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आधार डेटा चोरी मामला: पत्रकार पर FIR के बाद एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से की ये मांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 January 2018, 11:38 IST

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने 'द ट्रिब्यून' अखबार की पत्रकार रचना खेहरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. ये एफआईआर रचना की उस रिपोर्ट के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने बड़े पैमाने पर आधार कार्ड से लोगों के डाटा चोरी होने का खुलासा किया था.

पुलिस की एफआईआर में रचना खेहरा के अलावा उन लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने लोगों के आधार कार्ड के डाटा बेचने की बात कही थी. दरअसल 'द ट्रिब्यून' की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मात्र 500 रुपये के बदले रिपोर्टर ने आधार के डाटाबेस का लॉगिन और पासवर्ड हासिल कर लिया था, जिससे उन्होंने लगभग एक अरब लोगों के आधार कार्ड की जानकारी का एक्सेस हासिल कर लिया. इस खुलासे के बाद  यूआईडीएआई ने इसे फर्जी बताया था.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के रिपोर्टर रचना खेहरा के खिलाफ एफआईआर पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. एडिटर गिल्ड ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. बीइए के महासचिव सचिव ने इस बयान को अपने फेसबुज प्रोफाइल पर भी शेयर किया है.

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच अपनी एफआईआर में से रिपोर्टर और अखबार का नाम हटाये. हम मीडिया में आ रही इन खबरों को लेकर बहुत चिंतित है कि यूआईडीएआई के उप निदेशक बी एम पटनायक ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में ‘द ट्रिब्यून’ अखबार पर एक एफआईआर दर्ज कराई है.यह अनुचित और प्रेस की स्वतंत्रता पर एक सीधा हमला है.’’जबकि यूआईडीएआई ने किसी तरह की डेटा चोरी होने की संभावना से इनकार किया है.

वहीं  'द ट्रिब्यून' अखबार और उसकी रिपोर्टर पर एफआईआर कराने को लेकर यूआईडीएआई ने अपनी सफाई दी है. यूआईडीएआई ने कहा कि वह प्रेस की आजादी समेत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है. पुलिस ने इस मामले में केस इसलिए दर्ज किया, क्योंकि इस मामले में अपराध हुआ है.

UIDAI ने अखबार में छपी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जिस रिपोर्ट पर एफआईआर हुई है. उस रिपोेर्ट को मीडिया में ऐसे दिखाया जा रहा है कि UIDAI मीडिया को निशाना बना रहा हो. ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि इसमें पूरे ब्योरे के साथ एफ़आईआर दायर कराने की हमारी कार्रवाई को मीडिया को निशान बनाने की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

First published: 8 January 2018, 11:38 IST
 
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