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फिल्मों की स्क्रिप्ट से लेकर तमिलनाडु की 61 साल की राजनीति, ऐसी कहानी जिसमे कभी नहीं हारे करुणानिधि

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 August 2018, 8:23 IST

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि को मंगलवार को कावेरी अस्पताल में निधन हो गया. वो चेन्नई के कावेरी अस्पताल में भर्ती थे. कावेरी हॉस्पटिल ने प्रेस रिलीज जारी कर उनकी मौत की पुष्टि कर दी हैै. उनकी हालत खराब होने के बाद कावेरी हॉस्पटिल के बाहर उनके समर्थक जमे हुए हैं.

करुणानिधि 28 जुलाई से अस्पताल में भर्ती थे. उनकी मंगलवार सुबह से ही तबीयत बहुत बिगड़ गई थी. उनकी मौत मंगलवार को शाम 6 बजकर 10 मिनट पर हुई. उनके घर में भी उनकी मौत के बाद शोक की लहर है.

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करुणानिधि को एक लेखक, नाटककार और पटकथा लेखक के तौर पर जाना जाता था. कला के प्रति रूचि और ज्ञान होने के कारण उनके समर्थक 'कलाईनार' यानि कि "कला का विद्वान" भी कहते हैं. साउथ के महान कलाकार माने जाने वाले रजनीकांत ने भी करुणानिधि के निधन की खाबार पर सबसे पहले यही कहा, 'हमारा कलाईनार हमारे बीच नहीं रहे.''

करुणानिधि ने 20 वर्ष की उम्र में तमिल फिल्म उद्योग की कंपनी 'ज्यूपिटर पिक्चर्स' में पटकथा लेखक के रूप में अपना करियर शुरू किया था. जस्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी के भाषण से उन्हें राजनीती में एंट्री मिली और फिर उन्होंने राजनीति में अपने पैर ऐसे फैलाये कि 61 साल की राजनीति में वो जनता बन गए.

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हिंदी विरोधी आंदोलन से वो 14 साल की उम्र से जुड़े हुए थे. इसके बाद उन्होंने एक युवाओं का एक संगठन बनाया. ये संगठन 'मनावर नेसन' नाम का एक अखबार निकालता था.

करुणानिधि (M Karunanidhi) पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उनका कार्यकाल 1969–71, 1971–76, 1989–91, 1996–2001 और 2006–2011 के बीच था.

First published: 8 August 2018, 8:23 IST
 
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