Home » इंडिया » Catch Hindi: dr mahesh chandra guru has caught into hindutva forces' fire
 

प्रोफेसर एमसी गुरु: हिंदुत्व का चैंपियन बनने में लगी कर्नाटक सरकार

रामकृष्ण उपध्या | Updated on: 23 June 2016, 13:15 IST

डॉ महेश चंद्र गुरु यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर में मीडिया स्टडीज के प्रोफेसर हैं. उन्हें पिछले शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया. गुरु को कथित तौर पर भगवान राम का अपमान करने के लिए गिरफ्तार किया गया है. 

बेंगलुरु और मैसूर में उनकी गिरफ्तारी चर्चा का विषय बन गई है. 59 वर्षीय गुरु मीडिया स्टडीज से जुड़े हुए देश के चुनिंदा दलित प्रोफेसरों में एक हैं. वो पिछले तीन दशकों से अकादमिक जगत से जुड़े हुए हैं. 

प्रोफेसर गुरु मुखर आंबेडकरवादी हैं. वो 'ब्राह्मणवादी ताकतों' का आलोचना का कोई मौका नहीं छोड़ते. उनके अनुसार इन ताकतों का ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्शों पर प्रभुत्व है.

आंबेडकर के निधन के 59 साल बाद आरएसएस उन्‍हें कैसे बदल सकता है: कांचा इलैया

तीन जनवरी, 2015 को 'मीडिया एंड ह्यूमन राइट्स' पर हुए एक वर्कशॉप में गुरु ने कहा था, "रामायण के राम ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया था. उन्होंने सीता पर दुश्चरित्रता का संदेह किया और उन्हें परेशान किया. मेरे लिहाज से ये मानवाधिकार का हनन है."

गुरु ऐसे विचार व्यक्त करने वाले पहले स्कॉलर नहीं हैं. उनसे पहले कई विद्वान रामायण की ऐसी व्याख्या कर चुके हैं. लेकिन इस वर्कशॉप गुरु के बयान के बाद तीखी बहुस हुई. उसके बाद उनके खिलाफ मैसूर के जयलक्ष्मीपुरम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. 

मामले को दोबारा खोला

उसके बाद इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं हुआ लेकिन इस साल जनवरी में गुरु ने दलित पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला की श्रद्धांजलि सभा में मामले में असंवेदनशीलता दिखाने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की आलोचना की. हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी.

जब हम अंबेडकर को याद करते हैं

विशेषकर उन्होंने स्मृति ईरानी की आलोचना करते हुए कहा कि वो 'थर्ड रेट फिल्म हिरोइन' हैं जो इस पद के योग्य नहीं हैं. इसके तुरंत बाद बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के ची ना रामु ने पुलिस में गुरु के बयान को अपमानजनक बताते हुए शिकायत दर्ज कराई. रामु ने कहा कि गुरु "छात्र समुदाय को प्रधानमंत्री और मानव संसाधन मंत्री के खिलाफ को भड़का रहे थे ताकि वो कानून को अपने हाथों में ले लें."

अब पांच महीने बाद पुलिस ने 'धार्मिक भावनाएं आहत' वाला मामला दोबारा खोल दिया.

उसके बाद जो हुआ

अदालत में दो सुनवाई में गुरु नहीं पहुंच सके. शुक्रवार को जब वो अदालत में हाजिर हुए तो उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया. 

कर्नाटक में कांग्रेस का शासन है. ऐसे में पुलिस द्वारा दिखाई गई सक्रियता पर लोग हैरानी जता रहे हैं.

आंबेडकर पुण्यतिथि: 6 दिसंबर, 6 दलित विचारक

जब राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरु की गिरफ्तारी की आलोचना तो ये सवाल उठने लगा कि क्या राज्य की व्यवस्था उन्हीं के नियंत्रण में है. या फिर उनके अंदर हिंदुत्ववादी ताकतों के लिए एक छिपी हुई सहानुभूति है.

गुरु की गिरफ्तारी पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया हुो रही है. जयंति घोष, शम्शुल इस्लाम, राम पुनियानी, आनंद स्वरूप वर्मा और राजेश जोशी ने उनकी गिरफ्तारी की आलोचना की.

मैसूर में विरोध

मैसूर राजशाही के जमाने से सत्ता के विरोध के लिए जाना जाता है. पिछले साल अक्टूबर में दशहरा पर कई विद्वानों ने चांमुंडी हिल्स पर महिषा हब्बा पर कार्यक्रम किया. इन बुद्धिजीवियों के अनुसार महिषा एक महान राजा थे, जिनके नाम पर मैसूर शहर का नाम पड़ा है. बाद में इतिहास में छेड़छाड़ करते हुए उन्हें 'असुर' बना दिया गया जिसका कथित तौर पर चामुंडी ने वध किया था.

दलितों की नहीं, आरएसएस की घर वापसी होनी चाहिए: प्रेम कुमार मणि

उस कार्यक्रम में गुरु भी शामिल थे. उन्होंने वहां कहा था, "महिषा बौद्ध बहुजन राजा थे जो महिष मंडल पर राज करते थे. वो मानवीय और प्रगतिशील मूल्यों के आधार पर शासन चलाते थे. उनका राज्य समानता और न्याय का प्रतीक था. ब्राह्मणवादी ताकतों ने उनके संग अन्याय किया और चामुंडेश्वरी द्वारा महिषासुर के मारे जाने की काल्पनिक कहानी गढ़ी."

दशहरा पर चामुंडी हिल्स पर महिषा की एक विशाल प्रतिमा लगाई गई थी. कई लोगों ने उसके संग सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया.

अकेला मामला नहीं

मैसूर के ही तर्कवादी विद्वान प्रोफेसर केएस भगवान से भी हिंदुत्ववादी नाराज हैं. भगवान ने दावा किया था कि राम एकपत्नीव्रता नहीं थे. 

बहुजन विद्यार्थी संघ के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "...वाल्मीकि रामायण में राम को कहीं भगवान नहीं बताया गया है. वो मनुष्य थे... वो एकपत्नीव्रता नहीं थे?"

केएस भगवान और कांचा इलैया पर भी हिंदुओं की भावनाएं आहत करने के लिए पुलिस में शिकायत की गई है

राज्य में कई जगहों पर भगवान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए. उनपर लोकप्रियता पाने के लिए हिंदू देवताओं पर हमला करने का आरोप लगाया गया.

घटना के कुछ ही समय बाद भगवान को राज्य साहित्यिक अकादमी पुरस्कार मिला. जिसपर विवाद हो गया. उसके बाद भगवान चौबीसों घंटे पुलिस निगरानी में रहते हैं.

कांग्रेस सांप है तो बीजेपी कोबरा: दलित कवि अकेला

दलित स्कॉलर प्रोफेसर कांचा इलैया भी हिंदू देवताओं, हिंदू धर्मग्रंथों, भारतीय लोकतंत्र और राजनीतिक दलों पर गैर-परांपरागत विचार व्यक्त करते रहते हैं.

इलैया के लेख 'क्या भगवान लोकतांत्रिक है?' के लिए उनपर हाल ही में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है.

ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि क्या विद्वानों को अपने विचार रखने के लिए भी पुलिस और अदालत के चक्कर काटने पड़ेंगे? वो भी बस इसलिए कि वो किसी खास राजनीतिक दल की पार्टीलाइन से मेल नहीं खाते.

First published: 23 June 2016, 13:15 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी