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रिलायंस पर लगा गैस चोरी का आरोप

नीरज ठाकुर | Updated on: 7 December 2015, 20:48 IST
QUICK PILL
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज पर सरकारी कंपनी ओएनजीसी ने गैस चोरी का आरोप लगाया है. जांच रिपोर्ट में ओएनजीसी के दावे में सच्चाई नजर आ रही है.
  • ओनएजीसी का दावा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जानबूझकर उसके कुंओं से 11.9 घन मीटर गैस की चोरी की.

रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए विवाद नई बात नहीं है. देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट पर अक्सर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं. कंपनी के खिलाफ हालिया आरोप यह है कि उसने सरकारी कंपनी ओएनजीसी के कृष्णा-गोदावी बेसिन में मौजूद गैस फील्ड से गैस चुराई है. 

गैस चोरी के आरोपों के सामने आने के बाद दोनों कंपनियां एक दूसरे से उलझ गई हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज देश के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी की कंपनी है. कृष्णा-गोदावरी बेसिन भारत का सबसे बड़ा गैस फील्ड रहा है और 1999 में सरकार ने इसकी बोली लगाई थी. 2009 में आवंटित गैस फील्ड से कंपनी ने गैस निकालना शुरू किया. ओएनजीसी ने भी 2009 से उत्पादन का काम शुरू किया और तब से लेकर आज तक वह 11 नए गैस क्षेत्रों की खोज कर चुकी है. 

किस बात पर है झगड़ा ?

2013 में ओएनजीसी ने दावा किया कि आरआईएल ने जानबूझकर उसके कुंओं के नजदीक खुदाई की और बड़ी मात्रा में गैस चोरी की. जब आरआईएल ने इस मामले में ओएनजीसी की शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया तो कंपनी ने मई 2015 में दिल्ली हाई कोर्ट में इसके खिलाफ मुकदमा कर दिया.

2013 में ओएनजीसी ने आरआईएल पर उसके कुंओं से बड़ी मात्रा में गैस चुराने का आरोप लगायाआरआईएल ने ओएनजीसी के आरोपों को आधारहीन बताकर खारिज करने की कोशिश की. कंपनी ने कहा कि बगल के कुंए से तकनीकी तौर पर गैस चुराना बेकार की बात है. कंपनी ने यह भी कहा कि उसने डीजीएस की योजना यानी फील्ड डिवेलपमेंट प्लान के मुताबिक गैस निकाली. 

मामले को सुलझाने के लिए ओएनजीसी और आरआईएल की सहमति से डीजीएच ने अमेरिकी कंसल्टेंट डिगोलर मैकनॉटन को फील्ड के सर्वे का जिम्मा दिया ताकि दोनों कंपनियों के दावे की पड़ताल की जा सके.

क्या कहती है रिपोर्ट

इस हफ्ते आई रिपोर्ट में कंसल्टेंट ने ओएनजीसी के जी-4 ब्लॉक और रिलायंस के केजी डी-6 ब्लॉक के बीच 'संपर्क ' की बात की है. रिपोर्ट के मुताबिक ओएनजीसी का दावा सही प्रतीत होता है. रिलायंस को 'गैस चोरी' के लिए जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है. 

अनुमानों के मुताबिक आरआईएल ने विवादित कुंए से 31 मार्च 2015 तक 58.7 अरब घन मीटर गैस की चोरी की.

ओएनजीसी ने 'चुराई गई' गैस की कीमत 11,000 करोड़ रुपये बताई है और यह कीमत 2013 के बाजार मूल्य पर आधारित है. उस वक्त 4.2 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस बिक रही थी. 

क्या आरआईएल चुकाएगी जुर्माना ?

पिछले अनुभव को देखते हुए तो नहीं लगता कि रिलायंस किसी भी तरह के जुर्माने का भुगतान करेगी. बेशक सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए कंसल्टेंट की रिपोर्ट में चोरी का जिक्र क्यों न किया गया हो. 

आरआईएल पहले से ही केजी बेसिन से जुड़े 6 मुकदमों का सामना कर रही है. सभी मामले दिल्ली और बंबई हाई कोर्ट में लंबित है. 

पिछले साल आरआईएल ने गैस की कीमत नहीं बढ़ाए जाने के मामले में सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. 

कंपनी के बड़े वकील अभी तक सरकारी वकीलों से बेहतर साबित हुए हैं. रिलायंस के वकील मामले को जबरदस्त तरीके से लंबा खींचने में सफल रहे हैं.

आरआईएल के लंबित मामले

  • आरआईएल ने एनटीपीसी को 2.4 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस सप्लाई करने का ठेका लिया था. कंपनी ने बाद में 4.2 डॉलर प्रति यूनिट की दर से कम कीमत पर गैस देने से मना कर दिया. रिलायंस 2006 में इस मामले को लेकर बंबई हाई कोर्ट चली गई.
  • 2005 में आरआईएल ने रिलायंस नैचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड को गैस देने से मना कर दिया था. यह मुकेश अंबानी के भाई अनिल अंबानी की कंपनी थी. बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और कंपनी ने रिलायंस के पक्ष में फैसला दिया. 
  • 2011 में सीएजी की रिपोर्ट में रिलायंस पर प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट और केजी डी-6 के पूंजीगत खर्च को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाने का आरोप लगा.
  • जब इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने आरआईएल को 2.3 अरब डॉलर के पूंजीगत खर्च को वसूलने से मना कर दिया तो कंपनी ने सरकार को 23 नवंबर 2011 को नोटिस भेज दिया. यह मामला अभी तक लंबित है. 2014 में आरआईएल ने सरकार के खिलाफ एक और मामला दायर किया जो 1 अप्रैल 2014 से गैस की कीमत नहीं बढ़ाए जाने के खिलाफ था. 

 

First published: 7 December 2015, 20:48 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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