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जिस राज्यसभा में जाने की होड़ लगी है उसे इनकार करने वाले प्रणब पांड्या कौन हैं?

राजू गुसाईं | Updated on: 6 May 2016, 23:09 IST

गायत्री परिवार के मुखिया डॉक्टर प्रणब पांड्या द्वारा राज्यसभा की सदस्यता लेने से इंकार करने के फैसले ने कईयों को हैरानी में डाल दिया है. पांड्या दावा करते हैं कि उन्होंने अपने अंतरात्मा की आवाज पर राज्यसभा ना जाने का फैसला किया है. साथ ही, गायत्री परिवार के अनुयायी भी उनके राजनीति में जाने के खिलाफ थे.

बीजेपी के शीर्ष नेताओं के अलावा अन्य पार्टियों में भी 66 वर्षीय पांड्या के काफी अनुनायी हैं. कई लोगों का मानना है कि सभी राजनीतिक पार्टियों से मधुर संबंध होने के चलते और उसे बनाए रखने के लिए पांड्या ने राज्यसभा में जाने से इंकार कर दिया.

1950 में उनका जन्म मुंबई में हुआ था. उन्होंने एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर से एमडी (मेडिसिन) की पढ़ाई की है. पांड्या ने 1975 में यूएस मेडिकल सर्विसेज के लिए क्वालीफाई किया था लेकिन गुरु पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के कहने पर उन्होंने भारत में रहने का फैसला किया. श्रीराम शर्मा गायत्री परिवार के संस्थापक थे.

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पांड्या ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (भेल) से अपने करियर की शुरुआत की. वह भोपाल में भेल के अस्पताल में काम करने लगे. भेल में काम करने के कुछ सालों के बाद उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में काम करने का फैसला किया. पांड्या  ने 1978 में गायत्री परिवार के ब्रह्मवर्चस रिसर्च सेंटर से जुड़कर अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की. धीरे-धीरे वह हरिद्वार स्थित गायत्री मिशन के मुख्यालय शांतिकुंज आश्रम का प्रमुख चेहरा बन गए.

पढ़ें: प्रणव पांड्या का राज्यसभा की सदस्यता से इनकार

पांड्या को वैज्ञानिक आध्यात्मिकता के विशेषज्ञ के तौर पर जाना जाता है. उनके नेतृत्व में शांतिकुंज ने आयुर्वेद, मनोविज्ञान, ध्यान के लाभ और प्राणायाम पर गहराई से रिसर्च किया है. डॉक्टर पांड्या 1996 में शांतिकुंज के प्रमुख बने. उनके कार्यभार संभालने के बाद अब तक 80 देशों में गायत्री परिवार की शाखाएं खुल चुकी हैं.

गायत्री परिवार के मुखिया ने दुनिया भर के युवाओं से साधना, उपासना और आराधना की राह पर चलने की अपील की है. पंड्या कैम्ब्रिज, हावर्ड, ऑक्सफोर्ड, यूनीवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया जैसे विश्वविद्यालयों में व्याख्यान दे चुके हैं. इसके अलावा फरवरी, 1992 में वह लंदन में हाउस ऑफ कामंस को संबोधित कर चुके हैं.

डॉक्टर प्रणव पांड्या गायत्री परिवार के प्रमुख होने के साथ ही हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं. साथ ही वे गायत्री परिवार की पत्रिका अखंड ज्योति के संपादक भी हैं.

राज्यसभा की सीट छोड़ने के बाद शुक्रवार को पांड्या ने बयान दिया कि आज राजनीति का स्तर इतना गिर गया है कि उसके बारे में वे कुछ भी नहीं कहना चाहते. वहीं पांड्या ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके 30 साल के मित्रतापूर्ण संबंध हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि आज की परिस्थितियां ऐसी नहीं है कि राज्यसभा में जाकर बैठा जाए.

पांड्या ने कहा, "मैं यह बात मानता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे अंदर कुछ योग्यता देखी होगी, इसलिए उन्होंने मुझे लाने का फैसला लिया. लेकिन मैं अपना नाम वापस लेने के लिए उनसे क्षमा चाहता हूं."

First published: 6 May 2016, 23:09 IST
 
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