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कॉल ड्रॉप: सरकार और कंपनियों की धींगामुश्ती में पिसता ग्राहक

नीरज ठाकुर | Updated on: 14 December 2015, 17:27 IST
QUICK PILL
  • बढ़ते कॉल ड्रॉप का मामला अब अदालत में  है. टेलीकॉम कंपनियां सरकार की नई जुर्माना नीति के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट चली गई हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी.
  • सरकार ने टेलीकॉम\r\nरेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया\r\n(ट्राई)\r\nको कॉल ड्रॉप होने पर जुर्माना\r\nलगाने का निर्देश दिया है. एक जनवरी\r\nसे टेलीकॉम कंपनियों को हर\r\nकॉल ड्रॉप पर एक रुपए का हर्जाना\r\nदेना होगा.

वर्षा सहाय पटना में रहती है. करियर के लिहाज से उनके लिए यह समय बहुत ही महत्वपूर्ण है. बेंगलुरू स्थित मैनेजमेंट कॉलेज का मानव संसाधन विभाग 22 साल की वर्षा का टेलिफोनिक इंटरव्यू ले रहा था अचाकल फोन कट गया. यह उनके लिए यह बहुत ही निराशाजनक रहा और इंटरव्यू तीन प्रयासों के बाद पूरा किया जा सका. इस घटना के चलते वर्षा इंटरव्यू के दौरान ही निराश हो गईं थी.

ऐसी ही शिकायत मुंबई में काम करने वाले सोमदत्त मुखर्जी की है. युवाओं को सलाह देने वाली संस्था में मार्केटिंग प्रोफेशनल के तौर पर काम करने वाले मुखर्जी का इंटरव्यू एक कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट फोन पर ले रहे थे. बांद्रा फ्लाई ओवर के पास अचानक कॉल ड्रॉप हो गया. मुखर्जी के पास फिर दोबारा कॉल पांच मिनट बाद आया, हालांकि वह नौकरी पाने में भाग्यशाली रहे. लेकिन इस घटना से वह काफी गुस्से में थे.

दिल्ली में अनुपम कुमार को घटिया टेलीकॉम नेटवर्क के कारण दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया. वह एक व्यापार संगठन में वित्त विभाग के मुखिया है.

भारत में कॉल ड्रॉप की समस्या गंभीर बन गई है. लगभग हर मोबाइल यूजर इसके चलते परेशान है

इस समस्या से निजात पाने के लिए पिछले साल ही करोड़ों लोगों ने अपने मोबाइल फोन सर्विस प्रोवाइडर को बदला है.

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है. टेलीकॉम कंपनियों को कई चेतावनी देने के बाद के बाद उन्होंने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) को जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है.

ट्राई के नए कानून के अनुसार एक जनवरी से टेलीकॉम कंपनियों को हर कॉल ड्रॉप पर एक रुपए का हर्जाना देना होगा. इसके तहत कंपनियां एक दिन में अधिकतम तीन कॉल ड्रॉप के लिए हर्जाना देंगी. पोस्टपेड ग्राहक को उनके बिल में मुआवजा दिया जाएगा. इसके अलावा सर्विस प्रोवाइडर्स को चार घंटे के अंदर मैसेज से उपभोक्ताओं को कॉल ड्रॉप का विवरण भेजना होगा.

अगर इसके बाद भी स्थितियां नहीं बदली तो ट्राइ छह महीने के बाद इस नीति की दोबारा समीक्षा करेगा

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) और यूनिफाइड सर्विस प्रोवाइडर्स इन इंडिया (एयूएसपीआई) ने ट्राई के नए नीति के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील किया है. सीओएआई ट्राई की मुआवजा नीति के खिलाफ स्टे चाहती है. उसने तर्क दिया है कि हर्जाने का प्रावधान कंपनियों के लिए सही नहीं है. दि‍ल्‍ली हाईकोर्ट ने इस मसले पर ट्राई से 22 दिसंबर तक जवाब मांगा है.

टेलीकॉम कंपनियां कॉल ड्रॉप की समस्या के लिए सरकार को जिम्मेदार मानती है. सीओएआई का कहना है कि सरकार ने कंपनियों को ज्यादा स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं कराया है. इस कारण ही लोगों को मोबाइल सिंग्नल मिलने में दिक्कत हो रही है.

सीओएआई के अनुसार भारत में ऑपरेटर्स के लिए 12-15 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध है जबकि अंतरराष्ट्रीय औसत 45-50 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम है.

