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आम आदमी पार्टी: हम कभी वंशवाद की राजनीति नहीं करेंगे

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

आम आदमी पार्टी एक बदलाव के लिए खड़ी हुई थी. लोगों ने जब बड़ी तादाद में उनके पक्ष में मतदान किया था तब उन्होंने कई तरह के परिवर्तन की उम्मीद की थी. पार्टी ने तब वादा किया था कि वह न तो वंशवाद की राजनीति करेगी, जिसके लिए कांग्रेस जानी जाती है और न ही वह चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक तनाव को भुनाएगी, जिसके लिए बीजेपी की आलोचना की जाती है.

लेकिन मंगलवार को आई दो रिपोर्टों ने यह सवाल उठा दिया है कि क्या आम आदमी पार्टी वंशवाद की राजनीति का सहारा न लेने के अपने वादे को भूलकर अपना रुख बदल रही है.

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अफवाहों का बाजार तब गर्म हुआ जब एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र ने खबर दी कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले राजस्व विभाग में भारतीय राजस्व सेवा के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का निर्णय ले लिया है. 

कई लोगों को संदेह है कि अब सुनीता पंजाब में आम आदमी पार्टी के राजनीतिक अभियान से जुड़ सकती हैं. वहां आम आदमी पार्टी को राज्य में मजबूत नेतृत्व की सख्त जरूरत है.

रुख में आया बदलाव

आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने हमेशा ही वंशवादी राजनीति की आलोचना की है और उसके खिलाफ अपनी असंतोष भरी आवाज उठाई है. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य कुमार विश्वास ने भी अपना मिशन "वंशवाद की राजनीति को खत्म" करना बताया था.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद भी राजनीति में वंशवाद के खिलाफ अपने विचार ट्वीट किए थे.

लेकिन आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने इन अफवाहों को फर्जी और हास्यास्पद कहकर टाल दिया.

नरेंद्र शर्मा कहते हैं, "हमारे संविधान के अनुसार, हम किसी एक परिवार के किन्हीं दो सदस्यों को पार्टी में शामिल होने की अनुमति नहीं देते. ऐसे में मुख्यमंत्री या किसी अन्य सदस्य के परिजनों के पार्टी में शामिल होने की अफवाह पूरी तरह फर्जी है."

पार्टी के वरिष्ठ सदस्य ने कहा, "किसी भी वरिष्ठ सदस्य का कोई परिजन कभी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनाव में नहीं खड़ा होगा."

इससे पहले 2014 में भी केजरीवाल ने उन खबरों का खंडन कर दिया था कि उसकी बेटी हर्षिता छात्रा युवा संघर्ष समिति में शामिल होकर राजनीतिक में प्रवेश करने वाली हैं.

यह सब अफवाहें

दूसरी रिपोर्ट, जिसने खूब हलचल पैदा की, यह थी कि स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक परियोजना की टीम प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है. सौम्या मानद आधार पर काम करेंगी और वे कोई भी पारिश्रमिक नहीं लेंगी.

जहां सौम्या की नियुक्ति असंतोष का कारण बनी है. अब खबर है कि आलोचना के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया है.

नरेंद्र शर्मा ने कहा, "वह कोई पारिश्रमिक नहीं लेतीं, वे सिर्फ एक स्वयंसेवक हैं. हमारे साथ कई अन्य स्वयंसेवक भी हैं जो विभिन्न मामलों पर सरकार के साथ काम कर रहे हैं. मोहल्ला क्लीनिक कार्यक्रम के साथ उसकी रुचि व्यक्तिगत है. यह विवाद किसी भी तरीके से उचित नहीं है."

यह स्पष्ट कर रहे हैं कि सुनीता केजरीवाल को पंजाब में पार्टी का नया चेहरा बनाने का कोई ईरादा नहीं है

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सौम्या एक वास्तुकार हैं, ऐसे वे कैसे राष्ट्रीय राजधानी में मोहल्ला क्लीनिक की भलाई के लिए योगदान कर सकती हैं? इस तरह की आलोचना पर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "उनकी नौकरी एक वास्तुकार की ही है. वह मोहल्ला क्लीनिक की संरचना और डिजाइन पर गौर करेंगी. उनसे पहले भी कई अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया था."

सत्येंद्र जैन ने खुद स्पष्ट किया है कि उनकी बेटी एक योग्य वास्तुकार है और उनका अनुभव परियोजना के लक्ष्यों को पूरा करने और आवश्यक संख्या में क्लीनिक स्थापित करने में मदद करेगा. वर्तमान में राज्य में करीब 100 मोहल्ला क्लीनिक खुल चुके हैं जबकि किराए के घरों के साथ-साथ दिन के अलग-अलग समय पर मोहल्ला क्लीनिक के रूप में काम करने वाले निजी क्लीनिकों को मिलाकर इनकी संख्या 1000 तक पहुंचाने का लक्ष्य है.

आम आदमी पार्टी के सदस्य यह स्पष्ट कर रहे हैं कि सुनीता केजरीवाल को पंजाब में पार्टी का नया चेहरा बनाने का कोई इरादा नहीं है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि फिर पंजाब में पार्टी का चेहरा होगा कौन?

First published: 15 July 2016, 8:48 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @catchnews

एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म से पढ़ाई. पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी कहानियां करते हैं.

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