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ढाका हमले के बाद असम में अलर्ट

राजीव भट्टाचार्य | Updated on: 6 July 2016, 7:47 IST
QUICK PILL
  • ढाका हमले के बाद असम में सामान्य चेतावनी जारी की गई है. पुलिस के सभी एसपी को संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और खुफिया सूचना जुटाने का आदेश दिया गया है. 
  • पहले भी गृह मंत्रालय ने असम समेत पांच राज्यों में आईएस के संभावित खतरे को लेकर चेतावनी जारी की थी. असम उन तीन राज्यों में शामिल है जहां सबसे अधिक इंटरनेट पर आईएस के बारे में जानकारी खोजी जाती है.

ढाका में हुए आतंकी हमले ने असम पुलिस को चौकन्ना कर दिया है. असम पुलिस ने पड़ोसी देश से होने वाले घुसपैठ की संभावना को देखते हुए सामान्य चेतावनी जारी किया है.

असम पुलिस के महानिरीक्षक मुकेश सहाय ने कैच को बताया, 'पूरे राज्य में सामान्य चेतावनी जारी की गई है. पुलिस के सभी एसपी को संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और खुफिया सूचना जुटाने का आदेश दिया गया है.' इससे पहले गृह मंत्रालय ने असम समेत पांच राज्यों में आईएस के संभावित खतरे को लेकर चेतावनी जारी की थी.

असम उन तीन राज्यों में शामिल है जहां सबसे अधिक इंटरनेट पर आईएस के बारे में जानकारी खोजी जाती है.

नियंत्रण की कोशिश

भारत और बांग्लादेश के सीमा की बाड़बंदी अभी पूरी नहीं हो पाई है. बारिश के दिनों में इन इलाकों में पेट्रोलिंग बेहद मुश्किल होती है क्योंकि बारिश में या तो चेक पोस्ट बह जाते हैं या पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं.

पिछले कई दशकों से बांग्लादेश में अवैध घुसपैठ जारी है. 3 जुलाई को बीएसएफ ने मेघालय के दक्षिणी गारो हिल में 13 अवैध घुसपैठियों को गिरफ्तार किया था जो सीमा पार कर भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे.

पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने कहा, 'केंद्र सरकार के नए नियम के मुताबिक पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रहने की अनुमति है. लेकिन हम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि आतंकी फर्जी पहचान के साथ नहीं घुस सकते?'

उन्होंने कहा कि कई बांग्लादेशी नई दिल्ली में रह रहे हैं और उन्होंने हिंदू नाम लगा रखा है. उन्होंने बताया, 'इस बात कोे जांचने का कोई तरीका नहीं है कि वह सच बोल रहे हैं या झूठ. सरकार को इस तरह का फैसला लेने से पहले उसके कारणों पर परिणाम पर विचार करना चाहिए.'

असम और अप्रवासी

ऐसे फैसलों का असम जैसे राज्यों पर बेहद प्रतिकूल असर होता है. असम में बाहर से आकर बसे लोगों द्वारा जमीन पर कब्जा करने का पुराना इतिहास रहा है.

पिछले एक साल में जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश के कई मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ है. अभी तक पुलिस करीब 35 संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है.

कई इलाकों में प्रवासियों का अड्डा है. खासकर नदी के किनारे वाले इलाकों में जहां पुलिस जाने से डरती है. कुछ महीनों पहले ही टीवी न्यूज चैनलों ने एक वीडियो दिखाया था जिसमें संदिग्ध प्रवासी को पकड़ने गए पुलिस वाले को बुरी तरह पीटा जा रहा था.

पुलिस मुख्यालय की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में जेएमबी मॉड्यूल की मौजूदगी का जिक्र किया गया है. हालांकि इस विज्ञप्ति में आईएस की मौजूदगी की संभावना को खारिज किया गया है. धुबरी, करीमगंज और बोडोलैंड टेरिटोरियल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट्स (बीटीएडी) पर पुलिस का फोकस है, जहां बड़ी संख्या में बांग्लादेश से आए लोग रहते हैं.

बीटीएडी के पुलिस महानिरीक्षक एल आर बिश्नोई ने मीडिया को बताया कि बाजारों, होटलों और रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

बिश्नोई ने कहा कि पिछले साल चिरांग में जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, वह बंगाल के थे और उनका बांग्लादेश से संपर्क था. उनकी योजना जेएमबी की तरह का संगठन बनाने की थी. जांच बताती है कि कई शिविरों को मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग स्कूलों की आड़ में चलाया जा रहा है.

असंतुलन की स्थिाति

असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस के अपडेट होने के बाद बांग्लादेश से आकर बसे लोगों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ गई है. इस कवायद से फर्जी दस्तावेजों की मदद से नागरिकता लेने की कोशिशों का भंडाफोड़ हुआ है. ऐसा अनुमान है कि इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद लाखों लोग विदेशी नागरिक के तौर पर चिह्नित कर लिए जाएंगे.

बीटीएडी के एक दूसरे पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मौके पर चरमपंथियों की तरफ से दंगा भड़काने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. 

उन्होंने कहा, 'इसमें दोनों तरफ के चरमपंथी शामिल हैं. जिसमें प्रतिबंधित संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड भी शामिल है. दंगा और हिंसा से इन्हें अक्सर नए रंगरुटों को भर्ती करने में मदद मिलती है.'

एनडीएफबी के समर्थन वाले इलाके बीटीएडी के तहत आते हैं. इन इलाकों में पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों और खुफिया एजेंसियों की तैनाती बढ़ा दी गई है.

First published: 6 July 2016, 7:47 IST
 
राजीव भट्टाचार्य @catchhindi

गुवाहाटी स्थित वरिष्ठ पत्रकार. 'रांदेवू विथ रिबेल्सः जर्नी टू मीट इंडियाज़ मोस्ट वांटेड मेन' किताब के लेखक.

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