Home » इंडिया » Delhi Police roughs up, detains Najeeb Ahmed's mother. Outrage erupts
 

किले में तब्दील हुआ इंडिया गेट, नजीब की मां फ़ातिमा के साथ पुलिस की बदसलूकी

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 7 November 2016, 7:29 IST
QUICK PILL
  • 14 अक्टूबर को जेएनयू में हुई मारपीट के बाद से लापता छात्र नजीब अहमद का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है. 
  • नजीब की मां फ़ातिमा नफ़़ीस और उनकी बहन सदफ़ जेएनयूएसयू की अगुवाई में उन्हें ढूंढने के लिए संघर्ष कर रही हैं. 
  • रविवार को इंडिया गेट की तरफ़ बढ़ने पर दिल्ली पुलिस ने फ़ातिमा नफ़ीस समेत कइयों को हिरासत में ले लिया था जिसके बाद ट्विटर पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की तीखी आलोचना हुई है. 

23 दिन से लापता जेएनयू छात्र नजीब अहमद ने आख़िरी बार 15 अक्टूबर को अपनी मां फ़ातिमा नफ़ीस से फ़ोन पर कहा था, 'अम्मी, मुझे आपके पास आना है.' नजीब की लड़खड़ाती आवाज़ सुनकर फ़ातिमा नफ़ीस फ़ौरन उत्तर प्रदेश के बंदायूं ज़िले से राजधानी दिल्ली के लिए निकल गई थीं. उन्हें शक़ हो गया था कि उनका बेटा देश के सबसे प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्याल में किसी संकट में है. 

16 अक्टूबर यानी रविवार की दोपहर जेएनयू पहुंचने के बाद फ़ातिमा नफ़ीस सीधे माही-मांडवी हॉस्टल पहुंचीं. वहां कमरे में चप्पलें और बाक़ी सामान बिखरे पड़े थे लेकिन नजीब लापता था. तभी से फ़ातिमा नफ़ीस अपनी बेटी सदफ़ फ़ातिमा के साथ नजीब को तलाश रही हैं. शुरू में वह हर किसी की बांह पकड़कर कहतीं, 'मुझे तो यह भी नहीं पता है कि दो दिन से उसने खाना खाया है या नहीं? उसे चोट कहां-कहां आई है? मुझे मेरा नजीब ला दो, मैं वापस चली जाऊंगी.'

मगर 23 दिन से जारी नजीब की तलाश में फ़ातिमा नफ़ीस किसी घायल मां की तरह लड़ रही हैं. धारा 144 का उल्लंघन कर रही हैं, थाने ले जाई जा रही हैं और दिल्लीवालों से न्याय की इस मुहिम में शामिल होने की अपील कर रही हैं. 

तीन अक्टूबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस के शशि थरूर, सीपीएम के प्रकाश करात समेत कई नेता फ़ातिमा नफ़ीस से मिलने जेएनयू पहुंचे थे. यहां मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था, 'नजीब को वापस लाने का एक ही रास्ता है कि सभी लोग एकजुट होकर इस आंदोलन को कैंपस से बाहर ले जाएं.' फिर छह अक्टूबर यानी रविवार की दोपहर 3 बजे इंडिया गेट पर जमा होने का फैसला हुआ. 

इंडिया गेट

चूंकि इंडिया गेट पर पहुंचने की अपील सोशल मीडिया पर भी लगातार की गई थी, सो यह जानकारी देश के दूसरे हिस्सों में भी फ़ैली. दिल्ली से सटे आसपास के ज़िलों से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रविवार की दोपहर इंडिया गेट पहुंचने के लिए निकले भी.

दिल्ली पुलिस को इस तरह ख़तरे का अंदाज़ा था. वह जानती थी कि आंदोलन बड़ा होने पर इसे आसानी से काबू नहीं किया जा सकेगा. यह 16 दिसंबर 2012 गैंगरेप के बाद भड़के आंदोलन की तरह व्यापक रूप ले सकता है और फिर उसपर नजीब को ढूंढने का दबाव बेहद तेज़ हो जाएगा. लिहाज़ा, आंदोलनकारियों को इंडिया गेट पहुंचने ही नहीं दिया जाए और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करके हिरासत में ले लिया जाए.   

इसी रणनीति के तहत रविवार की दोपहर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट तक जाने वाली हर सड़क और लेन को जाम कर दिया था. मगर ट्रैफिक डायवर्जन के बावजूद अकबर रोड, अशोक रोड, पुराना क़िला रोड, शेरशाह सूरी रोड, ज़ाकिर हुसैन मार्ग, कस्तूरबा गांधी मार्ग और तिलक़ मार्ग से लगने वाली सड़कों पर दोपहर 1 बजे से जाम लगने लगा. 

