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कंपनी के पैसे पर डॉक्टर कर रहे विदेश में ऐश, प्रधानमंत्री हुए सख्त

शिरीष खरे | Updated on: 11 July 2016, 10:10 IST

मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया की रोक के बावजूद दवा कंपनियों के पैसों पर विदेशी यात्रा का मजा लूटने वाले मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 30 डॉक्टर मुश्किल में घिर गए हैं. प्रकरण सामने आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इन डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

दूसरी तरफ मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया ने इन डॉक्टरों को नोटिस देकर उनसे संपत्ति, बैंक खातों और विदेशी यात्राओं का हिसाब-किताब मांगा है. यदि दवा कंपनियों के पैसों पर सैर करने का मामला साबित होता है तो डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन निलंबित हो सकता है.

बीते दिनों मध्य-प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी इस मामले में विभागीय अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जो उपलब्ध भी करा दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों की जांच के लिए जल्द ही उच्चाधिकार कमेटी बनाई जाएगी.

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इस प्रकरण के सामने आने के बाद चिकित्सा-शिक्षा विभाग इन डॉक्टरों के अलावा प्रदेश भर के सभी सरकारी और निजी डॉक्टरों से ब्यौरा मांगने की तैयारी कर रहा है. इसके पहले कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी छह मई को प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री शरद जैन को पत्र लिख चुके हैं.

दवा कंपनियों के पैसों पर विदेशी यात्रा करने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसने से पूरे चिकित्सा क्षेत्र में हड़कंप

इस पूरे मामले में मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया, भोपाल के रजिस्ट्रार सुबोध मिश्रा का कहना है, "दवा कंपनियों से लाभ लेकर विदेश यात्रा करने वालों में सबसे ज्यादा इंदौर शहर के डॉक्टर हैं. शिकायतों के बाद इनकी जांच होगी और नियमों के अनुसार जल्द कार्रवाई की जाएगी."

वहीं, छत्तीसगढ़ की मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया ने कंपनियों के पैसे पर इटली की सैर करने वाले दो डॉक्टरों पर आयकर रिटर्न और विदेशी यात्रा से संबंधित सारे दस्तावेज पांच महीने पहले एक सप्ताह के भीतर मांगे थे, जो आज तक उपलब्घ नहीं कराए गए हैं. शिकायतों में जो दस्तावेज प्राप्त हुए हैं उनके मुताबिक यहां के डॉक्टरों को लंदन की सैर कराने के लिए कंपनियों ने एक डॉक्टर पर औसतन दो लाख रुपए तक खर्च किए.

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मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया, रायपुर के रजिस्ट्रार डॉ. श्रीकांत राजिमवाले ने बताया, "दवा कंपनियों के पैसों पर सभी डॉक्टरों की विदेश यात्रा और उपहार लेना प्रतिबंधित हैं. इस मामले में जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों द्वारा ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है."

मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया के नियमों के मुताबिक निजी या सरकारी डॉक्टर या उनके परिवार का सदस्य किसी दवा कंपनी या स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधि से रेल, वायु या जलयान की यात्रा के टिकटों या भुगतान का पैसा नहीं लेगा. इसके अलावा उनके सहयोग से डॉक्टर देश, विदेश की यात्रा का धन प्राप्त नहीं करेगा. दवा कंपनियों और स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों को किसी भी प्रकार से डॉक्टरों को उपकृत करने पर रोक है.

ऐसे में दवा कंपनियों के पैसों पर विदेशी यात्रा करने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसने से पूरे चिकित्सा क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है. प्रधानमंत्री कार्यालय के पत्र के बाद दोनों राज्यों का स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर गंभीर नजर आ रहा है और आने वाले 15 दिनों के भीतर ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ ठोस दस्तावेज एकत्रित करने की तैयारी चल रही है. 

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डॉक्टरों का विदेशों में इस तरह से यात्राएं करना कोई नहीं बात नहीं है, लेकिन इस प्रकरण में जिस तरह से उच्च स्तरीय नेतृत्व ने गंभीरता दिखाई है उसके बाद यदि प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई होती है तो देशभर के डॉक्टरों को संदेश जाएगा और फिर डॉक्टरों का कंपनियों के बूते विदेशों में सैर-सपाटा करना भी मुश्किल होगा.

First published: 11 July 2016, 10:10 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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