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सपा में व्यभिचारी और हज़ारों करोड़ के भ्रष्ट कौन हैं?

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 23 October 2016, 11:35 IST
QUICK PILL
  • समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल की एक चिट्ठी ने पार्टी में तूफ़ान खड़ा कर दिया है. 
  • डेढ़ महीने से चल रहे सत्ता संघर्ष में लड़ाई अब लगभग अंतिम नतीजे पर पहुंच गई है. 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने 23 अक्टूबर की सुबह 6 बजे मुंबई से एक चिट्ठी जारी की है. यह चिट्ठी 12 सितंबर से देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में शुरू हुए टकराव में अंतिम दौर के संघर्ष का ऐलान करती है. 

रामगोपाल की यह चिट्ठी पार्टी विधायकों में बांट दी गई है और 5 कालीदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर विधानसभा सदस्यों का पहुंचना शुरू हो गया है. 

सपा में डेढ़ महीने से जारी सत्ता संघर्ष को किसी नतीजे पर पहुंचाने के लिए सीएम अखिलेश अपने विधायकों के साथ जंग का आगाज़ कर सकते हैं. हो सकता है कि कोई बड़ा फ़ैसला लेने के इरादे से यहां मुख्यमंत्री अपने इस्तीफ़े की पेशकश भी कर दें. 

वहीं दूसरी तरफ़ पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इन्हीं विधायकों के साथ कल यानी कि 24 अक्टूबर को पार्टी दफ़्तर में बैठक का ऐलान किया है. विधायकों का विश्वास हासिल करने के लिए मुलायम उनसे भावुक अपील भी कर सकते हैं. 

दरअसल विधायकों के साथ पिता-पुत्र अलग-अलग बैठक करके यह संदेश देना चाहते हैं कि विधायक उनके साथ हैं.

दिलचस्प यह है कि विधायकों की बैठक का ऐलान मुलायम ने पहले किया था लेकिन अखिलेश ने राइटिंग ऑन द वॉल पढ़ते हुए एक दिन पहले ही अलग बैठक बुला ली है. 

किसके साथ कौन जाएगा?

अब इन दो अलग-अलग बैठकों में तीन तस्वीर उभरकर आएगी. 

पहली यह कि ज़्यादातर विधायक दोनों बैठकों में शामिल होंगे. दूसरी यह कि एक-दूसरे के कट्टर समर्थक हैं जो सिर्फ अपने-अपने गुटों की बैठक में शामिल होंगे. तीसरी तस्वीर यह है कि कुछ विधायक इन दोनों पिता-पुत्र को नाकारा मानते हुए कहीं किनारे खड़े होकर तमाशा देखेंगे. 

हालांकि अखिलेश ने आज की बैठक के लिए शिवपाल गुट के बेहद क़रीबी माने जाने वाले 16 एमएलए और सात एमएलसी को अपनी बैठक में शामिल होने का न्यौता नहीं भेजा है. 

बताया जाता है कि इनमें से कुछ विधायक आज की बैठक में शामिल होने के लिए उतावले हैं और लगातार जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट भवन जोकि सत्ता का नया केंद्र बन गया है, वहां पर फ़ोन करके अखिलेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता रहे हैं. वहीं शिवपाल भी आज सुबह 10 बजे 19 विक्रमादित्य मार्ग स्थित पार्टी कार्यालय पहुंच गए हैं. 

व्याभिचारी और भ्रष्ट कौन

वापस रामगोपाल की चिट्ठी आते हैं. इस चिट्ठी के राजनीतिक मायने अपनी जगह हैं. मगर प्रोफेसर साहब ने जाने-अनजाने में अखिलेश यादव की अगुवाई में साढ़े चार साल तक चली सपा सरकार के भीतर क्या-क्या होता रहा है, यह भी बता दिया है. 

जैसा कि रामगोपाल ने विरोधी गुट पर इशारा करते हुए लिखा है, 'उधर वे लोग हैं जिन्होंने हज़ारों करोड़ रुपया कमाया, व्याभिचार किया और सत्ता का दुरुपयोग किया'. यानी कि मौजूदा सपा सरकार में व्याभिचारी, हज़ारों करोड़ कमाने वाले भ्रष्ट और सत्ता का बेजा इस्तेमाल करने वाले नेता मौजूद हैं.

हालांकि इसी तरह का आरोप एटा से सपा विधायक आशीष यादव चिट्ठी लिखकर रामगोपाल यादव गुट पर भी लगा चुके हैं. आशीष ने लिखा था, 'रामगोपाल के गुर्गे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ज़मीन कब्ज़ाने में लगे हैं'.

सुलह-समझौता करवाने वालों से भी दूर रहने की सलाह

चिट्ठी में रामगोपाल ने समाजवादी कुनबे में बिखराव थामने की कोशिश करने वाले दिग्गज नेताओं को भी नहीं बख़्शा है. उन्होंने लिखा है, 'जनता को भ्रमित करने के लिए कुछ लोग मध्यस्थता करतें हैं, बयानबाज़ी करते हैं. बहकावे में आने की ज़रूरत नहीं है'. यह मध्यस्थ पार्टी के संस्थापक सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा, वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा और दलबदलू नरेश अग्रवाल हो सकते हैं. और उन्होंने साफ़ किया है कि उनके गुट को इनके भी चक्कर में पड़ने की ज़रूरत नहीं है. 


उन्होंने अखिलेश की रथयात्रा पर लिखा है, 'रथयात्रा विरोधियों के गले की फांस है. इस फांस को और शार्प करना है'. यह रथयात्रा 3 नवंबर को राजधानी लखनऊ से शुरू होकर पूरे सूबे में जाएगी. 


इसके ठीक बाद 5 नवंबर को लखनऊ में समाजवादी पार्टी का रजत जयंती स्थापना समारोह का आयोजन होना है. मुलायम सिंह यादव ने इसकी घोषणा पहले ही कर दी थी. मगर इस आयोजन में शामिल होने से बचने के लिए अखिलेश दो दिन पहले ही रथयात्रा लेकर लखनऊ से बाहर निकल जाएंगे. 


अपनी चिट्ठी में रामगोपाल ने इसी टकराव को और शार्प करने की ज़रूरत बताई है. 


आख़िर में रामगोपाल ने अपने गुट को भरोसा दिलाते हुए लिखा है कि विरोधियों से ना डरें और ना ही विचलित हों, क्योंकि जहां अखिलेश वहां विजय. 


साथ में फ़ैसल फ़रीद 

First published: 23 October 2016, 11:35 IST
 
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