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ये है बदलते भारत की डरावनी तस्वीर!, शव ले जाने के लिए नहीं मिली एंबुलेंस, पैसे की तंगी बनी मुसीबत

सुहेल खान | Updated on: 2 February 2019, 16:11 IST

भारत... ये एक शब्द भर नहीं है बल्कि ये सवा सौ करोड़ से अधिक देशवासियों को सिर को ऊंचा करने करता है जो यहां रहते हैं. मुझे भी अपने भारत पर गर्व है. हम तक्करी कर रहे हैं दुनिया के ताकतवर से ताकतवर देश को मात देने की शक्ति हम रखते हैं. इसी बीच कई ऐसी तस्वीरें उभर कर सामने आती है जो हमें ना सिर्फ शर्मसार करती हैं बल्कि देश के तरक्की वाले तमाम स्लोगन और बातों पर हजारों सवाल खड़े करती है.

ऐसी ही एक खबर आई है झारखंड से जो हमें कई बार सोचने को मजबूर करेगी. हम इस खबर को पढ़ेंगे कुछ देर याद रखेंगे और फिर भूल जाएंगे. खैर जो भी हो आपको खबर बताते हैं. जागरण वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक मामला झारखंड के धनबाद का है. जहां शुक्रवार को दुमका का रहने वाला एक अनुसूचित जाति का परिवार करीब चार घंटे तक मासूम बच्चे के शव को लेकर भटकना पड़ा.

अस्पताल उन्हें सरकारी एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करा सका. उसके बाद अस्पताल में मौजूद उनकी मदद को आए और एक दूसरे से पैसा इकट्ठा कर शव को ले जाने का इंतजाम किया. इस दौरान उन्होंने शव को दुमका ले जाने का इरादा त्याग दिया और धनबाद में ही शव को दफन कर देने का सुझाव दिया.

ये घटना घटी दुमका नगर पालिका के सफाईकर्मी लखन हाड़ी के साथ. जब वो अपने ढाई साल के बेटे भोला तीन दिन से तबियत खराब थी. परिजनों ने स्थानीय चिकित्सकों से बच्चे का इलाज कराया. लेकिन उसे आराम नहीं मिला. शुक्रवार को उसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई. तब उसे दुमका के सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां से बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पीएमसीएच रेफर कर दिया गया. दुमका से बच्चे को सरकार की 108 निशुल्क एंबुलेंस से पीएमसीएच भेजा गया.

पीएमसीएच में परिजनों और बच्चे को उतारकर दुमका की एंबुलेंस लौट गई. इस बीच पीएमसीएच में बच्चे की जांच की गई तो उसे मृत पाया गयाजब बच्चे के शव को वापस दुमका ले जाने की बारी आई तो वहां एंबुलेंस की जरूरत पड़ी. लेकिन परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि शव को प्राइवेट एंबुलेंस से दुमका ले जा सकते और वो सरकारी एंबुलेंस के भरोसे चार घंटे अस्पताल में ही भटकते रहे.

काफी देर तक जब सरकारी एंबुलेंस की कोई व्यवस्था नहीं हुई तो उनके परिचितों ने परिवार से शव को ले जाने का इरादा त्याग देने की बात कही और कहा कि शव को अस्पताल में ही कहीं दफना दो और ट्रेन से वापस चले जाओ. लेकिन वहां मौजूद कुछ लोगों ने चंदा जुटाकर निजी एंबुलेंस से शव को दुमका भिजवाया.

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First published: 2 February 2019, 16:11 IST
 
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