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डिग्री खोना-फटना होगी पुरानी बात, अगले साल से मिलेंगे डिजिटल प्रमाणपत्र

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 September 2016, 14:21 IST

लोगों को अपने शैक्षिक दस्तावेज संभालकर रखने और उनके खोने-फटने की समस्या से जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी. केंद्र सरकार ने इसके लिए अगले वर्ष यानी 2017 से शैक्षिक प्रमाणपत्रों, उपाधियों को डिजिटल रूप में जारी करने की घोषणा की है.

इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन की दिशा में राष्ट्रीय अकादमिक निक्षेपागार (नेशनल एकेडेमिक डिपॉजिटरी) की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है. कागज में आने वाले शेयरों (फाइनेंसियल सिक्योरिटीज) को डीमैट के रूप में डिजिटल किए जाने की प्रक्रिया करीब डेढ़ दशक पहले से ही शुरू हो चुकी है इसने निवेशकों को काफी सुरक्षित वित्तीय स्थिति प्रदान की है.

इसी तकनीक को अब शैक्षिक क्षेत्र में भी इस्तेमाल किए जाने की पहल की जा रही है. अब वक्त आ चुका है कि अकादमिक डिग्रियों, अवॉर्डों और सर्टिफिकेटों का प्रमाणीकरण डिजिटल स्तर पर किया जाए. संस्थानों को एनएडी टेक्नोलॉजी को अपनाना चाहिए ताकि इस लक्ष्य को पाया जा सके.

जावड़ेकर ने सभी संबंधित संस्थानों से अपील की कि वे एनएडी को प्रयोग में लाने का लक्ष्य 2017 तक पूरा कर लें. मानव जीवन में तकनीक के चलते काफी तेजी से बदलाव आ रहा है और यह पहल पारदर्शिता लाने में बढ़ोतरी करेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल कलेक्शन होने से शैक्षिक संस्थानों, छात्रों और रोजगार प्रदाताओं को ऑनलाइन प्रमाणपत्र आदि के सत्यापन की सुविधा होगी. साथ ही धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज से भी छुटकारा मिल जाएगा. इस सुविधा को हर दिन 24 घंटे कभी भी प्राप्त किया जा सकेगा. 

इसके लिए समूचे देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों का डाटाबेस तैयार किया गया है

यह फैसला युवा सोच और उनकी मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है. इस नए कदम के लिए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ समुचित तालमेल कर तकनीकी तैयारी से तेजी से चल रही है. 

इसके लिए समूचे देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों का डाटाबेस तैयार किया गया है. सीबीएसई को भी इसमें शामिल किया जा रहा है. हर छात्र की जानकारी अपलोड की जा रही है. जब छात्र परीक्षा उत्तीर्ण कर लेंगे तो दीक्षांत समारोह के दौरान उन्हें डिजिटल डिग्री दी जाएगी. 

डिजिटल डिग्री से कागजी डिग्री की प्रणाली समाप्त होने के साथ ही छात्र, सरकार और समाज सभी को लाभ मिलेगा और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा. 

बता दें कि अब तक देश में तमाम स्थानों पर डिग्रियों-प्रमाणपत्रों-अंकपत्रों को पाने के लिए क्लर्क पैसों की मांग करते थे. जबकि इनके खो जाने या फट जाने पर दूसरी डिग्री पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी. इसमें अखबारों में विज्ञापन देने के बाद उसकी कटिंग ले जाकर बोर्ड-यूनिवर्सिटी आदि में देेनी होती थी जिसके बाद वहां के बाबू कई चक्कर लगवाते थे या फिर जल्द पाने के लिए पैसों की मांग करते थे. 

First published: 11 September 2016, 14:21 IST
 
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