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नोटबंदीः बकाया जमा करवाने उमड़े लोग, नगर निकायों में 340 करोड़ आए

अश्विन अघोर | Updated on: 16 November 2016, 8:08 IST
(पुनीत परांजपे/एएफ़पी )

500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद से ही पूरा देश सकते में है. उन्होंने यह फ़ैसला कालाधन, आतंकवाद, भ्रष्टाचार औक नकली करंसी पर लगाम कसने के इरादे से लिया है. मगर उनके इस कदम से आम आदमी सबसे ज्यादा परेशान है न कि काला धन रखने वाले. 

500 और 1000 रूपए के पुराने नोट जमा करवाने के लिए जहां बैंकों में बड़ी-बड़ी लाइनें लगी हैं, वहीं लोग इन नोटों को खत्म करने के सारे जुगाड़ आज़माने में लगे हैं. इसका सबसे आसान रास्ता है सामान्य बकाया और करों का नकद भुगतान. कर और दैनिक उपभोग के बिलों का भुगतान करने के लिए ये पुराने नोट काम आ सकते हैं, क्योंकि सरकारी विभाग इन्हें अभी स्वीकार कर रहे हैं. इस मामले में इन दिनों महाराष्ट्र भर के निकायों में पुराने नोटों की जैसे बारिश हो रही है. महराष्ट्र के सारे निकायों में रिकॉर्ड तोड़ कैश जमा हुआ है क्योंकि जितने भी बकायादार थे, सब नकद रूपए लेकर लाइन में खड़े हुए हैं.

शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'चूंकि 500 और 1000 रूपए के नोट बंद होने से ये बेकार हो चुके हैं, इसलिए जिनके पास बहुत अधिक मात्रा में काला धन है वे अपने बकाया चुकाने के लिए इन पुराने नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं. शुक्रवार और शनिवार को महाराष्ट्र के नगर निकायों ने 340 करोड़ रूपए का बकाया कर जमा किया. इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ'. 

बृहन मुंबई नगरपालिका (एमसीजीएम ) ने सर्वाधिक 43.07 करोड़ रूपए का कर जमा किया. मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, लोग हर नगर निगम और नगरपालिका के सामने अपना बकाया जमा करवाने के लिए लाइन लगा कर खड़े हैं. उन्होंने कहा, यह वाकई अप्रत्याशित है, जिन बकायों की रकम कभी इतनी आसानी से जमा होने की उम्मीद नहीं थी. सरकार को इस वसूली की कीमत चुकानी पड़ती और जबरन वसूली करनी पड़ती. अब कम से कम वह तो बचत हुई.

शहरी विकास विभाग के सूत्रों ने बताया कि बकाया चुकाने वाले लोगों में ज्यादातर बड़े व्यापारी और राजनेता हैं. पिछले पांच दिन में कई उद्यमियां ने आगे आकर करोड़ों का बकाया चुकाया है. 

11 और 12 नवम्बर को नगर निकायों में जमा रकम

एमसीजीएम  

कुल जमा43.07 करोड़ रूपए

11 नवम्बर34.85 करोड़ रूपए

12 नवम्बर8.22 करोड़ रूपए

  नवी मुंबई म्युनिसिपल कार्पोरेशन (एनएमएमसी)   

कुल जमा17.16 करोड़ रूपए

11 नवम्बर13.09 करोड़ रूपए

12 नवम्बर3.17 करोड़ रूपए

कल्याण डम्बीवली म्युनिसिपल कार्पोरेशन (केडीएमसी)   

कुल जमा22.44 करोड़ रूपए

11 नवम्बर18.37 करोड़ रूपए

12 नवम्बर4.07 करोड़ रूपए

मीरा भयंदर म्युनिसिपल कार्पोरेशन  

कुल जमा14.39 करोड़ रूपए

11 नवम्बर6.35 करोड़ रूपए

12 नवम्बर8.04 करोड़ रूपए

वसाई विरार म्युनिसिपल कार्पोरेशन  

कुल जमा5.98 करोड़ रूपए

11 नवम्बर4.46 करोड़ रूपए

12 नवम्बर1.52 करोड़ रूपए

उल्हास नगर म्युनिसिपल कार्पोरेशन (एनएमएमसी)   

कुल जमा17.08 करोड़ रूपए

11 नवम्बर12.90 करोड़ रूपए

12 नवम्बर4.18 करोड़ रूपए

पनवेल म्युनिसिपल कार्पोरेशन (एनएमएमसी)   

कुल जमा1.32 करोड़ रूपए

11 नवम्बर0.85 करोड़ रूपए

12 नवम्बर0.47 करोड़ रूपए

अन्य नगर निकायों में भी पिछल दो दिन में काफी नकद जमा हुआ

पुणे म्युनिसिपल कार्पोरेशन (पीएमसी)   

कुल जमा41.67करोड़ रूपए

पिंपरी चिंचवाड़ म्युनिसिपल कार्पोरेशन (पीसीएमसी)   

कुल जमा15.82 करोड़ रूपए

ठाणे म्युनिसिपल कार्पोरेशन (टीएमसी)   

कुल जमा14.50 करोड़ रूपए

सांगली मिराज कुपवाड़ म्युनिसिपल कार्पोरेशन 

कुल जमा5.92 करोड़ रूपए

 कोल्हापुर म्युनिसिपल कार्पोरेशन   

कुल जमा3.42 करोड़ रूपए

अहमद नगर म्युनिसिपल कार्पोरेशन

कुल जमा4.06 करोड़ रूपए

नासिक म्युनिसिपल कार्पोरेशन

कुल जमा11.07 करोड़ रूपए

धुले म्युनिसिपल कार्पोरेशन  

कुल जमा5.40 करोड़ रूपए

जलगांव म्युनिसिपल कार्पोरेशन  

कुल जमा5.07 करोड़ रूपए

मालेगांव म्युनिसिपल कार्पोरेशन  

कुल जमा3.85 करोड़ रूपए

शोलापुर म्युनिसिपल कार्पोरेशन 

कुल जमा9.35 करोड़ रूपए

औरंगाबाद म्युनिसिपल कार्पोरेशन  

कुल जमा4.42 करोड़ रूपए

नांदेड़ म्युनिसिपल कार्पोरेशन  

कुल जमा5.18 करोड़ रूपए

अकोला म्युनिसिपल कार्पोरेषन

कुल जमा1.65 करोड़ रूपए

अमरावती म्युनिसिपल कार्पोरेषन   

कुल जमा4.46 करोड़ रूपए

नागपुर म्युनिसिपल कार्पोरेषन  

कुल जमा9.90 करोड़ रूपए

प्रभानी म्युनिसिपल कार्पोरेषन  

कुल जमा0.24 करोड़ रूपए

चंद्रपुर म्युनिसिपल कार्पोरेषन   

कुल जमा   1.47 करोड़ रूपए

महाराष्ट्र के सारे नगर निकायों में 62.95 करोड़ रूपए की जमा रसीदें इकठ्ठी हुई. एक ओर जहां बड़े नोट बंद होने से काला धन रखने वालों की नींदें उड़ गई हैं, वहीं बकाया की स्वैच्छिक अदायगी से सरकारी विभागों में काफी फायदा है.

First published: 16 November 2016, 8:08 IST
 
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