कार्रवाई के सबूत नहीं मिले हैं. लिहाजा यह सवाल हर व्यक्ति पूछ रहा है कि दिल्ली पुलिस ने बिना किसी कारण छात्रों के साथ निर्ममतापूर्वक मारपीट क्यों की.

घटना के वीडियो में दिल्ली पुलिस का साथ देते हुए कुछ सिविलियन भी नजर आ रहे हैं. इनके बारे में अलग-अलग अटकलें हैं. कुछ के मुताबिक ये संघ के कार्यकर्ता थे जबकि कुछ के मुताबिक वे सादे लिबास में पुलिस वाले थे. अपनी बर्बरता में इन लोगों ने लड़कियों को भी नहीं बख्शा.

दिल्ली पुलिस ने अपनी बर्बरता में लड़कियों को भी नहीं बख्शा

कैच हिंदी ने इस लाठीचार्ज में जख्मी हुए तमाम छात्रों और पत्रकारों से बात की है. हालांकि अपनी तफ्तीश में हमने पाया कि कुछ लोगों को पुलिस ने धमकाया भी है लिहाजा डरे हुए लोग इस बारे में खुलकर बात भी नहीं कर रहे हैं. इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कड़ी टिप्पणी की है. उन्होंने दिल्ली पुलिस को केंद्र सरकार की गुंडा आर्मी करार दिया हैै. इस घटना के कुछ पीडितों की मुंहजुबानी:

चंद्रिका, लेखक

हम लोग आंबेडकर भवन पर जमा हुए थे. यहां हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे. आंबेडकर भवन के पास पुलिस ने बैरिकैडिंग की हुई थी. लोगों ने बैरिकैडिंग को हटाकर आगे बढ़ना जारी रखा. सारे लोग अपनी बात पहुंचाने के लिए दिल्ली स्थित आरएसएस मुख्यालय केशव कुंज की ओर बढ़ रहे थे.

पिछले कई प्रदर्शनों के दौरान देखा गया है कि पुलिस छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की इजाजत भी नहीं दे रही है. आनन-फानन में धारा 144 लगा दी जाती है.

protest-3

इस बार का मामला जरा अलग था. केशवकुंज के पास पहुंचते ही दिल्ली पुलिस से पहले आरएसएस के गुंडों ने छात्रों को पीटना शुरू कर दिया. वीडियों में आप इन लोगों को देख सकते हैं. सबसे पहले उन लोगों ने महिलाओं को निशाना बनाया.

महिलाओं को बचाने के लिए जब मैं पुलिस के नजदीक पहुंचा तो उन्होंने लोहे की कील वाले डंडे से मुझे मारा. मेरे पांव में कील के धंसने से गहरा घाव लगा है. महिलाओं के खिलाफ आरएसएस का यह रवैया उनकी सामंती सोच को दर्शाता है.

चिंटू, पीएचडी छात्रा, जेएनयू

हमलोग उस दिन आरएसएस भवन पर प्रदर्शन करने गए थे. विभिन्न छात्र संगठनों की तरफ से इस मार्च का आयोजन किया गया था. लेकिन पुलिस ने अमानवीय तरीके से लाठीचार्ज कर दिया. हम लोगों को बाल खींच-खींचकर कर मारा गया.

delhi police women

इस घटना के वीडियो में भी आप देख सकते हैं कि महिलाओं को जानवरों की तरह पीटा गया. रोहित वेमुला के मामले में न्याय की मांग को लेकर मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ पिछले नौ दिनों से जेएनयू के प्रशासनिक भवन के सामने भूख हड़ताल कर रही हूं. इसलिए मैं अपने साथियों के साथ वहां गई थी.

rahul gandhi

15 दिसंबर से यूजीसी मामले को लेकर विभिन्न छात्र संगठन आंदोलन कर रहे हैं. इन दिनों पुरुष पुलिसकर्मी लगातार महिलाओं को निशाना बना रहे हैं. अब वाटर कैनन का प्रयोग, लाठीचार्ज और छात्रों को हिरासत में लेना आम बात हो गई है.

जितेंद्र, एमफिल छात्र, जेएनयू

उस दिन जब हम आरएसएस मुख्यालय में प्रदर्शन करने पहुंचे तो पुलिस ने जगह-जगह बैरिकैडिंग की हुई थी. छात्रों का समूह केशव कुंज की ओर बढ़ रहा था. अचानक से पुलिस की कई बसें पहुंची. उस समय हमलोग शांतिपूर्वक नारे लगा रहे थे.

protest-4

प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाले हमारे संगठन बिरसा अंबेडकर फुले छात्र संगठन (BAPSA) के सदस्य उदय को मारने लगे. मैंने उसे छुड़ाने की कोशिश की.

मैं बचने की कोशिश कर रहा था तभी पुलिस ने पीछे से मेरे सर पर डंडा चलाया. मेरा सिर फट गया. मेरे सिर में चार टांके लगे हैं.

मधुरिमा, एमए छात्र, दिल्ली विश्वविद्यालय

दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान बर्बर तरीके से छात्रों को पीटा. पुलिस के अलावा सिविल ड्रेस पहने हुए कुछ लोगों ने छात्रों को मारा. कुछ लोगों का निशाना खासकर महिलाएं थी.

महिलाओं को हतोत्साहित करने के लिए पुलिस लगातार ऐसा रवैया अपना रही है. इस बार तो पुलिस के अलावा आरएसएस के लोग भी हमें मार रहे थे और दिल्ली पुलिस उनकी सुरक्षा कर रही थी. पुलिस और आरएसएस के लोगों ने  मेरे बालों को खींचा और मारा.

श्वेता राज, पीएचडी छात्रा, जेएनयू

रोहित का जन्मदिन 30 तारीख को था. दक्षिणपंथी संगठनों से लड़ते हुए रोहित ने अपनी जान गंवा दी. उसके लिए न्याय की मांग करते हुए हम केशव कुंज की ओर बढ़ रहे थे. ऐसा पहली बार हुआ जब पुलिस के अलावा कुछ लोग जो वर्दी में नहीं थे उन्होंने हमला कर दिया.

protest-1

ये आरएसएस के गुंडे हो सकते हैं. इन्होंने पुलिस के साथ मिलकर छात्रों को निशाना बनाया. मेरे साथ कई महिला प्रदर्शनकारी थी जिन्हें पुरुष पुलिसकर्मीयों ने मारा. पुलिस ने हम पर लाठी के अलावा हाथ भी चलाया और चांटे भी मारा.

राहुल, फोटो पत्रकार

हमलोग टेलिविजन कैमरों की नजर से दूर थे और पुलिस यह बात जानती थी. मैंने सुना, ' एक, दो, तीन, चार्ज.'मैं उस दौरान लाठीचार्ज की तस्वीरें ले रहा था.

arvind kejriwal tweet

पुलिस ने मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों को भी नहीं बख्‍शा. मैं एक पत्रकार हूं यह बताने के बावजूद पुलिसवालों ने मेरा कैमरा तोड़ दिया.

विकास कुमार, फोटो पत्रकार, कैच न्यूज़

शनिवार दोपहर 2.30 घटनास्थल पर करीब 200 छात्र उपस्थित थे. छात्र झंडेवालान स्थित अंबेडकर भवन से आरएसएस मुख्यालय केशव कुंज तक विरोध मार्च करने वाले थे.

protest-1

मैं इस प्रदर्शन की तस्वीरें ले रहा था. पुलिस ने मेरा कैमरा छीन लिया और मेरे संग भी मारपीट की बाद में पुलिस के उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद विकास का कैमरा वापस मिल सका.

First published: 2 February 2016, 8:17 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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