सरकार का तर्क

दूरसंचार मंत्रालय का कहना है कि देश में स्पेक्ट्रम की कमी नहीं है. सरकार ने पिछले साल ही टेलीकॉम कंपनियों को 470 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया है. इसके बावजूद कंपनियों की सर्विस में कोई सुधार नहीं दिख रहा है.

सरकार के अनुसार टेलीकॉम कंपनी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में खर्च नहीं कर रही है. इस क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि 2015 में भारत में 97 करोड़ लोग मोबाइल यूजर्स हो गए हैं जबकि 2010 में 57.4 करोड़ लोग मोबाइल यूज कर रहे थे. ग्राहकों की संख्या में 66 फीसदी बढ़ गई जबकि इसके अनुपात में मोबाइल टॉवरों की संख्या नहीं बढ़ी. पिछले साल में सिर्फ टॉवरों की संख्या में सिर्फ 33 फीसदी इजाफा हुआ.

पिछले तीन-चार सालों में स्वास्थ्य का मसला उठाते हुए कई एक्टिविस्टों ने आवासीय क्षेत्रों में मोबाइल टॉवर लगाने का विरोध किया है

पिछले तीन साल में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चलते दिल्ली के 186 मोबाइल साइट पर टॉवर नहीं लग पाए और मुंबई मेें इनकी संख्या 120 थी.

पैसे की कमी

सीओएआई के सालाना रिपोर्ट 2014-15 के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों का कर्ज बढ़ता जा रहा है. 2018 तक उन पर 58,900 करोड़ रुपए का कर्ज हो जाएगा जो पिछले पांच की तुलना में दोगुना है.

भारत में टेलीकॉम ऑपरेटर्स को प्रति उपभोक्ता औसत आय (एआरपीयू) तीन डॉलर है जो एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में सबसे कम है. चीन में यह 9.1 डॉलर, मलेशिया में 14.7 डॉलर, ऑस्ट्रेलिया में 41.2 डॉलर और जापान में 41.5 डॉलर है.

ट्राई की जुर्माना नीति लागू होने के बाद से कंपनियों के राजस्व में और नुकसान होने की संभानवना है

टेलीकॉम एक्सपर्ट महेश उप्पल का कहना है, '' इस बात से इंकार नहीं है कि घटिया सर्विस के लिए ऑपरेटर्स को भी जिम्मेदारी उठाने जरूरत है. लेकिन ट्राई की नीति या दृष्टिकोण वास्तविकता से परे और पूरी दुनिया में अनोखा है.'

उप्पल के अनुसार, ''ट्राई गुणवत्ता युक्त कॉल के लिए टेलीकॉम बाजार बनाने में असफल रहा है. अगर ऐसा हुआ होता तो कंपनियां सुधार के लिए बाध्य होती अन्यथा उन्हें इस क्षेत्र से बाहर जाना पड़ता.''

विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) के पूर्व चेयरमैन बीके सिंघल के अनुसार कॉल ड्रॉप की समस्या स्पेक्ट्रम के कमी के चलते नहीं है. यह समस्या मोबाइल सिंग्नल भेजने वाले सिस्टम बेस ट्रांससीवर स्टेशन (बीटीएस) की वजह से है.

उन्होंने कहा, ''जुर्माना लगाना इस उद्योग से दुश्मनी मोल लेना होगा. अब सरकार और ऑपरेटर्स दोनों कहेंगे कि मामला अदालत में है इसलिए कुछ किया ही नहीं जा सकता. इसके बजाय सरकार को टेलीकॉम ऑपरेटर्स को खराब बीटीएस की सूची सौंप सकती है.''

दूसरी तरफ उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े संगठन सरकार के निर्णय से बेहद खुश हैं. उनके अनुसार प्रोवाइडर्स को नियंत्रित करने के लिए एकमात्र यही रास्ता है.

बिहार स्थित उपभोक्ता अधिकारों के लड़ने वाले 'संरक्षण' ग्रुप के मैनेजिंग ट्रस्टी जेके भगत कहते हैं, ''हमलोग लंबे समय से जुर्माने की मांग कर रहे हैं. टेलीकॉम ऑपरेटर्स सिर्फ मुनाफा कमाने चाहते हैं. इसकी वजह से वे इंफ्रास्ट्रक्चर पर पैसा नहीं लगा रहे हैं. अब सरकार ने जुर्माना की घोषणा की है तो वे अपनी सेवाओं में सुधार करेंगे.''

First published: 14 December 2015, 17:27 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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