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डीयू की छात्रा का खुलासा, मनचलों ने स्पर्म भरे गुब्बारे मारे

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 February 2018, 12:07 IST

हर तरफ होली का माहौल है. ऐसे में तीन चार दिनों तक एक दूसरे पर रंग फेंकने और रंग भरे गुब्बारे मारने के किस्से होते रहते हैं. पर यहां तो मामला ही कुछ और है. होली में मस्ती की आड़ में कुछ मनचले लड़कियों को तंग करते हैं ऐसे मामले भी होली के अवसर पर खूब सामने आते हैं.

'बुरा न मनो होली है' इस स्लोगन को लोगों ने कुछ ज्यादा जी बुरे तरीके से ले लिया है. उन्हें लगता है की होली की मस्ती की आड़ में वो किसी को भी नुकसान पंहुचा सकते हैं. उनकी मस्ती किस हद तक किसी को नुकसान पहुंचा सकती है इस बात का अंदाजा भी नहीं होता.

 इस बार एक अलग ही मामला सामने आया है. दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक स्टूडेंट ने अपने सोशल मीडिया पर जो शेयर किया है वो बहुत ही चौंकाने वाला है. दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज की एक छात्रा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि अज्ञात लोगों के एक समूह ने उसके ऊपर हाल में ‘‘स्पर्म से भरा’’ गुब्बारा फेंका था.

पुलिस ने कहा कि मामला उसके संज्ञान में आया है और वह लड़की से संपर्क करने की कोशिश कर रही है जिससे कि जांच शुरू हो सके. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है.’’

पूर्वोत्तर की रहने वाली लड़की ने 24 फरवरी को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, ‘‘मैं अमर कालोनी मार्केट में अपने एक फ्रेंड के साथ एक कैफे में लंच के लिए गई थी. जब मैं रिक्शे में बैठकर वापस आ रही थी तो कुछ लोग आए और मेरी तरफ तरल पदार्थ से भरा गुब्बारा फेंक दिया जो मेरे ऊपर आ कर फट गया.

 

उसने कहा, ‘‘मेरी काली लैगिंग पर सफेद निशान पड़ गए. मैं समझ ही नहीं पायी की असल में यह क्या था. जब मैं हॉस्टल पहुंची तो मैंने अपनी एक अन्य मित्र को वीर्य से भरे गुब्बारे फेंके जाने की बात करते सुना.’’

हर बार ही होली पर कुछ न कुछ ऐसी खबरें सामने आती है. और कानून व्यवस्था ऐसे मनचलों के आगे फेल नज़र आती है. इस बार की ये हरकत साफ़ दिखती है की किस तरह से ये समाज महिलकाओं के खिलाफ दूषित सोच से भरा हुआ है.

एक और जहां महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए तरह तरह के कैम्पेन चलाये जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर कोई न कोई ऐसा चेहरा भी सामने आ जाता है जो सोचने पर मजबूर कर दे की इस समाज में महिला को आखिर समझा क्या जाता है. किस आधार पर महिला कल्याण और सुधर की बातें की जाएं.

First published: 28 February 2018, 11:51 IST
 
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