Home » इंडिया » Delhi: Tughlaq dynasty to becoming Shiv Bhola temple two months ago
 

दिल्ली: तुगलकी मकबरे को रातों-रात बना डाला शिव मंदिर

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 May 2018, 12:45 IST
(indian express)

देश में धीरे-धीरे इतिहास को बदलने की कवायद चल रही है. इसकी बानगी तब देखने को मिली जब राजधानी दिल्ली के एक पॉश इलाके में तुगलक शासन में बने एक मकबरे को दो महीने पहले चुपके से शिव मंदिर में तब्दील कर दिया गया. आश्चर्य की बात यह है कि रिहाइशी इमारतों और पार्क के बीच बने इस मकबरे को दिल्ली सरकार ने स्मारक का दर्जा दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गुमटी नाम का यह मकबरा दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित हुमायूंपुर गांव में स्थित है. मार्च महीने में इसमें शिवजी की मूर्तियां रखकर भगवा और सफेद रंग से रंग दिया गया. इस स्मारक के नजदीक में ही बैठने के लिए दो भगवा रंग के बेंच लगवाए गए हैं. इन पर सफदरजंग एन्क्वलेव की बीजेपी पार्षद राधिका अबरोल फोगाट का नाम है.

 

बता दें कि इंडियन नैशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट ऐंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के दिल्ली चैप्टर को पुरातत्व विभाग के सहयोग से पिछले साल इस 15वीं शताब्दी के स्मारक का जीर्णोद्धार करना था. प्रोजेक्ट डायरेक्टर अजय कुमार ने कहा, इस स्मारक पर ताला लगा था. हम स्थानीय लोगों के विरोध की वजह से अपना काम नहीं शुरू कर सके. हम पुलिस के पास भी गए, लेकिन बात नहीं बनी. अब यह मंदिर बन गया है और हमने इस स्मारक को खो दिया है.

पढ़ें- कर्नाटक चुनाव: लिंगायत समुदाय के गढ़ में आज राहुल की 8 रैलियां

गौरतलब है कि किसी भी स्मारक का रंग बदलना या वाइटवॉश करना पुरातत्व विभाग के सिटिजन चार्टर का पूरी तरह उल्लंघन है. ऐतिहासिक महत्व वाले स्मारकों की मौलिकता को नुकसान पहुंचाना नियम का उल्लंघन माना गया है.

पिछले काफी समय से देश में भारतीय जनता पार्टी पर इतिहास से छेड़छाड़ और बदलने का आरोप लग रहा है. इससे पहले राजस्थान में स्कूल की किताब से अकबर के पाठ में से महान हटाने को लेकर काफी विवाद हुआ था. 2016-17 के पाठ्यक्रम के लिए बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार ने बदलाव किया था. सातवीं क्लास में हिंदी के नए सिलेबस में ये संशोधन हुआ था.

सातवीं की सामाजिक विज्ञान के हल्दीघाटी युद्ध के पाठ में मुगल बादशाह अकबर को महान नहीं सिर्फ बादशाह बताया गया है. इससे पहले अकबर को इतिहास में अकबर महान लिखा जाता था. इसके अलावा हिंदी के नए सिलेबस में महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और संत कंवरराम समेत स्थानीय संतों को प्रमुखता से शामिल किया गया है. हालांकि अंग्रेजी माध्यम की किताब में अकबर को ग्रेट ही संबोधित किया गया है.

First published: 4 May 2018, 12:34 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी