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एकनाथ खड़से: 40 साल की सियासत, मीडिया ने बनाया निशाना

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 June 2016, 15:04 IST

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री और राज्य में बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेता माने जाने वाले एकनाथ खडसे को भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों के चलते इस्तीफा देना पड़ा है. खड़से ने अपने इस्तीफे के लिए मीडिया को जिम्मेदार बताया है.

पिछले एक महीने से आरोपों में घिरे एकनाथ खड़से ने आज सुबह अपने पद से इस्तीफा दे दिया. महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष रावसाहेब दानवे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खड़से के इस्तीफे की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश की.

नैतिक आधार पर इस्तीफा

इस बीच इस्तीफे के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ खड़से ने कहा, "मेरे 40 साल के राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, नैतिकता की वजह से मैंने इस्तीफ़ा दिया. मैंने चुनौती दी थी कि सुबूत दीजिए. आरोप लगाने वालों ने अभी तक कोई सबूत नहीं दिए हैं. मैंने सारे काम कानून के मुताबिक किए हैं."

पढ़ें: विवादों में घिरे महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से का इस्तीफा

एकनाथ खड़से ने इस दौरान कहा कि उन्होंने कभी इस तरीके का मीडिया ट्रायल नहीं देखा था. उधर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रावसाहेब दानवे ने कहा कि खडसे ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया है, उनके खिलाफ लगे आरोप बेबुनियाद हैं और पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है.

दाऊद से बातचीत का आरोप

खड़से के बुरे दिन उस वक्त शुरू हुए, जब उनके कथित सहायक को उनके ही दफ्तर में 30 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

इस घटना के दाग धोने की पुरजोर कोशिश कर रहे खड़से को एक बड़ा झटका लगा, जब आम आदमी पार्टी ने उन पर अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम से संपर्क में होने का आरोप लगाया. सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने खड़से के इस्तीफे के लिए मोर्चा खोलते हुए अनशन शुरू कर दिया.

इस पूरे विवाद में ये ध्यान देने वाली बात यह थी कि बीजेपी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने उनसे दूरी बना ली. कोई भी खड़से के बचाव में आगे नहीं आया.

इस बीच एकनाथ खड़से के इस्तीफे के बाद उनके समर्थकों ने उग्र प्रदर्शन किया है. जलगांव जिले में उनके गृह क्षेत्र मुक्ताई नगर में समर्थकों ने इस्तीफे के खिलाफ सड़क जाम कर दी. इस दौरान टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया.

एमआईडीसी जमीन पर घिरे

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने आरोपों की जांच के आदेश दे दिए. इन सबके बीच खड़से खुद को बेगुनाह साबित करने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे थे. तभी उन पर पुणे के पास महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमआईडीसी) की जमीन अवैध तरीके से खरीदने का आरोप लग गया.

महाराष्ट्र में उद्योग मंत्रालय शिव सेना के पास है और इस आरोप का पूरा फायदा उठाते हुए शिव सेना के सारे नेता बीजेपी पर टूट पड़े. राज्यसभा सांसद संजय राउत के बयान पर तो बीजेपी ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा था कि शिवसेना को बीजेपी के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देनी चाहिए. 

खड़से लगातार अपनी बेगुनाही की गुहार लगाते रहे, लेकिन पार्टी आलाकमान के सख्त रुख से साफ हो गया था कि खड़से अब ज्यादा दिन के मेहमान नहीं हैं. उनके खिलाफ लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को दिल्ली तलब कर मामले पर रिपोर्ट मांगी.

संघ के दर पर!

इसके बाद एकनाथ खड़से की फड़नवीस कैबिनेट से विदाई लगभग तय हो गई थी. लेकिन गुरुवार रात को वह अपने जलगांव स्थित फार्महाउस से अज्ञात स्थल के लिए रवाना हो गए. इस बीच खड़से ने शुक्रवार को खुद का वीडियो भेजकर संदेश दिया कि वो किसानों से जुड़े कार्यक्रम के सिलसिले में व्यस्त हैं.

ऐसा कहा जा रहा था कि इस्तीफे की मानहानि से बचने की अंतिम कोशिश के तौर पर एकनाथ खड़से नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आला नेताओं से मिलने गए थे. हालांकि इस बात की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है.

First published: 4 June 2016, 15:04 IST
 
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