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डीजल कार बैन: सुप्रीम कोर्ट को इस तरह धता बता रहे कार डीलर

सादिक़ नक़वी | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
QUICK PILL
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से की वजह से 16 दिसंबर 2015 और 30 अप्रैल 2016 के बीच 11,000 वाहन कम बने हैं, जिसका असर उद्योग के लगभग 5,000 लोगों के रोजगार पर पड़ेगा.महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी वाहन निर्माता कंपनियों ने इस प्रतिबंध से निबटने का एक रास्ता निकाल लिया है. यह अपनी उन गाड़ियों में 1999 सीसी का इंजन लगाने लगी हैं

लक्जरी कार निर्माताओं के सेल्स एक्जिक्यूटिव्स ने 2000 सीसी या उससे अधिक क्षमता वाली डीजल कारों की बिक्री पर प्रतिबंध के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बचाव का नया रास्ता खोज निकाला है.

अगर आपको एक महंगी सेडान या एसयूवी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से आप इसे दिल्ली में नहीं खरीद पा रहे, तो ये एक्जिक्यूटिव इन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश में कराने की पेशकश करते हैं.

दरअसल बड़ी कारों की बिक्री पर प्रतिबंध उन कई उपायों में से एक था, जो सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदूषण घटाने के लिए दिसंबर में लागू किए थे. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सुझावों को देखते हुए ऐसा किया था.

कार उद्योग से जुड़े लोगों की मानें तो प्रतिबंध के कारण हो रहने नुकसान की भरपाई करने के लिए डीलर ऐसा कर रहे हैं. अधिकांश लक्जरी कार मॉडल 2000 सीसी से अधिक क्षमता वाले हैं और मर्सिडीज बेंज इंडिया जैसी कंपनियां इस आदेश को बदलवाने की कोशिश कर रही हैं.

मर्सिडीज पर इसका अधिक असर पड़ा है क्योंकि ऑडी और बीएमडब्ल्यू के अधिक बिक्री वाले कई मॉडल 2000 सीसी से कम क्षमता वाले हैं.

कैच ने टाटा के जगुआर लैंड रोवर के नये मॉडल डिस्कवरी स्पोर्ट की खरीदारी करने के लिए डीलर से पूछताछ की. टाटा के दिल्ली के मोहन एस्टेट के डीलर एएमपी मोटर्स के सेल्स एक्जिक्यूटिव ने फोन पर बताया कि इस गाड़ी का दिल्ली में रजिस्ट्रेशन कराना संभव नहीं है.

हालांकि, इसके लिए “किसी मित्र या रिश्तेदार की मदद ली जा सकती है जो उत्तराखंड में या एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के बाहर कहीं भी रह रहा हो”.

उसने यह भी बताया कि ऐसा करने से आप इस गाड़ी को दिल्ली में चला सकेंगे, क्योंकि गाड़ी चलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, साथ ही आपको पैसों की भी कुछ बचत हो जायेगी.

उसने बताया कि “उत्तराखंड में रजिस्ट्रेशन शुल्क केवल आठ फीसदी है.” अगर दिल्ली में इस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध न होता, तो यहां इसके लिए 15 फीसदी लगता. उसने 2200 सीसी डीजल इंजन वाली इस महंगी एसयूवी के टेस्ट-ड्राइव के लिए लुभाते हुए कहा, “इस काम के लिए जरूरत है तो बस एक रेंट एग्रिमेंट की.”

उसने आगे बताया, “आपको यह गाड़ी किस रंग में चाहिए, यह बता देंगे, तो हम यह बता सकते हैं कि कितने दिनों में इस कार की डिलीवरी आपके पास हो जायेगी. अगर आप इसका रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड में कराते हैं, तो आपको दो लाख रुपये से अधिक की बचत हो जायेगी.”

पता चला है कि इस प्रतिबंध से पहले भी भारी संख्या में लक्जरी कारों का रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड में कराया जाता था ताकि कम टैक्स देना पड़े. पिछले साल यह पांच फीसदी थी और अब यह बढ़ा कर आठ फीसदी कर दिया गया है.

दिल्ली के डायशे मोटोरेन, जहां जर्मन बीएमडब्ल्यू बिकती हैं, का एक्जिक्यूटिव एक कदम और आगे निकल गया. उसने खुद “इससे जुड़े कागज तैयार कराने” की पेशकश की, ताकि आसानी से रजिस्ट्रेशन हो सके.

यह समझाते हुए कि यह काम मुश्किल नहीं है, उसने कहा, “आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है. हम इसका ध्यान रखेंगे.” हालांकि किसी वाहन का रजिस्ट्रेशन आपको वहीं कराना अनिवार्य है, जहां आप रहते हैं, लेकिन यह नियम शायद ही माना जाता हो. उसने आगे कहा, “अगर आपको उत्तराखंड या आगरा का स्थानीय पता देने वाला कोई व्यक्ति नहीं मिलता, तो रेंट एग्रिमेंट हम बनवा देंगे.”

जब कैच ने पूछा कि रेंट एग्रिमेंट पाने के लिए क्या सचमुच उत्तराखंड में किराये पर जगह लेनी पड़ेगी? उसने तुरंत कहा, “नहीं!” सेल्स एक्जिक्यूटिव से 3-लीटर डीजल इंजन वाले 5 सीरीज सेडान के बारे में पूछा गया, जिसकी एनसीआर में बिक्री पर प्रतिबंध है. उसने कहा, “एक बार आप मन बनाइये, फिर छूट वगैरह के बाद आखिरी कीमत बैठ कर तय कर ली जायेगी.”

बीएमडब्ल्यू के प्रवक्ता से जब ईमेल के जरिये यह पूछा गया कि दिल्ली में इसके डीलरों ने 2000 सीसी या इससे अधिक क्षमता वाले कितने डीजल वाहनों की बिक्री की है और ऐसे वाहनों में कितनों का रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड में किया गया है, तो उसने इसका कोई जवाब नहीं दिया.

इस बीच सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रोजगार पर असर पड़ा है. सियाम ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है, “इन वाहनों के एनसीआर में प्रतिबंध की वजह से 16 दिसंबर 2015 और 30 अप्रैल 2016 के बीच 11,000 वाहन कम बने हैं, जिसका असर उद्योग के लगभग 5,000 लोगों के रोजगार पर पड़ेगा.”

महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी वाहन निर्माता कंपनियों ने इस प्रतिबंध से निबटने का एक रास्ता निकाल लिया है. यह अपनी उन गाड़ियों में 1999 सीसी का इंजन लगाने लगी हैं. दूसरी ओर टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स (टीकेएम) ने शिकायत की है कि न्यायालय का आदेश भारत में निवेशकों के विश्वास को खत्म कर रहा है.

टीकेएम के वाइस चेयरमैन शेखर विश्वनाथन ने कहा, “पिछले साल दिसंबर के मध्य से हाई-एंड डीजल कारों और एसयूवी की बिक्री पर प्रतिबंध ने भारत में टोयोटा मोटर्स के विश्वास को हिला दिया है और इस बारे में जारी अनिश्चितता इस दिक्कत को बढ़ा रही है. लेकिन टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उस विश्वास को फिर से बहाल करें.”

कार निर्माता कुछ भी कहें, यह सच है कि बड़ी कारों पर सुप्रीम कोर्ट का प्रतिबंध एक मजाक बन कर रह गया है.

First published: 19 May 2016, 7:19 IST
 
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