Home » इंडिया » ED doubts Shravan Gupta's version on AgustaWestland
 

अगस्ता वेस्टलैंड: श्रवण गुप्ता से मॉरिशस फंड और कनिष्क सिंह के बारे में पूछताछ

सादिक़ नक़वी | Updated on: 6 May 2016, 14:33 IST

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) एम्मार एमजीएफ के संयुक्त उपक्रम एम्मार के प्रमोटर श्रवण गुप्ता के जवाबों से संतुष्ट नहीं है. ईडी द्वारा बुधवार चार मई की शाम को दिल्ली जोन कार्यालय में गुप्ता से पूछताछ की गई. उनसे मॉरिशस से मिले धन के स्रोत के बारे में सवाल पूछे गए. भाजपा सांसद किरीट सोमैया द्वारा की गई एक शिकायत के बाद यह पूछताछ की गई है.

अपनी शिकायत में सोमैया ने कहा था कि राहुल गांधी के पुराने सहयोगी कनिष्क सिंह और बदनामी के भंवर में फंसे अगस्ता वेस्टलैंड सौदे के बिचौलिए गुइडो हैश्के के बीच संबंधों का पता लगाने के लिए जांच की जरूरत है. उनके अनुसार कनिष्क सिंह का विस्तारित परिवार ही एम्मार का मालिक है.

पढ़ें: अगस्ता वेस्टलैंड: सिंघवी ने बिखेरा सरकार का शिराजा

हालांकि ईडी ने इस संबंध में अब तक कनिष्क सिंह को समन नहीं भेजा है, लेकिन एजेंसी के अधिकारी इसकी संभावना से इनकार नहीं कर रहे. निदेशालय के एक सूत्र ने बताया, "यदि जरूरत महसूस हुई तो हम उन्हें समन भेज सकते हैं.” कनिष्क सिंह ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा है कि उनका एम्मार से कोई संबंध नहीं है.

कनिष्क के मुताबिक राजीव गुप्ता परिवार से उनके काफी समय पहले ही खत्म हो चुके हैं. 2005 में सिंह उनसे उस समय अलग हो गए थे जब राजीव गुप्ता ने वेद प्रकाश गुप्ता की एक वसीयत सबके सामने रखी. सिंह का मानना था कि वह वसीयत धोखाधड़ी थी. वह मामला अभी तक अदालत में लंबित है.

सूत्रों का कहना है कि “गुप्ता का दावा है कि 2009 में एम्मार एमजीएफ लैंड लिमिटेड के बोर्ड में गौतम खेतान और गुइडो हैश्के की नियुक्ति शुद्ध रूप से व्यावसायिक कारणों से की गई थी.” उन्होंने कहा कि ईडी में उनकी इस थ्योरी पर कोई भरोसा नहीं कर रहा.

पढ़ें:अगस्ता वेस्टलैंडः भाजपा के ईंट का जवाब पत्थर से दे रही कांग्रेस

गुप्ता ने ईडी को बताया है कि अगस्ता वेस्टलैंड भ्रष्टाचार मामले में जिन दो बिचौलियों से पूछताछ की जा रही है, उन दोनों को कंपनी में इसलिए लिया गया था क्योंकि कंपनी के निदेशकों में से एक ने इस्तीफा दे दिया था और कंपनी को उस समय रिक्त पद भरने के लिए आदमियों की जरूरत थी. इसका कारण यह था कि कंपनी उसी समय अपना आईपीओ बाजार में लाने की सोच रही थी.

सूत्रों के अनुसार गुप्ता ने ईडी को यह भी बताया है कि वे खेतान के दोस्त थे और उन्हीं के जरिए हैश्के से उनका परिचय हुआ था. एम्मार पहले एक बयान में कह चुकी है कि "अन्य स्वतंत्र निदेशकों के साथ हैश्के को कंपनी के बोर्ड में इसलिए लिया गया था क्योंकि सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होने के पात्र बनने हेतु वैधानिक रूप से बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की संख्या समान होनी जरूरी थी, जो हमारे मामले में 6 थी.”

कंपनी रजिस्ट्रार का रिकॉर्ड दिखाता है कि खेतान को 3 सितम्बर, 2009 को कंपनी के बोर्ड में नियुक्ति दी गई. हैश्के ने कुछ सप्ताह बाद 25 सितम्बर, 2009 को बोर्ड में जगह पाई. हैरत की बात है कि हैश्के ने उसी वर्ष बाद में 7 दिसम्बर, 2009 को बोर्ड से इस्तीफा दे दिया.

पढ़ें: मनोहर पर्रिकर: कांग्रेस बताए अगस्ता वेस्टलैंड डील में किसने ली घूस ?

दिलचस्प बात है कि ईडी ने फेमा के उल्लंघन के संदेह पर 2 दिसम्बर, 2009 को एम्मार के कार्यालय और रिट्स के दो निदेशकों के घर पर छापा मारा था. एक सूत्र ने इशारा किया, “जिस तरह से वह वो कंपनी में शामिल हुए और छापे के कुछ ही दिन बाद जिस तरह से इस्तीफा दिया, उसमें कुछ तो गड़बड़ है. आप कंपनी के बोर्ड में किसी व्यक्ति को यूं ही नहीं नियुक्त कर लेते हैं."

