Home » इंडिया » dg vanjara reached gujarat after 9 years
 

बंजारा के स्वागत में समर्थकों ने कहा भारत माता की जय

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 April 2016, 15:45 IST

गुजरात के सोहराबुद्दीन और इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर में आरोपी गुजरात पुलिस के पूर्व डीआईजी डीजी वंजारा का आज गुजरात पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत हुआ और भारत माता की जय का नारा लगा.

बंजारा लगभग 9 साल बाद गुजरात पहुंचे. अहमदाबाद एअरपोर्ट पर अपने भव्य स्वागत को देखते हुए बंजारा ने कहा कि यह मेरा नहीं गुजरात पुलिस का स्वागत है. यह गुजरात पुलिस की जीत है.

पढ़ें: गुजरात में 1.42 करोड़ रुपये के नकली नोट बरामद हुए

जेल से जमानत पर रिहाई के बाद बंजारा लगभग एक साल से मुम्बई में अकेले रह रहे थे. अप्रैल 2007 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में वंजारा को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद इशरत जहां मामले में भी उनकी गिरफ्तारी हुई थी.

बंजारा को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से दोनों एनकाउंटर के मामले में जमानत मिली है और साथ ही कोर्ट ने उन्हें गुजरात में प्रवेश की इजाजत भी दी. इससे पहले कोर्ट ने उनके गुजरात में रहने पर प्रतिबंध लगाया था. जिसकी वजह से बंजारा जेल से रिहा होने के बाद भी अपने गृह प्रदेश नहीं जा सके थे.

जानिए कौन हैं डीजी वंजारा


डीजी बंजारा साल 1987 बैच के गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी हैं. इनकी शरूआती तैनाती क्राइम ब्रांच में थी और उसके बाद गुजरात एटीएस के प्रमुख बने. बंजारा पाकिस्तान सीमा से सटे बॉर्डर रेंज के आईजी भी रहे हैं.

वह साल 2002 से साल 2005 तक अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच में बतौर डीसीपी तैनात थे. बंजारा के इसी कार्यकाल के  दौरान लगभग बीस लोगों का एनकाउंटर क्राइम ब्रांच ने किया गया. जब एनकाउंटर के फर्जी होने की बात उठने लगी तो इस मामले को सीबीआई को जांच के लिए सौंपा गया.

पढ़ें: गुजरात: बीते पांच साल में 1735 हिंदुओं ने धर्म परिवर्तन का आवेदन किया

सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि बंजारा के नेतृत्व में किये गये ये एनकाउंटर फर्ज़ी थे. साल 2007 में गुजरात सीआईडी ने वंजारा को इस मामले में गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया.

बंजारा पर फर्जी एनकाउंटर में आठ लोगों की हत्या का आरोप है, जिनमें सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी, तुलसीराम प्रजापति, सादिक़ जमाल, इशरत और उसके साथ मारे गए तीन अन्य भी शामिल हैं.

इन सभी के एनकाउंटर के बाद बंजारा के क्राइम ब्रांच ने बयान दिया था कि मारे गये सभी पाकिस्तान के आतंकी थे और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करना चाहते थे. लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने सभी एनकाउंटर फर्ज़ी घोषित कर दिया.

पढ़ें: गुजरात : हरेन पांड्या की पत्नी बनीं बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष

वंजारा को सितंबर 2014 में मुंबई की एक कोर्ट ने सोहराबुद्दीन, तुलसीराम प्रजापति के फर्जी मुठभेड़ मामले में सशर्त जमानत दे दी थी.सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में सोहराबुद्दीन केस को गुजरात से हटाकर महाराष्ट्र ट्रांसफर कर दियाा, तब से वंजैरा मुंबई की जेल में बंद थे.

मुंबई जेल में बंद वंजारा ने सितंबर 2013 में पुलिस सेवा से इस्तीफा देना चाहा, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए कहा है कि जब तक वंजारा पर केस चल रहा है, तब तक वह पुलिस सेवा से इस्तीफा नहीं दे सकते.

डीजी वंजारा से पहले भी गुजरात के कई अन्य पुलिस अफसरों ने इस्तीफा दिया था. इस कड़ी में सबसे पहले आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर मुसलमानों के खिलाफ दंगों में शामिल होने का आरोप लगाया था.

पढ़ें: गुजरात में आतंकी हमले की आशंका, पूरे राज्य में हाई अलर्ट

भट्ट ने कोर्ट को बताया कि नरेंद्र मोदी ने पुलिस अधिकारियों से मुसलमानों की हत्याएं करने के लिए कहा था.इसके बाद इशरत जहां एनकाउंटर मामले में शामिल जीएल सिंघल ने भी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था.

अपने इस्तीफे में जीएल सिंघल ने भी कहा था कि सरकार उनका बचाव नहीं कर रही है और उन्होंने जो भी काम क्राइम ब्रांच में अपनी नौकरी के दौरान किए, वे सब तत्कालीन मोदी सरकार के दिशा-निर्देशन पर किए थे.

गुजरात में विवादों में घिरे इन अधिकारियों की यह कहानी तब की है, जब राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी हुआ करते थे और गृह मंत्री अमित शाह, जो आज बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. 

First published: 8 April 2016, 15:45 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी