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तमिलनाडु: विजयकांत-करुणानिधि ने बनायी जोड़ी

आकाश बिष्ट | Updated on: 4 March 2016, 22:43 IST
QUICK PILL
  • विजयकांत की पार्टी ने डीएमके साथ गठबंधन करने का फैसला कर लिया है. पिछले आम चुनाव में विजयकांत की पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी.
  • डीएमके  की रणनीतिक बड़े गठबंधन की मदद से एआईडीमके को विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर देने की है. पार्टी को भरोसा है कि वह सत्ता विरोधी लहर की मदद से जयललिता को सत्ता से बेदखल कर देगी.

लंबी जद्दोजहद के बाद डीएमके आखिरकार डीएमडी के नेता विजयकांत के साथ हाथ मिलाने को तैयार हो गई है. पार्टी की यह रणनीति अगली बार एआईडीएमके  (अन्ना द्रमुक) को सत्ता में आने से रोकने की है. 

डीएमके (द्रमुक)  के सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर लगभग सहमति बन चुकी है और वह इस मामले में डीएमडीके नेता विजयकांत की तरफ से औपचारिक घोषणा किए जाने का इंतजार कर रहे हैं.

विजयकांत को राज्य का कप्तान कहा जाता है और माना जा रहा है कि वह इस बारे में 7 या 9 मार्च को घोषणा करेंगे क्योंकि विजयकांत के लिए यह तारीख शुभ है. एम के स्टालिन और कलानिधि मारन समेत डीएमके  के बड़े नेता पिछले कई महीनों से लगातार विजयकांत के संपर्क में थे. 

कई दौर की बातचीत के बाद दोनों दलों के बीच सीटों के समझौते को लेकर बात बनी. डीएमके के सूत्रों ने बताया कि विजयकांत 90 सीटों पर चुनाव लड़ने को प्रतिबद्ध थे जबकि डीएमके उन्हें इतनी सीटें देने की फिराक में नहीं थी. आखिरकार डीएमके ने विजयकांत को 50-60 सीटें देने का फैसला किया क्योंकि उसे गठबंधन में अन्य दलों को भी सीटें देनी हैं.

विजयकांत 90 सीटों पर चुनाव लड़ने को प्रतिबद्ध थे जबकि डीएमके उन्हें इतनी सीटें देने की फिराक में नहीं थी

हालांकि अभी तक गठबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं मिल पाई है. माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में पार्टी की तरफ से घोषणा किए जाने के बाद इस बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी मिल पाएगी. डीएमके ने साफ कहा था कि वह अपने गठबंधन के किसी भी सहयोगी दल को सरकार में शामिल नहीं होने देगी. 

पार्टी के अगले स्थानीय निकाय चुनाव में डीएमडीके को मेयर का पद देने का फैसला किया है जिसे विजयकांत की पार्टी ने स्वीकार कर लिया है.

बीजेपी को झटका

विजयकांत के डीएमके के साथ जाने से सबसे बड़ा झटका बीजेपी को लगा है क्योंकि पिछले चुनाव में पार्टी ने डीएमडीके के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. इतना ही नहीं विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता विजयकांत के साथ बातचीत कर रहे थे. डीएमडीके का करीब 9 फीसद वोटबैंक पर कब्जा है.

2011 की शुरुआत में डीएमडीके ने एआईडीएमके के साथ मिलकर 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन यह गठबंधन उस वक्त टूट गया जबकि चुनाव में एआईडीएमके को जबरदस्त जीत मिली.

डीएमके विधानसभा चुनाव के पहले डीएमडीके, कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को साथ लाने की कोशिश कर रही है. वहीं एआईडीएमके प्रमुख जे जयललिता संसद में एयरसेल-मैक्सिस डील का हवाला देकर कांग्रेस और डीएमके बीच के गठबंधन को टारगेट कर रही हैं.

इसके अलावा जयललिता सरकार ने राजीव गांधी की हत्या के दोषी 7 लोगों की रिहाई को लेकर केंद्र सरकार का विचार जानने की कोशिश की है. माना जा रहा है कि सरकार का यह फैसला राजनीति से प्रेरित है.

जयललिता ने जबरदस्त चुनाव प्रचार की बिसात बिछा दी है क्योंकि वह डीएमके और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की स्थिति को लेकर सहज नहीं है.

डीएमके  भी अपनी तरफ से कोई कसर छोड़ने के पक्ष में नहीं है. पार्टी ने चेन्नई बाढ़ के दौरान जयललिता के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा नहीं किए जाने को लेकर निशाना साधा है.

इसके अलावा डीएमके ने जयललिता पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये परियोजनाओं का शुभारंभ किए जाने को लेकर भी निशाना साधा है. सोशल मीडिया पर दोनों दलों के बीच जंग छिड़ी हुई और दोनों दलों के समर्थक एक दूसरे पर जबरदस्त निशाना साध रहे हैं.

डीएमके को जहां सत्ता विरोधी रुझान पर भरोसा है वहीं एआईडीएमके जयललिता की सजा को लेकर लोगों के बीच सहानुभूति पाने की कोशिश कर रही है.

तमिलनाडु में फिलहाल दोनों दलों के बीच मुद्दों को लेकर घमासान जारी है. हालांकि मौजूदा स्थितियों में जयललिता की स्थिति डीएमके गठबंधन पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है. 

कांग्रेस के नेता भी जयललिता को हराने को लेकर ज्यादा भरोसे में नजर नहीं आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर पार्टी विधानसभा चुनाव में बेहतर कर पाती है तो वह अगले आम चुनाव में ज्यादा मजबूत नजर आएगी. 

कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा, 'हमारी नजर केवल तात्कालिक फायदे पर नहीं है. हम बड़ी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं.' 

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First published: 4 March 2016, 22:43 IST
 
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