भाजपा के निशाने पर कनिष्क

इस बीच, यह पहली बार नहीं है कि भाजपा कनिष्क सिंह पर एम्मार में उनकी भूमिका के लिए निशाना साध रही है. 2010 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी आरोप लगाया था कि कॉमनवेल्थ खेलों की लाभार्थी ठेकेदार एम्मार एमजीएफ का स्वामित्व कनिष्क सिंह के पास था. 

उन्होंने दावा किया था कि कंपनी ने अवैध तरीके से एक सब कॉन्ट्रैक्टर नियुक्त कर दिया था और कॉमनवेल्थ खेलों के लिए फ्लैट्स बनाने में घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कर सरकार को बहुत बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया.

गडकरी ने एम्मार एमजीएफ के राहत पैकेज पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि “दिल्ली विकास प्राधिकरण ने किसके कहने पर इंटरनेशनल जोन के लिए राहत पैकेज दे दिया गया? सरकार ने एम्मार एमजीएफ की बैंक गारंटी जब्त कर ली, लेकिन यह सिर्फ दिखावे के लिए किया गया था क्योंकि सरकार कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवार्इ नहीं करना चाहती थी.”

पढ़ें: मायावती के अगस्ता हेलीकॉप्टर पर अखिलेश ने लुटाए करोड़ों

2012 में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी थी कि डीडीए ने रियलिटी कंपनी को 728.89 करोड़ रुपए का राहत पैकेज कैसे दे दिया. इस मामले की जांच में कितनी प्रगति हुई है,जब इसकी जानकारी के लिए निवेदन किया गया तो सीबीआई ने कोई जवाब नहीं दिया.

तब भी एम्मार समूह ने सिंह के साथ किसी तरह के रिश्तों से इनकार किया था. कंपनी ने एक बयान में कहा कि "हम आगे कहना चाहेंगे कि कनिष्क सिंह के प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई व्यावसायिक स्वार्थ नहीं हैं, कॉमनवेल्थ खेलों के लिए बनाए गए आवासीय गांव में या एम्मार एमजीएफ में वो न तो शेयर होल्डर हैं और न ही प्रमोटर.

गुप्ता का संदिग्ध अतीत

जब वित्तीय लेन-देन की बात आती है तो गुप्ता का अतीत भी संदिग्ध नजर आता है. बड़ी-बड़ी पार्टियां (जिनमें अन्य के साथ-साथ रॉबर्ट वाड्रा भी शामिल होते थे) देने के लिए मशहूर गुप्ता के कई एजेंसियों के साथ विवाद किसी से छिपे नहीं हैं.

गुप्ता का नाम काले धन वालों की सूची में आया और आयकर विभाग ने कहा कि उसने 2006 में उन 15 लाख डॉलर की आयकर रिटर्न ही फाइल नहीं की, जो उसने एचएसबीसी के एक खाते में रखे थे.

आयकर विभाग द्वारा आय की घोषणा न करने की शिकायत के बाद 2015 में अदालत ने संज्ञान लिया और उनको आरोपी के रूप में सूचीबद्ध कर लिया. गुप्ता ने 2011 में उस समय स्वेच्छा से टैक्स जमा किया जब उसका नाम एचएसबीसी की सूची में आ गया.

अक्टूबर 2007 में मयूर भवन स्थित वित्त मंत्रालय के खुफिया महानिदेशक का कार्यालय आग में जलकर खाक हो गया था. संदेह जताया गया था कि यह किसी अंदरवाले का ही काम है. 

पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट अगस्ता वेस्टलैंड मामले में सुनवाई को तैयार, जानिए क्या है पूरा विवाद

वित्त मंत्रालय द्वारा यह नया संगठन आग लगने की घटना से महज छह महीने पहले ही स्थापित किया गया था. आग में उन दस्तावेजों में से अधिकांश को राख में बदल दिया जो एम्मार पर छापे के बाद जब्त की गई थीं, जिनमें यह पाया गया था कि एम्मार ने 230 करोड़ रुपए से अधिक की आय छिपाई थी.

सीबीआई ने गुप्ता से आंध्र प्रदेश में हुए एम्मार टाउनशिप घोटाले के संबंध में भी पूछताछ की. अपनी चार्जशीट में सीबीआई ने दावा किया कि सीईओ श्रीकांत जोशी और प्रबंध निदेशक गुप्ता के इशारे पर चल रही एम्मार एमजीएफ लिमिटेड ने भूखंडों की कीमत बाजार भाव के अनुरूप तय नहीं की थी. कुछ भूखंड तो फर्जी कंपनियों के नाम पर रोक दिए गए थे, ताकि बाद में उनको प्रीमियम दामों पर बेचा जा सके.

First published: 6 May 2016, 14:33 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी