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दिल्ली दंगों पर पुलिस की चार्जशीट में क्या हैं पिस्तौल तानने वाले शाहरुख पठान पर आरोप

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 June 2020, 12:28 IST

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को फरवरी में हुई हिंसा के सिलसिले में तीन आरोपपत्र दायर किए हैं. इस चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने शाहरुख पठान नामक युवक का नाम भी साजिशकर्ता के रूप में शामिल किया है, जिसका दंगे के दौरान एक पुलिसकर्मी के सामने पिस्तौल तानने वाला वीडियो वायरल हो गया था. पठान पर 24 फरवरी को दंगों के दौरान हेड कांस्टेबल दीपक दहिया पर बंदूक से हमला करने और दंगा भड़काने संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. दोनों घटनाएं जफराबाद-मौजपुर चौक पर हुई थीं, जिसमें अलग-अलग मामले दर्ज किए गए और पठान को गिरफ्तार कर लिया गया था.

पठान को मार्च में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था. वह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर का निवासी है. पुलिस ने चार्जशीट में कहा है कि 24 फरवरी को सुबह 11 बजे के करीब दो गुट, जिनमें से एक नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) के विरोध में और दूसरा समर्थन खड़ा था, मौजपुर चौक पर भिड़ गए. पुलिस ने चार्ज शीट में इस बात का भी उल्लेख किया है "दोनों ओर से पथराव, आगजनी, गोलीबारी और तोड़फोड़ की घटनाओं में कई पुलिस कर्मियों के साथ-साथ कई लोगों को चोटें आईं''. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि पठान सीएए के खिलाफ विरोध कर रहे समूहों की भीड़ में से निकले थे. पुलिस का आरोप है कि उसने कांस्टेबल दहिया पर गोली चलाई.


हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पठान के वकील असगर खान ने कहा है कि उनके मुवक्किल पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है. वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता (हेड कांस्टेबल दीपक दहिया) की प्राथमिकी रिपोर्ट (एफआईआर) में फायर करने के बारे में जो बयान है, वह उनके एक इंटरव्यू में दिए बयान से अलग है. यह इंटरव्यू उन्होंने घटना के बाद एक टीवी चैनल को दिया था. वकील ने कहा “मेरे मुवक्किल पर मामले में झूठे आरोप लगाए गए हैं.

उन्होंने कहा ''शिकायतकर्ता ने एक टीवी चैनल से कहा था कि मेरे मुवक्किल ने गोली नहीं चलाई. हालांकि एफआईआर में शिकायतकर्ता ने कहा है कि उन्हें खुद को गोली से बचने का प्रयास करना पड़ा''. खान ने कहा कि हत्या (आईपीसी की 307) के प्रयास का आरोप भी झूठा है क्योंकि पठान ने आत्मरक्षा में गोली चलाई और किसी को घायल या मारने के लिए नहीं.

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First published: 10 June 2020, 12:11 IST
 
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