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प्रशिक्षु महिला अफसरों से आपत्तिजनक बात करने वाला डीएसपी पुलिस मुख्यालय अटैच

राजकुमार सोनी | Updated on: 27 August 2016, 7:56 IST

'हमें मत बताओ माहवारी कब और कैसे होती है. किसकी माहवारी कब आती है सब पता है. ट्रेनिंग से बचने के लिए तुम लोग झूठ बोलती हो. मेरी बीवी को भी माहवारी होती है, लेकिन उसके पेट में तो कभी दर्द नहीं होता. बकवास करती हो.'

ये कुछ ऐसे बोल हैं जिन्हें सुनकर कोई भी लज्जित हो सकता है, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण देने वाले एक अफसर नीलकंठ साहू लगातार ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे. अतत: प्रशिक्षु महिला अफसरों की शिकायत के बाद उन्हें प्रशिक्षण अकादमी से हटाकर पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया गया है.

क्यों नहीं फूला है पेट?

राजधानी से 22 किलोमीटर दूर चंदखुरी में पुलिस विभाग की प्रशिक्षण अकादमी है. फिलहाल इस अकादमी में वरिष्ठ और कनिष्ठ कुल 32 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही है. महिला अफसरों को आंतरिक एवं वाह्य प्रशिक्षण के लिए एक महिला डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक), एक महिला आरक्षक और एक डीएसपी (पुरुष) की डयूटी लगाई जाती है.

इसी महीने 23 अगस्त को राज्य महिला आयोग की टीम ने अकादमी में अचानक दस्तक दी तो चौंकाने वाली बात सामने आई. आयोग की अध्यक्ष हर्षिता पांडे के सामने प्रशिक्षु महिला अफसरों ने डीएसपी नीलकंठ साहू का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया.

आयोग की अध्यक्ष हर्षिता पांडेय कहती हैं, 'प्रशिक्षण केंद्र से किसी महिला डीएसपी ने मुझे फोन पर अवगत कराया कि अकादमी में तैनात नीलकंठ साहू द्वारा महिला प्रशिक्षुओं से लगातार अभद्रता की जा रही है. 

मामले की तह तक जाने के लिए हम वहां पहुंचे तो प्रशिक्षु अफसरों का दर्द उभरकर सामने आ गया. पूरे मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं और अफसर को अटैच कर दिया गया है.'

महिला अफसरों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान अफसर द्वारा उन्हें लगातार अपमानित किया जा रहा है. एक महिला अफसर ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि एक शादी-शुदा महिला से अफसर ने उसके गर्भवती होने पर सशंय जाहिर करते हुए कहा कि कोई गर्भवती है इसका पता तब चलता है जब पेट फूला हुआ दिखाई दें.

शरीर का कोई भी हिस्सा जमीन को छूता है तो अफसर की अभद्र टिप्पणी सामने आती है

महिला अफसरों ने बताया कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान सुबह उठना होता है. इस दौरान कई तरह के व्यायाम करने होते हैं. शरीर को चुस्त-दुरस्त रखने वाले व्यायामों से कोई दिक्कत नहीं होती जितनी दिक्कत अफसर की घूरती निगाहों से होती है. शरीर का कोई भी हिस्सा जमीन को छूता है तो अफसर की अभद्र टिप्पणी सामने आती है.

महिला अफसरों का कहना था कि उन्हें प्रशिक्षण अकादमी से दूर शहर के स्वीमिंग पूल में तैरने की ट्रेनिंग दी जाती हैं. एक बार जब वे स्वीमिंग पूल में तैर रही थी तब डीएसपी ने उनके बाल खींचकर बाहर निकाला और कहा कि सबकी गिनती करनी है. 

एक महिला अफसर ने आरोप लगाया कि प्रशिक्षण के दौरान उसकी वर्दी के राइट साइड की जेब में मिट्टी चिपक गई थी. अफसर उसे बोलकर भी समझा सकते थे लेकिन उसकी जेब में केन (लकड़ी की छोटी रूल) अशोभनीय तरीके से ठूंसी गई. जब उसने आपत्ति की तो अफसर ने सबके सामने माफी भी मांगी.

डीसीपी नीलकंठ ठाकुर से जब इन आरोपों के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था, 'मेरा कसूर सिर्फ इतना है कि मैं प्रशिक्षण के दौरान कड़ाई बरतता हूं. हम जिन्हें ट्रेनिंग दे रहे हैं उनकी पदस्थापना कहीं भी हो सकती है. यदि कोई माओवादी इलाके में तैनात हुआ तब कड़ी ट्रेनिंग ही काम आएगी. हम ट्रेनिंग के दौरान दौड़ भी लगवाते हैं. एक बार प्रशिक्षण ले रही चार महिलाएं राह चलने वाले यात्रियों से मोटर साइकिल में लिफ्ट लेकर अकादमी पहुंच गई. इसकी शिकायत हुई तो सबने एकजुट होकर मेरी शिकायत कर दी.'

बेहद शर्मनाक!

हम महिलाओं को पुरूषों के बराबर खड़ा करने की बात जरूर करते हैं लेकिन व्यवहार में अभी भी ऐसा हुआ नहीं है. महिला अफसरों ने जो कुछ बताया वह बेहद शर्मनाक है. फिलहाल अकादमी में मौजूद 32 में से 17 महिला अफसरों ने अपनी शिकायत लिखित में दी है. आयोग अपनी पड़ताल के बाद प्रतिवेदन तैयार करेगा और शासन को भेजेगा.

First published: 27 August 2016, 7:56 IST
 
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