तीन बजे तक इन सभी सड़कों के आसपास बिखरे हुए प्रदर्शनकारी इंडिया गेट पहुंचने का रास्ता ढूंढने लगे. और तभी दूसरी तरफ़ नजीब की मां फ़ातिमा, बहन सदफ़, जेएनयूएसयू के नेताओं और प्रदर्शनकारियों का मान सिंह रोड पर दिल्ली पुलिस से आमना-सामना हो गया. दिल्ली पुलिस इन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी लेकिन फ़ातिमा नफ़ीस ने पलटकर जवाब दिया, 'मैं यहां से नहीं हटूंगी, मुझे मेरा बेटा नजीब चाहिए.'

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अपने अंदाज़ में सभी को उठाना शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों को बाराखंभा रोड, मंदिर मार्ग, मायापुरी पुलिस स्टेशन ले जाया गया. दिल्ली पुलिस ने फ़ातिमा नफ़ीस समेत कइयों को सड़क से घसीटकर बस में डाल दिया. इस कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और दिल्ली पुलिस को कड़वी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा. 

मां के जज़्बात सबसे पवित्र होते हैं

जेएनयू छात्र संघ की महासचिव सतरुपा चक्रवर्ती ने ट्विटर पर लिखा, 'देखिए, दिल्ली पुलिस किस तरह नजीब की मां को घसीट रही है. श्रीमान राजनाथ सिंह, आपकी हुक़ूमत से इससे ज़्यादा शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता'. 

कांग्रेसी नेता संजय निरुपम ने लिखा, 'जेएनयू के लापता छात्र नजीब की मां के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई निंदनीय है. उन्हें यातना देने की बजाय उनके बेटे को ढूंढा जाना चाहिए.'

  

फ़ातिमा नफ़ीस पर हुई कार्रवाई को देखकर अभिनेता आयुष्मान खुराना भी ख़ुद को नहीं रोक सके. उन्होंने लिखा, 'एक मां के जज़्बात सबसे पवित्र होते हैं. इस वक़्त वह दुखी हैं. उनके साथ वैसा ही सुलूक करिए जैसा अपनी मां के साथ करते हैं. उनके लिए इससे कम कुछ भी मंज़ूर नहीं है'.

भारतीय जन संचार संस्थान के एसोसिएट प्रोफ़ेसर आनंद प्रधान ने धारा 144 पर सवाल उठाते हुए लिखा, 'स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत कब तक अपने नागरिकों पर अंग्रेज़ों की बनाई धारा 144 का इस्तेमाल करता रहेगा. इसे तो ब्रिटेन ने भी 1986 में ख़त्म कर दिया है'. 

हिरासत में लेने के बाद नजीब की मां को बस में बिठाकर मायापुरी पुलिस स्टेशन लाया गया. उन्हें यहां बाकी प्रदर्शनकारियों से अलग रखा गया. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए लिखा, 'उन्होंने नजीब की मां को हिरासत में क्यों लिया है? मैं उनसे मिलने पुलिस स्टेशन जा रहा हूं.'

इसके बाद केजरीवाल तब तक थाने में बैठे रहे, जब तक कि उन्हें रिहा नहीं कर दिया गया. नजीब की मां जब घर पहंचीं, तब भी अरविंद केजरीवाल ने फोन करके उनकी ख़ैरियत ली. 

अभी तक कोई सुराग नहीं

23 दिन गुज़र जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस अभी तक लापता छात्र नजीब अहमद से जुड़ा एक सुराग तक नहीं जुटा पाई है. अतीत में दिल्ली पुलिस का ऐसा रिकॉर्ड बमुश्किल मिलता है कि एक लापता को ढूंढने में वह इतनी फिसड्डी साबित हो. मगर जेएनयू जेएनयूएसयू और नजीब का परिवार शुरू से इस केस में दिल्ली पुलिस की भूमिका संदिग्ध बताता आ रहा है. 3 अक्टूबर को अरविंद केजरीवाल ने भी कहा था कि दिल्ली पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती क्योंकि कुछ लोग इसमें एबीवीपी से जुड़े हुए हैं. 

राष्ट्रपति से गुहार

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अब इसीलिए राष्ट्रपित प्रणब मुखर्जी से मिलकर इस केस में हस्तक्षेप की मांग की है. उन्हें राष्ट्रपति की तरफ़ से न्याय का भरोसा भी दिया गया है. 

बदायूं के रहने वाले नजीब अहमद का दाख़िला जामिया मिल्ल्यिा इस्लामिया यूनिवर्सिटी में भी हो गया था. मगर उन्होंने अपनी मां फ़ातिमा से यह कहकर जेएनयू में दाख़िला लिया था कि यहां की पढ़ाई सबसे बेहतर है. वह स्कूल स्कूल ऑफ साइंसेज़ में बायोटेक्नोलॉजी से एमएससी कर रहे थे मगर 14 अक्टबूर की रात एबीवीपी के लोगों ने उनकी पिटाई कर दी और तभी से वह लापता हैं. 

नजीब की मां हाई ब्लडप्रेशर की मरीज़ हैं और पिता को दिल की बीमारी है. 

First published: 7 November 2016, 7:29 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी