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सीआरपीएफ: दंतेवाड़ा नक्सली हमले में मूवमेंट की जानकारी लीक हुई थी

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2016, 18:52 IST

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का मानना है कि दंतेवाड़ा में घातक बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हुए जवानों के मूवमेंट से जुड़ी जानकारी ‘लीक’ हुई थी और जासूसों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है.

इस संबंध में सीआरपीएफ का कहना है कि जानकारी लीक करने वाला जासूस बल के भीतर भी हो सकता है और बाहर भी हो सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीआरपीएफ के डीजी के. दुर्गा प्रसाद के मुताबिक यह तय है कि उनके मूवमेंट की जानकारी लीक हुई थी. कहीं न कहीं या किसी न किसी स्तर पर ऐसा हुआ है. जवानों की आवाजाही औचक और अभियान से परे की थी और इसलिए वे सादे कपड़ों में थे. हम मामले की जांच कर रहे हैं.

सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस घटना की ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ के अलावा बल ‘किसी संदिग्ध जासूस की भूमिका की भी जांच कर रहा है, जो बल के अंदर या बाहर कहीं से भी हो सकता है.’

सीआरपीएफ के डीजी प्रसाद ने कहा कि 'इस घटना से जुड़े कई तथ्यों को देखते हुए वह सूचना के लीक होने की बात पर भी गौर कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जवान सादे कपड़ों में, सामान्य वाहन से जा रहे थे और वे किसी अभियान पर नहीं जा रहे थे. उस सड़क पर कोई हमला नहीं हुआ था और इसलिए किसी ‘रोड ओपनिंग पार्टी’ को वहां तैनात नहीं किया जाता था. लेकिन उनकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी लीक हो गई है. हम सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं'.

हमला मेलवाड़ा गांव के बसारस-कुआकोंडा के पास उस समय हुआ जब टाटा-709 में सवार बल के जवान दोपहर साढ़े तीन बजे एक बारूदी सुरंग के उच्च्पर से होकर गुजरे. इनमें से अधिकतर जवान छुट्टी से लौटे थे और पास के कैंप में जा रहे थे.

घटना की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश जारी कर दिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन परिस्थितियों में ये जवान एक ऐसे चौपहिया वाहन में सफर कर रहे थे, जिसे छिपाए गए आईईडी के खतरे के चलते इन इलाकों में रहने वाले सुरक्षाकर्मियों के प्रयोग के लिहाज से प्रतिबंधित किया गया है.

इसके साथ ही इस बात की भी जांच हो रही है कि ये लोग अपने हथियार लेकर क्यों नहीं जा रहे थे जबकि अभियानों से इतर के कामों के दौरान भी आवाजाही में हथियार साथ रखना अनिवार्य है.

First published: 31 March 2016, 18:52 IST
 
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