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चीफ जस्टिस: नोटबंदी से हालात इतने ख़राब कि दंगे भी हो सकते हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 November 2016, 13:58 IST

सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार पर बेहद सख्त टिप्पणी की है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सड़क पर दंगे भी हो सकते हैं.

एक हफ्ते में दूसरी बार सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी पर सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हालात बेहद गंभीर हैं. नोटबंदी से लोगों को दिक्कतें हो रही हैं. इस सच्चाई से केंद्र सरकार मना नहीं कर सकती." 

'क्या प्रिंटिंग की दिक्कत है?'

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा, "ऐसे हालात में गलियों में दंगे भी हो सकते हैं. यह मामला 'हाई मैग्नीट्यूड' का है, क्योंकि इससे बहुत से लोग प्रभावित हो रहे हैं. सब लोग राहत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में नहीं आ सकते."

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने इस मुद्दे पर लोगों को आ रही परेशानी को लेकर सवालिया लहजे में कहा, "आपने एक हजार और पांच सौ के पुराने नोटों को बदलने की सीमा (साढ़े चार हजार से दो हजार रुपये) घटा दी, क्या नोटों को छापने में कोई दिक्कत आ रही है?" 

नोटबंदी के खिलाफ सुनवाई पर रोक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि लोगों को मुश्किल हो रही है, लिहाजा केंद्र हाथ पर हाथ रखे बैठा नहीं रह सकता. इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने कई हाई कोर्ट और निचली अदालतों में नोटबंदी के खिलाफ चल रही सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

केंद्रीय वित्त सचिव ने गुरुवार को सात फैसलों की जानकारी देते हुए कहा था कि 18 नवंबर से साढ़े चार हजार रुपये के पुराने नोट के बजाए दो हजार रुपये के नोट ही बैंक काउंटर पर बदले जा सकेंगे.

चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को अचानक बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि समस्या बहुत ही गंभीर है.

चीफ जस्टिस ने केंद्र सरकार से पूछा, "आपने 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद किया है, लेकिन 100 रुपये के नोट का क्या हुआ?" इस सवाल के जवाब में एजी मुकुल रोहतगी ने कहा कि मौजूदा समय में एटीएम मशीनों में सिर्फ 100 रुपये के नोटों के लिए एक ही ड्रॉअर लगा हुआ है, ऐसे में नए नोटों के लिहाज़ से उन्हें री-कैलिब्रेट करना होगा.

केंद्र सरकार ने बचाव में दलील दी, "सिर्फ प्रिंटिंग नहीं. नोटों को देशभर के बैंकों की लाखों शाखाओं तक पहुंचाना भी है. इसके अलावा एटीएम को री-कैलिब्रेट भी किया जाना है. हालांकि हमने किसानों, शादियों और छोटे व्यापारियों को राहत दी है."

हाईकोर्ट: केंद्र ने होमवर्क नहीं किया

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी के खिलाफ कई अदालतों में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने के लिए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा कि अगर वह स्टे ऑर्डर चाहते हैं, तो एक ट्रांसफर अपील दाखिल करें. सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई 25 नवंबर को होगी.

इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट में भी नोटबंदी के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने कहा कि सरकार की नीति नहीं बदली जा सकती, लेकिन बैंक के कर्मचारियों में समझदारी का अभाव दिख रहा है.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, "केंद्र सरकार ने सही तरीके से दिमाग नहीं लगाया. हर दिन आप व्यवस्था बदल रहे हैं. इसका मतलब है कि कोई होमवर्क नहीं किया गया." हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से नोटबंदी को लेकर 25 नवंबर तक रिपोर्ट तलब की है.

First published: 18 November 2016, 13:58 IST
 
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