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धींगरा कमीशन की रिपोर्ट बन सकती है एक नए सियासी तूफान का सबब

आकाश बिष्ट | Updated on: 1 July 2016, 8:07 IST
(गेट्टी)

जस्टिस एसएन धींगरा आयोग गुड़गांव में कुछ कंपनियों को दिए गए लाइसेंस की जांच की रिपोर्ट सौंपता इससे पहले ही कांग्रेस ने इसे 'राजनीति से प्रेरित' बताना शुरू कर दिया. जांच के दायरे में जो कंपनियां थीं उनमें से एक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की है.

नाम न देने की शर्त पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कैच को बताया कि वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष का दामाद होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है. इस नेता के अनुसार जब रिपोर्ट सार्वजनिक होगी तब पार्टी इसपर उचित जवाब देगी.

उन्होंने बताया, "भारत की सबसे पुरानी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की छवि खराब करने के लिए चुनिंदा तरीके से भूमि सौदों के मामले उठाए जा रहे हैं. हम इसका समुचित जवाब देंगे."

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हरियाणा में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुड़गांव में भूमि सौदों की जांच के लिए धींगरा आयोग का गठन किया था. इसके केंद्र में मुख्य रूप से रियल एस्टेट ग्रुप डीएलएफ और वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के बीच गुड़गांव के सेक्टर 83 में हुआ सौदा था.

आयोग को जांच करनी थी कि व्यावसायिक कॉलोनियों के निर्माण की इजाजत किन परिस्थितियों में दी गई और क्या इस सौदे से सरकारी खजाने को कोई नुकसान हुआ है?

आयोग को अपनी रिपोर्ट छह महीने पहले सौंपनी थी लेकिन हरियाणा सरकार ने उसकी समय सीमा छह महीने आगे बढ़ा दी है. नई समय सीमा भी गुरुवार को खत्म हो गई.

कार्यकाल बढ़ाया गया

धींगरा आयोग को अतिरिक्त समय इसलिए देना पड़ा क्योंकि सरकार ने कुछ नए सेक्टरों (78 से 86) में हुए सौदों को भी जांच के दायरे में ला दिया. आयोग को 8 दिसंबर 2015 को रिपोर्ट सौंपनी थी. उसके बाद आयोग से जून के पहले हफ्ते में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया. बाद में आयोग ने रिपोर्ट पूरी करने के लिए तीन और हफ्ते मांगे.

बुधवार को जस्टिस धींगरा ने सार्जवनिक रूप से बताया है कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट गुरुवार को राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी. धींगरा ने दावा किया कि एक साल में एक सदस्यीय आयोग ने करीब 250 फाइलों की जांच की और गुड़गांव की विशेष अदालत में 25 सरकारी अधिकारियों से पूछताछ की. 

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धींगरा आयोग ने रॉबर्ट वाड्रा और आईएएस अशोक खेमका को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया था

हालांकि आयोग ने वाड्रा और आईएएस अफसर अशोक खेमका दोनों को ही सुनवाई में नहीं बुलाया था. खेमका ने ही साल 2012 में वाड्रा की कंपनी और डीएलएफ के करार की वैधानिकता पर सवाल खड़ा करते हुए उसे रद्द कर दिया था.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इसे चुनावी मुद्दा भी बनाया था. 2014 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया था.

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आयोग ने राज्य के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा को दो बार पूछताछ के लिए बुलाया. हालांकि हुड्डा ने अपना पक्ष रखने के लिए अपने वकील को भेजा था. जब विवादित भूमि सौदे हुए तो शहरी नगर विकास मंत्रालय हुड्डा के अंतर्गत था. हुड्डा से गुड़गांव के चार गांवों का भू-उपयोग बदलने को लेकर सवाल पूछे गए.

बुधवार को हुड्डा ने हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को पत्र लिखकर धींगरा आयोग की वैधानिकता पर सवाल उठाया. हुड्डा ने राज्यपाल से कहा कि वो ये सुनिश्चित करें कि आयोग विपक्षी कांग्रेस पार्टी का उत्पीड़न न करे. अपने पत्र में उन्होंने दावा किया कि इस आयोग का गठन सभी नियम-कानून ताक पर रखकर किया गया है.

माना जा रहा है कि धींगरा आयोग की रिपोर्ट जल्द ही सार्वजनिक हो सकती है और उसके बाद भारत के दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों के बीच सियासी जंग का तेज होना भी तय है.

First published: 1 July 2016, 8:07 IST
 
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