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धरना मना है: अरविंद केजरीवाल ने अपने घर के बाहर किसी भी विरोध प्रदर्शन पर लगाई पाबंदी

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 7:51 IST

यह दिल्ली के लिए विडंबना है जो पिछले पांच सालों में कई बड़ी राजनीतिक घटनाओं का गवाह रहा है. एक मशहूर प्रदर्शनकारी ने प्रदर्शन पर बैन लगा दिया है. धरना, भाषण और जनसभा को दिल्ली में उस पार्टी की सरकार द्वारा बैन किया गया है जो खुद को आंदोलनों से जन्मा बताता है. यही सबसे बड़ी विडंबना है कि इस पार्टी के मुख्य प्रदर्शनकारी के निवास के बाहर प्रदर्शनों पर बैन लगा है.

2010 में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चलाने वाले लोगों ने तीन साल बाद आम आदमी पार्टी का गठन किया था. पार्टी ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है. पार्टी के सदस्य अब भी गर्व से कहते हैं कि राजनीतिक विकल्प देने वाली उनकी पार्टी जन आंदोलन से निकली हैं.

यह मात्र विडंबना है या इस आदेश के पीछे कोई और बात है? दिल्ली सरकार ने 31 अगस्त तक सिविल लाइंस इलाके में 6, फ्लैगस्टाफ रोड पर स्थित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर बाहर सार्वजनिक बैठकों, विरोध प्रदर्शन और भाषणों प्रतिबंध लगा दिया है. सब मजिस्ट्रेट बीके झा ने केजरीवाल के घर के बाहर धारा 144 लगा दिया है. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह जरूरी था.

खुद का इतिहास भूल गई आप पार्टी

दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार, 'सीएम केजरीवाल के घर के आसपास विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और संगठनों द्वारा किए जाने वाले धरना, प्रदर्शन, भाषण और नारेबाजी को प्रतिबंधित किए जाने की जरूरत है.' दिल्ली में एसडीएम सीधे दिल्ली सरकार के अंदर आते हैं. इस आदेश को पारित करके आम आदमी पार्टी ने खुद का इतिहास भुला दिया जो प्रदर्शनों के लिए जानी जाती है और इसके मुखिया की पहचान विशेष तौर पर इसी रूप में हैं.

दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते हुए केजरीवाल द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने और पूरी रात सड़क पर सोने के लिए उनकी काफी आलोचना हुई थी. केजरीवाल के धरने इतने मशहूर हैं कि दिल्ली के एक निजी एफएम चैनल ने अपने रेडियो शो में 'धरना कुमार' के नाम से एक हास्य चरित्र तक बना डाला है. 

अपनी आलोचनाओं के बावजूद केजरीवाल लगातार प्रदर्शन करते हैं और अपने विरोध के अधिकार का बचाव करते हैं. क्या अपनी ही सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के हक का बचाव केजरीवाल नहीं करेंगे?

केजरीवाल और उनकी पार्टी ने हमेशा अपनी आलोचनाओं का जोरदार तरीके से बचाव करती है. क्या यह बैन लगाकर उन्होंने यह साबित नहीं कर दिया कि वे पूर्ण शक्ति के साथ शासन करना चाहते हैं?

क्या आप को संतोष कोली याद है?

आंदोलनकारी से मुख्यमंत्री बनने तक के सफर में केजरीवाल और उनके सहयोगियों ने खुद कई बार धारा 144 को तोड़ा है. इसके अलावा कई बार धारा 144 के तोड़ने के आरोप में जेल भी जा चुके हैं. दूसरी ओर, पिछली सरकार द्वारा कभी लंबे समय के लिए इस धारा को नहीं लगाया गया है. आईपीसी की धारा 144 के तहत चार लोग से ज्यादा एक जगह पर एकत्रित नहीं हो सकते हैं.

7 अगस्त को हर साल आम आदमी पार्टी के लोग अपनी कार्यकर्ता संतोष कोली को याद करते हैं जिनकी मौत 2013 में एक सड़क दुर्घटना में हुई थी. जानी मानी फायरब्रांड आंदोलनकारी कोली पर कई बार हमले हुए थे. उन्होंने अनगिनत बार धारा 144 तोड़कर धरना प्रदर्शन किया था. इसकी वजह थी कि उन्होंने वंचितों के न्याय के लिए कई बार विरोध-प्रदर्शन किया था.उनके कई सहयोगी आज भी कोली की कविता 'गांधी तेरे देश में' को याद करते हैं जो कोली हर प्रदर्शन में गाती थीं. अगर आज कोली जिंदा होती तो क्या वह इस बैन की समर्थन में होती?

First published: 5 August 2016, 7:36 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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