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एक बीफ खाने वाला व्यक्ति भी स्वंयसेवक हो सकता है: आरएसएस

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST

अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के करीब तीन हजार कार्यकर्ता है. इनमें ज्यादातर बीफ का सेवन करते हैं. यह बात खुद आरएसएस प्रतिनिधि ने अरुणाचल में मीडिया के सामने आठ दिसंबर को स्वीकार किया है.

राष्ट्रीय स्तर पर आरएसएस की छवि बीफ विरोधी संस्था की है. अरुणाचल में संगठन इस छवि से मुक्ति पाने के प्रयास में है. टेलिग्राफ में छपी एक खबर के अऩुसार आरएएसएस के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा है कि एक बीफ खाने वाला व्यक्ति भी संघ का स्वंयसेवक हो सकता है.

वैद्य ने ये बातें अपने तीन दिनों के अरुणाचल दौरे के दौरान कही. साथ ही उन्होंने कहा कि हम भारत को नंबर वन देश बनाना चाहते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों के मन में संघ को लेकर कुछ गलत अवधारणाएं हैं, मसलन यह कोई धार्मिक संगठन है. उन्होंने साफ किया कि संघ एक सामाजिक संगठन है.

इससे पहले संघ के एक स्थानीय पदाधिकारी सुनील मोहंती ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "आज की तारीख में संघ के बारे में सबसे ज्यादा गलतफहमियां लोगों के मन में हैं." अरुणाचल में संघ की 27 शाखाएं रोज लगती हैं.

इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने मामला बीफ और असहिष्णुता की तरफ मोड़ दिया. तब वैद्य ने कहा- खान-पान की आदतों से संघ का कोई लेना-देना नहीं हैै. यह भी सच है कि बीफ खाने की परंपरा देश के हर हिस्से में स्वीकार्य नहीं हैं. लेकिन अरुणाचल जैसे प्रदेशों में लोग जमाने से बीफ खाते आए हैं.

इसी के साथ उन्होंने साफ किया कि संघ किसी भी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं है. संघ केवल राष्ट्रविरोधी ताकतों की मुखालफत करता है. उनके मुताबिक संघ परिवार लोगों के खान-पान को निर्देशित या नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करता है.

First published: 11 December 2015, 10:58 IST
 
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