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कुंभ में शराबंदी के दौरान काल भैरव को चढ़ाई गई 66 लाख रुपये की शराब

अनूप दत्ता | Updated on: 25 May 2016, 13:53 IST

मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के दौरान एक महीने के लिए जिले में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन यहां के काल भैरव मंदिर में हमेशा की तरह शराब चढ़ाई जाती रही. 21 अप्रैल और 21 मई के बीच भैरव नाथ को करीब 66 लाख रुपये की शराब चढ़ाई गई.

कुंभ मेले के लिए सरकार ने कानूनी बंदिश लगाते समय काल भैरव को प्रतिबंध से मुक्त रखा था. मान्यता के अनुसार यहां के काल भैरव शराब का 'पान' करते हैं.

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मंदिर के पुजारी एक स्टील के बर्तन में शराब रखकर भैरव नाथ के होंठों में लगाते हैं जिसके बाद बर्तन से शराब खत्म हो जाती है. कई लोगों के लिए ये आज भी रहस्य का विषय है. सरकार ने ज़िले में शराबबंदी के दौरान भैरव नाथ मंदिर के बाहर शराब की दो विशेष दुकानें खुलवाईं.

सरकार ने काल भैरव मंदिर के बाहर शराब के दो काउंटर खुलवाए. एक देसी शराब के लिए दूसरी विदेशी के लिए.

आबकारी विभाग के डिप्टी कमिश्नर (आबकारी) राघवेंद्र उपाध्याय ने बताया, "सिंहस्थ कुंभ के कारण हमने दो शराब काउंटर खोले, एक देसी के लिए और दूसरा विदेशी शराब के लिए."

उपाध्याय ने बताया कि सरकार ने ये कदम भक्तों को गैर-लाइसेंसी शराब विक्रेताओं के हाथों ठगे जाने से बचाने के लिए उठाया. इन दोनों काउंटरों से शराब की 180 मिलीलीटर (क्वार्टर या पव्वा) बोतलें बेची गईं.

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ज़िले के आबकारी अधिकारियों की मानें तो इससे सरकार को काफी आय हुई. आखिरी सूचना मिलने तक 66 लाख रुपये की शराब इन दोनों काउंटरों से बेची जा चुकी थी. सिंहस्थ कुंभ मेले के आखिरी कुछ दिनों की बिक्री को इस राशि में अभी जोड़ा जाना बाक़ी है.

तांत्रिक परंपरा

काल भैरव तांत्रिकों के प्रिय देवता माने जाते हैं. एक श्मशान में स्थिति मंदिर में प्रति दिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैैं.

काल भैरव शिव (महाकाल) के अवतार माने जाते हैं. मान्यता है कि ये मंदिर राजा भद्रसेन ने बनवाया था. कुछ विद्वानों के अनुसार इस मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण के अवंती खंड में किया गया है.

शैव परंपरा में आठ भैरवों की पूजा का विधान हैं. काल भैरव इन सभी भैरवों में सर्वप्रमुख माने जाते हैं. माना जाता है कि कपालिक और अघोर संप्रदाय में इसका विशेष महत्व है. उज्जैन इन दोनों संप्रदायों का प्रमुख स्थान रहा है.

उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर के पुजारी पृथ्वीराज भारती बताते हैं कि मदिरा तंत्र के पंच मकार (मदिरा, मुद्रा, मैथून, मांस और मीन) में शामिल है. इसलिए ये भैरव नाथ को चढ़ाई जाती है.

पुजारी कहते हैं कि पुराने समय में सब कुछ चढ़ाया जाता था लेकिन अब केवल मदिरा चढ़ाई जाती है बाक़ी मकार प्रतीकात्मक तौर पर चढ़ाए जाते हैं.

First published: 25 May 2016, 13:53 IST
 
अनूप दत्ता

Anup Dutta is a journalist based out of Bhopal.

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