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गुरमेहर विवाद: पंजाब के सिख बोले, आरएसएस हमें देशभक्ति का पाठ ना पढ़ाए

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 March 2017, 21:26 IST

दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुरमेहर कौर पर की गई अशोभनीय टिप्पणियों से अब भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थकों को लगने लगा है कि यह पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है. गुरमेहर मामले में सिख समुदाय के अनेक संगठनों और व्यक्तिगत रूप से भी लोगों में गुस्सा भड़का है. विभिन्न जगहों से गुरमेहर के समर्थन में सिख नेताओं द्वारा हस्ताक्षर अभियान से लेकर सार्वजनिक रूप से बयान भी जारी किए गए हैं.

यह मामला सिर्फ गुरमेहर को गैंगरेप की प्रत्यक्ष धमकी देने भर का ही नहीं है जिससे गुस्सा भड़का है. एक तथ्य यह भी है कि उसकी देशभक्ति भी इस तथ्य के बावजूद सवालों के घेरे में खड़ी की जा रही है कि उसके पिता कैप्टन मनदीप सिंह को 1999 में आतंककवादियों के साथ संघर्ष में अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा था.

अकालतख्त के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह के अनुसार यह मामला केवल किसी व्यक्ति या परिवार का नहीं है. यह पूरे समुदाय का मामला है. यह हमारे गुरु के संदेशों को लेकर है. जो कुछ इस लड़की (गुरमेहर) ने कहा है वह हमारे गुरु के दर्शन (शांति और सहिष्णुता) पर आधारित है.

विशेषकर संघ परिवार पर हमला बोलते हुए भाई रणजीत सिंह ने कहा कि मैं इस कम्युनल परिवार को अच्छी तरह जानता हूं. हमारी पूरी बिरादरी उनसे वाकिफ है. क्या वे बहादुर हैं. हमारे देश की खातिर उन्हें लड़ने के लिए पाकिस्तान चले जाना चाहिए. लेकिन वे ऐेसा नहीं कर सकते. केवल सिख ही यह जोखिम उठा सकते हैं. चाहे वे कश्मीर सिंह हों या दलबीर सिंह या सरबजीत सिंह. देश की खातिर सिखों ने अपने बलिदान किए हैं या अपने बहुमूल्य जीवन के कई साल जेलों में काटे हैं. संघ परिवार फर्जी देशभक्ति का बातें करता रहता है. हमें (सिखों को) उनसे देशभक्ति का पाठ पढ़ने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने यह भी कहा कि यदि गुरमेहर कौर को किसी तरह का कोई नुकसान पहुंचता है तो हम भाजपा और आरएसएस को जवाबदेह ठहराएंगे.

सिग्नेचर कैंपेन

इस बीच जाट सिख परिषद ने गुरमेहर के समर्थन में उसके अपने शहर जालंधर में हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है. यह हस्ताक्षर सफेद कपड़े पर करवाए जा रहे हैं जो गुरमेहर के शांति के संदेश का प्रतीक है. परिषद के गवर्निंग सेक्रेटरी सुखविन्दर सिंह लाली ने दि ट्रिब्यून अखबार से बातचीत करते हुए कहा है कि भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता तुच्छ राजनीति करने में लिप्त हैं और उन्हें सलाखों के पीछे रखा जाना चाहिए.

उन्होंने अखबार से बातचीत में यह भी कहा कि हम इस युवा लड़की के जज्बे को सलाम करते हैं. हालांकि सत्ता के भूखे राजनीतिकों ने उसके खिलाफ बयान देने शुरू कर दिए जो निन्दनीय हैं. भाजपा को उन सभी लोगों को दंडित करना चाहिए जो एक ऐसी लड़की को धमकी दे रहे हैं और बयानबाजी कर रहे हैं जिसके पिता देश के लिए शहीद हो गए थे.

कई अन्य संगठन जैसे दल खालसा, सिख यूथ फैडरेशन, दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेवन्ट कमेटी, स्त्री जागृति मंच पंजाब और सिख सेवक सोसाइटी इंटरनेशनल गुरमेहर के पक्ष में आ खड़े हुए हैं.

दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेवन्ट कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने कहा कि जो अपनी ही बहन और पुत्री को धमकी दे रहे हैं, वे राष्ट्रभक्त नहीं हो सकते. दल खालसा ने कहा कि एबीवीपी के हाथ में सत्ता तभी से आ गई है जब से भाजपा ने केन्द्र में अपनी सरकार बनाई है.

एक बड़ा कारण, सिख समुदाय विशेषकर पंजाब और चंडीगढ़ के बाहर के संगठन इसलिए नाराज हैं कि गुरमेहर के खिलाफ अभियान चलाने में 'हरियाणा लॉबी' सबसे आगे है. कई सिखों का कहना है कि यह इत्तिफाक नहीं है कि इस लड़की पर हमले करने वालों में से कई लोग हरियाणा के मंत्री अनिल विज से लेकर क्रिकेटर वीरन्द्र सहवाग, कुश्तीबाज फोगाट और योगेश्वर दत्त के साथ ही अभिनेता रणदीप हुड्डा सभी हरियाणा के हैं.

