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नोटबंदी हो सकती है फिर से, नीति आयोग के उपाध्यक्ष का बड़ा बयान

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 September 2018, 10:10 IST

नोटबंदी के 2 साल बाद भी इसके फायदे और नुकसान पर बहस जारी है. हाल ही में रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद विपक्ष ने नोटबंदी के फैसले को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद प्रतिबंधित किये गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों में से 99.3 प्रतिशत वापस बैंकिंग सिस्टम में लौट आये हैं.

8 नवंबर 2016 से पहले सर्कुलेशन में 15.41 लाख करोड़ रुपये 500 और 1,000 के नोटों के रूप में थे, जबकि इनमे से 15.31 लाख करोड़ वापस आ गए हैं. इसका मतलब है कि 99.3% नोट वापस आ गए हैं.

इस मामले में सरकार के नोटबंदी के फैसले के बचाव में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने इसे एक जरुरी कदम बताया. नोटबंदी की वजह से किसी भी आर्थिक मंदी की बात को राजीव कुमार ने सिरे से नकार दिया है.

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एनडीटीवी से एक खास बातचीत में राजीव कुमार ने कहा कि नोटबंदी समाज की सफ़ाई के लिए थी और अगर ज़रूरत पड़ी तो वो फिर नोटबंदी लाएंगे. पिछली सरकार के दौरान जब NPA यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट बढ़ रही थी तब रघुराम राजन ने नीतियों में बदलाव कर दिया जिसकी वजह से बैंकिंग सेक्टर ने इंडस्ट्रीज़ को लोन देना बंद कर दिया.

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वहीं रिज़र्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में नोटबंदी क लेकर आये आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा. कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब 90% पैसा वापस आ गया तो नोटबंदी का फायदा क्या हुआ. पीएम मोदी ने कहा था कि नोतबंदी की मदद से सिस्टम से काला धन बाहर हो जाएगा लेकिन अब साफ है कि नोटबंदी फेल साबित हुई है.

First published: 4 September 2018, 10:10 IST
 
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