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डीयू की किताब में भगत सिंह को 'क्रांतिकारी आतंकवादी' बताने पर विवाद

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 April 2016, 17:47 IST

दिल्ली विश्वविद्यालय की किताब में शहीद-ए-आजम भगत सिंह को 'क्रांतिकारी आतंकवादी' बताए जाने का मामला गरमा गया है. इतिहासकार के साथ ही नेता इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं.

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इसकी तीखी आलोचना की है.

लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने मामला उठाते हुए कहा कि किताब में भगत सिंह को 'क्रांतिकारी आतंकवादी' बताया गया है. अनुराग ने कहा कि आखिर देश के विश्वविद्यालयों में कौन सा इतिहास पढ़ाया जा रहा है, इस पर चर्चा होनी चाहिए.

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संसद में किताब का हवाला


अपनी बात के पक्ष में बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने मशहूर इतिहासकार विपिन चंद्र और मृदुला मुखर्जी की लिखी किताब 'भारत का स्वतंत्रता संघर्ष' का संदर्भ दिया.

अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल के दौरान देश की शिक्षा को खत्म करने और इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की है, जिसके लिए देश उसे कभी माफ नहीं करेगा.

कांग्रेस सदस्यों के कड़े प्रतिवाद के बीच ठाकुर ने कहा कि इस पुस्तक के लेखकों में से एक मृदुला मुखर्जी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है.

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कांग्रेस नेता का नाम आने पर सदन में हंगामा मच गया. बाद में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस नेता का नाम रिकॉर्ड से हटाने का भरोसा दिया, जिसके बाद हंगामा शांत हुआ.

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साथ ही ठाकुर ने कहा कि उससे भी आपत्तिजनक बात ये है कि कथित दो विचारधाराओं के नाम पर ऐसी पुस्तक दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही है.

इरफान हबीब ने भी उठाए सवाल


केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे अकादमिक हत्या बताया है. स्मृति ईरानी ने कहा, "अगर भगत सिंह को आतंकी नहीं कहने पर मुझे कोई असहिष्णु कहता है तो मैं ये तमगा लेने को तैयार हूं.'

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इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने कहा है कि अंग्रेजों ने अपने नजरिये से शहीद भगत सिंह को आतंकवादी माना है. जिसे हम भी ढोते चले आ रहे हैं. ये बदलाव बहुत पहले ही कर दिया जाना चाहिए था.

हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय की तरफ से प्रकाशित 'भारत का स्वतंत्रता संघर्ष' किताब के एक पूरे अध्याय में शहीद भगत सिंह और उनके साथियों को जगह-जगह क्रांतिकारी आतंकवादी कहा गया है.

भगत सिंह के परिजन नाराज


इस किताब का पहला संस्करण 1990 में प्रकाशित हुआ था. इस तरह के संबोधन पर भगत सिंह के परिजनों और इतिहासकारों ने भी कड़ा एतराज जताया है.

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किताब में अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख देने वाले 'चटगांव कांड' को एक 'आतंकी घटना' बताया गया है. इससे भी ज्यादा सांडर्स की हत्या को भी 'आतंकवादी घटना' बताकर पेश किया गया.

किताब के 20वें अध्याय में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सूर्य सेन (चटगांव कांड के नायक) और बाकी क्रांतिकारियों को 'क्रांतिकारी आतंकवादी' बताया गया है. 

किताब में संशोधन की लंबे समय से मांग कर रहे भगत सिंह के छोटे भाई सरदार कुलबीर सिंह के पोते यादवेंद्र सिंह ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को इस मामले में पत्र लिखा है.

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यादवेंद्र सिंह ने दिल्ली यूनीवर्सिटी के कुलपति से भी इस मुद्दे पर मुलाकात की. यादवेंद्र का कहना है कि वीसी ने कार्रवाई का भरोसा दिया है. वहीं वो जल्द ही मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से भी मिलेंगे.

First published: 27 April 2016, 17:47 IST
 
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