गुरमेहर को जो व्यापक समर्थन मिला, उसके चलते अकाली नेताओं जैसे अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह के साथ ही एसजीपीसी अध्यक्ष डॉ. कृपाल सिंह को गुरमेहर के समर्थन में उतरना पड़ा.

आरोप

अनेक आम सिख दक्षिणपंथियों के इस आक्षेप से आहत हैं कि गुरमेहर खालिस्तान समर्थक है. एक ट्वीट में लिखा गया है कि अजीब बात है कि मुस्लिम जो भाजपा, आरएसएस पर सवाल करते हैं , वे पाकिस्तानी कहलाते हैं और सिख जो ऐसा ही करते हैं, उन्हें खालिस्तानी कहा जाता है.

एक दक्षिणपंथी डॉ. गौरव प्रधान, जो ट्वीटर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गुणगान करते रहते हैं, ने एक विचित्र थ्योरीपेश की है. उनके अनुसार गुरमेहर एक षडयंत्र के तहत पाकिस्तान के खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर काम कर रही थी और इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी शामिल हैं.

ऐसे ही अन्य कई दुखद आरोप हैं. ये आरोप दक्षिण पंथी वेबसाइट स्वराज्य पढ़ने वालों के माध्यम से आए हैं. ऐसे ही भाजपा के कट्टर समर्थक एक पत्रकार कंचन गुप्ता हैं जिन्होंने गुरमेहर की तुलना भारतीय सेना के मेजर जनरल शाबेग सिंह से कर दी जो जरनैल सिंह भिंडरवाले के साथ आ गए थे.

इसी प्रसंग में ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि गुरमेहर को सेवारत और पूर्व सैनिकों का व्यापक समर्थन मिला है. पंजाब स्टेट एक्स-सर्विसमेन वेलफेयर एसोसिएशन (सेवा) भी खुलकर गुरमेहर के समर्थन में आ गई है. एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल (रि) कुलदीप सिंह ग्रेवाल ने गुरमेहर की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है जब तक कि मामला सार्थक नतीजे पर नहीं पहुंच जाता.

एसोसिएशन के एक सदस्य कर्नल (रि) तेजिन्दर सिंह बाजवा ने कहा कि जब एक पुत्री को रेप की धमकी दी जा रही हो, कोई भी चुप नहीं रह सकता. देश के लोगों को एक शहीद की पुत्री को संरक्षण देने के लिए अपनी आवाज को बुलन्द करना चाहिए.

कट्टरपंथी संगठनों से समर्थन

अनेक उग्र सुधारवादी संगठन भी गुरमेहर के समर्थन में कूद पड़े हैं. शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता सिमरनजीत सिंह मान ने भी छात्रा के साथ हमदर्दी जताई है और अपने कई ट्वीट्स के जरिए हिन्दुत्व ब्रिगेड पर हमला बोला है. अकाल तख्त के जत्थेदार पद के दावेदार जगतार सिंह हवारा (2015 के सरबत खालसा के अनुसार) ने भी गुरमेहर पर हमले के लिए भाजपा और उसके समर्थकों की कटु आलोचना की है.

सिख24.कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार हवारा ने कहा है कि भाजपा हमेशा ही चुनाव के दौरान वोटों के ध्रुवीकरण के लिए सस्ती साम्प्रदायिक राजनीति का खेल खेलती है और अब यह देश के साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए बड़ा खतरा बन गई है. भाजपा के सीधे निशाने पर हमेशा ही अल्पसंख्यक- सिख, मुस्लिम और इसाई रहे हैं.

छात्रा के सिख होने के नाते सैनिकों के साथ ही राजनीतिक संगठन, सिख समुदाय के लोग बड़ी ही मजबूती से गुरमेहर के समर्थन और भाजपा के खिलाफ आ खड़े हुए हैं. अनेक कारणों के चलते सिख समुदाय के पंथों में भी भाजपा के प्रति नाराजगी का भाव है. पार्टी डेरा सच्चा सौदा को अपना संरक्षण देती है जिससे उसकी अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ आम स्वीकार्यता का भाव बढ़ा है. इस बीच गुरु ग्रंथ साहिब के साथ बेअदबी की कई घटनाएं घट गईं.

20 वर्षीया एक सिख लड़की, वह भी एक शहीद की पुत्री के साथ हुई यह घटना आत्मगौरव वाले समुदाय को भयंकर रूप से आक्रोशित कर सकती है. वैसे गुरमेहर मामले में खलबली तो मची हुई ही है.

First published: 6 March 2017, 8:28 IST
 
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