Home » इंडिया » Did you know education is a big source of black money? Read on
 

एजुकेशन सेक्टर में हो रहा है काले धन को बनाने और खपाने का खेल!

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2017, 16:43 IST

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के ताज़ा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी मात्रा में काला धन पैदा किया और खपाया जाता है. साल भर पहले तैयार की गई इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन मासिक पत्रिका इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली ने इस अध्ययन को हासिल करके अपने अंक में छाप दिया है. ईपीडब्ल्यू ने 29 अप्रैल के अंक में इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है.

1 हज़ार पन्ने वाली इस रिपोर्ट के एक चैप्टर में साफ़ कहा गया है कि समाज सेवा के नाम पर शिक्षा के क्षेत्र में काला धन खपाया जा रहा है. भारत का एजुकेशन सेक्टर दुनिया में काफी बड़ा माना जाता है और पिछले 20 सालों में इस सेक्टर में काफी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं.

भारत में शिक्षा को गैर लाभकारी गतिविधि माना जाता है. इसलिए ज़्यादातर स्कूल ट्रस्ट द्वारा संचालित होते हैं, जहां मुनाफा बनाने की गुंजाइश नहीं होती. रिपोर्ट कहती है कि बहुत सारी कंपनियां ज़मीन ख़रीदती हैं, उस पर भवन बनाती हैं, जिसे ट्रस्ट को लीज़ पर सौंपकर स्कूल का संचालन किया जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक सोसाएटी एक्ट के तहत चलने वाले स्कूल रियल एस्टेट कंपनियों के साथ स्कूल भवन निर्माण का अनुबंध करते हैं. इस तरह के समझौते में स्कूल तो मुनाफ़ा नहीं बना सकता, लेकिन रियल एस्टेट कंपनियां ज़रूर ऐसा करती हैं.

इसके साथ ही रिपोर्ट कहती है कि एडमिशन की प्रक्रिया में पारदर्शिता लगभग नहीं के बराबर है. स्कूलों में पैरेंट्स को तरह-तरह के डोनेशन देने के लिए मजबूर किया जाता है. स्कूलों में एडमिशन की कुल सीट का 20-25 फीसदी कोटा मैनेजमेंट का होता है. इस कोटे के तहत उन छात्रों को एडमिशन दिया जाता है जिनमें क्षमता तो नहीं होती लेकिन पेशेवर डिग्री पाने के लिए वह कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार होते हैं.

देश भर में लगभग चार सौ मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें से अधिकांश निजी कॉलेज हैं. रिपोर्ट कहती है कि ज़्यादातर कॉलेजों में एमबीबीएस के कोर्स में एडमिशन के नाम पर 8 लाख से 50 लाख रुपए तक वसूला जाता है. कहीं-कहीं यह रकम एक सीट के लिए 1 करोड़ रुपए तक वसूली जाती है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि हर साल मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग और प्रबंधन के कॉलेजों में 5,953.22 करोड़ रुपये एडमिशन के नाम पर वसूले जाते हैं.

First published: 6 May 2017, 16:43 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी