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जल स्रोतों के लिए जहर बन गया है अपशिष्ट पानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 January 2016, 17:57 IST

आज के समय में साफ पीने का पानी बड़ी समस्या बन गया है. शहरों में स्थिति और भी भयावह है. गंदे पानी से बीमार होने की खबरें आज किसी को चौंकाती नहीं है.

आज देश के शहरी क्षेत्र में रहने वाले 37.7 करोड़ लोगों द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट पानी का केवल 30 फीसदी हिस्सा ही सफाई संयंत्रों तक पहुंच पाता है.

इंडियास्पेंड के एक विश्लेषण के अनुसार बाकी बचा 70 फीसदी गंदा पानी नदियों, समुद्रों, झीलों और कुओं में बहा दिया जाता है. इसके कारण देश के जल निकायों का तीन-चौथाई हिस्सा गंदा हो रहा है.

सरकार द्वारा दिसंबर 2015 को जारी आंकड़ों के अनुसार शहरी इलाकों से अनुमानित प्रति दिन 62,000 करोड़ लीटर (एमएलडी) गंदा पानी उत्पन्न होता है. हालांकि, भारत में केवल 23,277 करोड़ लीटर (एमएलडी) या 37 प्रतिशत गंदे पानी को साफ किया जाता है.

गंदे पानी को बिना साफ किए जल निकायों में छोड़ देने की वजह से करीब 80 प्रतिशत जल निकाय दूषित हो सकते हैं

इस आंकड़े से यह बात भी सामने आई कि भारत में सूचीबद्ध किए गए 816 नगर निगम के सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों (एसटीपी) में से केवल 522 संयत्र ही काम करते हैं.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 'सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)' पर की गई जांच की रिपोर्ट के अनुसार 79 एसटीपी काम नहीं करते जबकि 145 निमार्णाधीन और 70 संयंत्र प्रस्तावित हैं.

एक रिपोर्ट के अनुसार गंदे पानी को बिना साफ किए जल निकायों में छोड़ देने की वजह से करीब 80 प्रतिशत जल निकाय दूषित हो सकते हैं.

इसके अलावा घरों से निकलने वाले गंदे पानी का 80 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय जल निकायों में बहाया जाता है.

करोड़ों घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं

लोकसभा में दिसंबर, 2015 में दी गई सूचना के अनुसार, भारत के करीब 48.4 प्रतिशत (8.79 करोड़ घरों) ग्रामीण घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है.

शहरी इलाकों में केवल 32.7 प्रतिशत घरों में ही शौचालय की सुविधा है, जबकि 3 करोड़ घरों में सेप्टिक टैंक होने के बावजूद दूषित पानी के उपचार की उचित व्यवस्था नहीं है.

विश्व में करीब 2.4 अरब लोगों के पास बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव है

शहरी इलाकों की आबादी का करीब 12.6 प्रतिशत हिस्सा खुले में शौच करता है, जबकि झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाली आबादी का 18.9 प्रतिशत हिस्ता खुले में शौच के लिए जाता है.

नेशनल सैंपल सर्वे 2012 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 1.7 प्रतिशत घरों के लोग शौचालय होने के बावजूद शौच के लिए खुले मैदान में जाते हैं.

पिछले साल आई एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण आबादी का 55 प्रतिशत हिस्सा खुले में शौच के लिए जाता है. इस सूची में ओडिशा शीर्ष पर है.

2.4 अरब लोगों के पास बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनिया की आबादी का लगभग 68 प्रतिशत स्वच्छता की सुविधाएं उपलब्ध हैं. हालांकि, विश्व में करीब 2.4 अरब लोगों के पास बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव है.

भारत सरकार की 2015-2016 तक ग्रामीण इलाकों में 25 लाख घरों में शौचालय बनाने की योजना है, जिसमें से 882,905 का निर्माण2015 में हो गया है.

सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान के तहत अब तक 100,000 समुदायों में से 32,014 समुदायों और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हो चुका है.

First published: 28 January 2016, 17:57 IST
 
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