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संघ ने विवाहित जोड़ों को बताया 'आदर्श संतान' का 'तरीका'

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 10 May 2017, 15:44 IST
प्रतीकात्मक तस्वीर

अगर आप जल्द परिवार बढ़ाने का विचार कर रहे हैं तो विज्ञान की नहीं, जन्मपत्री की मानिए औषधियों का प्रयोग कीजिए. आरएसएस के चिकित्सा प्रकोष्ठ ने यह सलाह दी है. भवानीपुर कोलकाता के एकल भवन में आयोजित गर्भ संस्कार मेला में भाग ले कर आए दंपतियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने दावा किया कि मेले में उन्हें आयुर्वेद चिकित्सक यानी वैद्य ने सलाह दी कि परिवार बढ़ाने का विचार करते समय उन्हें ग्रह-नक्षत्रों की चाल का ध्यान रखना चाहिए.

आरएसएस के चिकित्सा प्रकोष्ठ आरोग्य भारती द्वारा आयोजित मेले में उपस्थित दम्पत्तियों को डॉक्टर नरवानी ने बताया कि वे किस प्रकार एक ‘आदर्श बच्चे’ को जन्म दे सकते हैं. अपने पति के साथ इस मेले में जा कर आई अदरीजा रॉय (परिवर्तित नाम) ने बताया, "जामनगर, गुजरात से आए डॉक्टर नरवानी ने पहले तो हमें तुलसी, शहद जैसी प्राकृतिक चीज़ों के फ़ायदे बताए और हमें कहा कि गर्भावस्था केे दौरान इन चीजों का सेवन करना सेहत के लिए लाभदायक है."

प्रत्येक के साथ सीधी बातचीत सत्र के दौरान उन्होंने हमें बताया, "आदर्श बच्चा पैदा करने के लिए गर्भ धारण और डिलीवरी के वक्त किस प्रकार ग्रहों की स्थिति का ध्यान रखा जाए." नरवानी का कहना था, "सही ग्रह स्थिति का अनुसरण कर बच्चे के जन्म की योजना बनाई जाए तो कोई भी मां एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है."

बारासत निवासी 38 वर्षीय श्रोमोना साहा (परिवर्तित नाम) ने कहा, "परामर्श सत्र के दौरान डॉक्टर ने हमें बताया कि कुछ प्राकृतिक वस्तुओं के सेवन से किस प्रकार एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया जा सकता है, जो मां और संतान दोनों के लिए लाभप्रद है. मेरी निजी राय में इसमे कोई बुराई नहीं है, क्योंकि आयुर्वेद भी आखिर चिकित्सा विज्ञान ही है." साहा ने यह भी बताया कि डॉक्टर ने संयुक्त परिवार के बारे में भी बात की और यह भी बताया कि किस प्रकार अब संयुक्त परिवार की अवधारणा बदल रही है.

हालांकि कुछ जोड़े ऐसे भी थे जिन्होंने माना कि इस कार्यशाला का उद्देश्य परिवार बढ़ाने के इच्छुक दंपतियों के मन में आशंका भरना भी हो सकता है. एक निजी फर्म में काम करने वाले इंजीनियर सयान मंडल ने कहा, "डॉक्टर नरवानी और उनकी टीम द्वारा संचालित किए गए परामर्श सत्र को देख कर हम सकते में आ गए. चिकित्सा विज्ञान के युग में कोई कैसे यह दावा कर सकता है कि गर्भधारण के वक्त ग्रह-नक्षत्र का ध्यान रखा जाए!"

जिस जगह यह गर्भ संस्कार मेला आयोजित किया गया वहां मीडिया को प्रवेश की इजाज़त नहीं थी. काफ़ी चर्चित होने के बावजूद इस कार्यशाला में प्रदेश भर से केवल 150 जोड़े ही आए. आरोग्य भारती कार्यकर्ता और कार्यशाला के प्रभारियों में से एक जॉयश्री रक्षित ने कहा, "हमें इस बात की आवश्यकता महसूस हुई कि विवाहित जोड़ों को इस संदर्भ में परामर्श दिया जाना चाहिए, क्योंकि हमारा संगठन सामुदायिक और समाज कल्याण के लिए कार्य करता है. हमारा मानना है कि एक 'आदर्श बच्चे' को जन्म देने के लिए हमें कुछ चीजों का अनुसरण करना चाहिए, ताकि पैदा होने वाला बच्चा स्वस्थ हो और अच्छा जीवन जी सके."

रक्षित ने कहा, "आयुर्वेद को देश-दुनिया में विज्ञान की संज्ञा मिली है और अगर कोई दंपति बच्चे के जन्म से पहले कुछ ध्यान-योग का अनुसरण करे, तो हम ऐसी कार्यशालाएं आयोजित कर सकते हैं. बच्चे के जन्म से पहले हमें होने वाली मां के स्वास्थ्य का भी ख़याल रखना होता है. इसीलिए हमने इस दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया. 6 और 7 मई को आयोजित इस दो दिवसीय सेमिनार के आयोजन में कोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया है."

 

हक़ीक़त या फ़साना?

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि गर्भ संस्कार मेला में आने वाले विवाहित जोड़ों का ‘इलाज’ नहीं किया जाएगा. वे केवल आयुर्वेद विशेषज्ञ से भाषण सुन सकते हैं. सब कुछ ग्रहों पर है? सही में? आरएसएस के महासचिव जिश्नू बोस ने कहा, "मुझे नहीं पता कि परामर्श के दौरान क्या हुआ, क्योंकि मैं कोलकाता से बाहर था. मुझे अपने कार्यकर्ताओं से मालूम करना होगा कि क्या डॉक्टर नरवानी ने सभी जोड़ों को परिवार बढ़ाने से पहले ग्रहों की स्थिति का अनुकरण करने को कहा."

बोस के अनुसार ऐसी कोई भी कार्यशाला आयोजित करने में कोई नुकसान नहीं है. हालांकि पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष अनन्या चक्रबर्ती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है, क्योंकि वे समाज के नियम कानूनों का उल्लंघन कर एकल भवन में आयोजित परामर्श सत्र में शामिल होने चली गईं थी.

चक्रबर्ती ने कहा, "हमने कलकत्ता उच्च न्यायालय में पहले ही ऐसी कार्यशाला आयोजित करने को लेकर जनहित याचिका दाखिल कर दी है. कोर्ट ने परामर्श सत्र के दौरान डॉक्टर नरवानी का वीडियो फुटेज मांगा है. हम इसके खिलाफ लड़ेंगे."

बोस ने कहा, "हम आरटीआई दायर करके चक्रबर्ती की शैक्षणिक योग्यता के बारे में पता लाएंगे, क्योंकि लगता है कि वे मौजूदा सरकार की करीबी हैं."

First published: 10 May 2017, 15:44 IST
 
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