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महाराष्ट्र सदन घोटाला मामले में छगन भुजबल गिरफ्तार

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 March 2016, 8:21 IST
QUICK PILL
  • प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब दिन भर की पूछताछ के बाद महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम छगन भुजबल को गिरफ्तार कर लिया. ईडी इससे पहले भुजबल के भतीजे समीर भुजबल को गिरफ्तार कर चुकी है.
  • ईडी ने 17 जून 2015 को पीएमएलए एक्ट के तहत दो एफआईआर दर्ज किए थे. ईडी ने छगन भुजगल, उनके बेटे और भतीजे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. ईडी ने यह मुकदमा जांच के दौरान भुजबल के 26 ठिकानों पर पड़े छापे के बाद दर्ज किया था.

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम और एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. महाराष्ट्र सदन घोटाले के आरोपी भुजबल को करीब दिन भर की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया.

आरोप है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए भुजबल ने गैर कानूनी तरीके से ठेका आवंटित किया. दिल्ली में बने महाराष्ट्र सदन में भुजबल पर रिश्वत लेने का आरोप है. 

आरोप है कि बतौर मंत्री भुजबल ने जो ठेका आवंटित किया उसका फायदा उनके बेटे और भतीजे पंकज और समीर भुजबल को मिला.

महाराष्ट्र सदन घोटाले के आरोपी भुजबल को करीब दिन भर की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया

इस मामले में भुजबल के भतीजे समीर भुगबल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है वहीं उनके बेटे पंकज भुजबल का पासपोर्ट जब्त किया जा चुका है. 

भुजबल की गिरफ्तारी एनसीपी और शरद पवार के लिए बड़ा झटका है. पवार ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि भुजबल को राजनीतिक बदले की भावना से फंसाया जा रहा है. भुजबल महाराष्ट्र में ओबीसी के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं. 

क्या है मामला?

पिछले हफ्ते ईडी ने छगन भुजबल को महाराष्ट्र सदन घोटाला मामले में पूछताछ के लिए 14 मार्च को हाजिर होने के लिए समन भेजा था. समीर भुजबल को इससे पहले ईडी एक फरवरी को पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट) के तहत गिरफ्तार कर चुकी है.

ईडी का आरोप है कि भुजबल ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अहम भूमिका निभाई और इससे सरकारी खजाने को 870 करोड़ रुपये का चूना लगा. 

छगन भुजबल महाराष्ट्र में ओबीसी के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं

ईडी का कहना है कि कुछ कंपनियों के खाते में बेनामी लेन-देन हुए और यह कंपनियां भुजबल से जुड़ी थी. ईडी के मुताबिक  भुजबल को उन कंपनियों ने नकदी में भुगतान किया जिसे उन्होंने ठेका दिया था.

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ईडी ने 17 जून 2015 को पीएमएलए एक्ट के तहत दो एफआईआर दर्ज किए थे. ईडी ने छगन भुजगल, उनके बेटे और भतीजे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. ईडी ने यह मुकदमा जांच के दौरान भुजगल के 26 ठिकानों पर पड़े छापे के बाद दर्ज किया था.

आरोप है कि बतौर मंत्री रहते भुजबल ने सरकारी ठेका चमनकर डिवेलपर्स को दिया जिसमें दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण का ठेका भी शामिल था. इसके अलावा कंपनी को अंधेरी में आरटीओ ऑफिस और मालाबार हिल में सरकारी गेस्ट हाउस बनाने का ठेका दिया गया. 

ईडी का कहना है कि यह सभी ठेके नियमों को नजरअंदाज करते हुए दिए गए और इसके बदले में भुजबल परिवार की कंपनियों को नकद पैसे मिले.

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First published: 15 March 2016, 8:21 IST
 
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