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जनता की उम्मीदों को बनाए रखना आप की सबसे बड़ी चुनौती

आशुतोष | Updated on: 14 February 2016, 1:12 IST
QUICK PILL
  • उप-राज्यपाल और पुलिस कमिश्नर का इस्तेमाल कर सरकार की छवि को खराब करने की कोशिश की गई. विधानसभा के छह सदस्यों को गलत आरोपों में गिरफ्तान किया गया और एक मंत्री को दिल्ली पुलिस ने उस तर्ज पर गिरफ्तान किया मानो वह आतंकवादी था.
  • मोदी सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो को दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार से ले लिया जबकि यह संस्था पिछले 40 साल से दिल्ली सरकार के लिए काम कर रही थी. भ्रष्टाचार को मिटाना सबसे बड़ी चुनौती थी और अगर एसीबी हमारे साथ नहीं होगी तो हम इस बड़ी समस्या से कैसे निपट पाएंगे: आशुतोष

'मुझे खूंखार डैनियल्स के पिंजरे में बंद शेर की तरह होना चाहिए.' ऑस्कर वाइल्ड ने यह तब कहा था जब उन्होंने अपने प्रति खराब व्यवहार की वजह से एक क्लब के समारोह में जाने से मना कर दिया था. कुछ ही दिनों में दिल्ली में आम आदमी की पार्टी की सरकार के एक साल पूरे होने वाले हैं और ऐसे में मुझे उनकी याद आ रही है. वाइल्ड के उलट आप की सरकार ने वैसे गुफा में घुसने का फैसला किया जहां उसे खूंखार डैनियल्स का सामना करना था.

पिछले एक साल में आम आदमी पार्टी की सरकार की स्थिति बंद प्रेशर कुकर में काम करने जैसी रही जहां एक तरफ लोगों की बड़ी उम्मीदें थीं वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी की सरकार की राह में हर तरफ अड़चन पैदा करने की कोशिश की. इस माहौल में पिछले एक साल के दौरान आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए जनता को किए गए वादों को पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती रही.

जिस दिन आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटों पर जीत मिली थी उस दिन उन्होंने कहा था, 'यह डराने वाला है.' पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की उम्मीदों को जिंदा रखने की थी. नरेंद्र मोदी ने गुजरात मॉडल की तर्ज पर हर पैंतरे का इस्तेमाल किया ताकि आप की सरकार को बेदखल किया जा सके लेकिन उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई. 

उप-राज्यपाल और पुलिस कमिश्नर का इस्तेमाल कर सरकार की छवि को खराब करने की कोशिश की गई. विधानसभा के छह सदस्यों को गलत आरोपों में गिरफ्तार किया गया और एक मंत्री को दिल्ली पुलिस ने उस तर्ज पर गिरफ्तान किया मानो वह आतंकवादी था.

एलजी ने सरकार के आदेश को अवैध करार दिया. मुख्यमंत्री को काम करने से रोकने के लिए हर कोशिश की गई. एक मामले को दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की दिशा में आगे बढ़ाया गया. बहरहाल यह सब हमारे लिए परीक्षा की घड़ी थी. 

संतुलन बनान बेहद चुनौती भरा काम होता है लेकिन क्रांति कभी भी इतनी आसान ही नहीं रही

सबसे बड़ा झटका यह रहा कि मोदी सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो को दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार से ले लिया जबकि यह संस्था पिछले 40 साल से दिल्ली सरकार के लिए काम कर रही थी. भ्रष्टाचार को मिटाना सबसे बड़ी चुनौती थी और अगर एसीबी हमारे साथ नहीं होगी तो हम इस बड़ी समस्या से कैसे निपट पाएंगे.

तब भी सरकार को काम करना था. पिछले एक साल में मोदी मॉडल के मुकाबले विकास का सामान्य मॉडल उभरकर सामने आया है. दिल्ली मॉडल पूरी तरह से दो जनसरोकार के मुद्दे पर आधारित है. इसमें से एक शिक्षा और दूसरा स्वास्थ्य है.

उपलब्धि

सरकार फ्लाइओवर, सड़क और मॉल आदि बनाने के खिलाफ नहीं है. लेकिन फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के साथ ह्यूमन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी खड़ा किया जाना चाहिए ताकि समाज का समग्र विकास हो सके. यही वजह रही कि दिल्ली के शिक्षा बजट में 106 फीसदी जबकि स्वास्थ्य बजट में 45 फीसदी की बढ़ोतरी की गई.

आम आदमी पार्टी की सरकार ने शिक्षा के बजट में अभूतपूर्व तरीके से 106 फीसदी की बढ़ोतरी की

दिल्ली में सबसे ज्यादा खराब हालत स्वास्थ्य सेवाओं की रही है. हमारा विचार इसे और ज्यादा किफायती बनाना था. मोहल्ला क्लीनिक और पॉली क्लीनिक की मदद से घर के दरवाजे पर स्वास्थ्य सेवाओं को मुहैया कराने का काम किया गया. पांच सालों में ऐसे 500 क्लीनिक खोले जाएंगे.

ईमानदार सरकार के काम करने का अपना तरीका होता है. दो परियोजनाओं को लागत से कम में पूरा किया गया और यह चौंकाने वाली बात रही. एक फ्लाइओवर को 150 करोड़ रुपये में बनाया गया था जबकि उसकी लागत 250 करोड़ रुपये थी. दूसरी परियोजना को 298 करोड़ रुपये में पूरा किया गया जबकि उसकी लागत 426 करोड़ रुपये थी. 

पानी और बिजली के वादे को सत्ता में आने के पहले हफ्ते में ही पूरा किया गया. हालांकि सबसे बड़ा मुद्दा ऑड-ईवन की पॉलिसी को लागू करना रहा. कई लोगों ने कहा कि यह योजना विफल हो जाएगी लेकिन यह इस साल की सबसे बड़ी कहानी है. सबक यह रहा कि अगर लोगों को भरोसे में लिया जाए और सार्वजनिक तौर पर उस पर चर्चा की जाए तो बड़ी से बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है.

हालांकि अभी हमें सत्ता में आए हुए एक साल ही हुआ है. जबकि हर एक दिन के बाद लोगों का धैर्य टूटने लगता है और सत्ता विरोधी रुझान जोर पकड़ने लगता है.

आगे हैं चुनौतियां

सबसे बड़ी चुनौती लोगों की उम्मीदों को पूरा करना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि बदलाव हो रहा है. आप को यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीति में बदलाव से बड़ा यह एहसास दिलाना होता है कि बदलाव हो रहा है.

दूसरा आप की सरकार ऐसे सिस्टम में काम कर रही है जो आदर्श नहीं है और नहीं उसकी बनाई हुई है. इसलिए नहीं चाहते हुए भी आपको इसके साथ रहना होगा.

तीसरा सरकार को नौकरशाहों का भरोसा जीतना होगा. इनमें से अधिकांश अच्छे हैं और वह काम करना चाहते हैं लेकिन कुछ ऐसे हैं जो अपने राजनीतिक रुझानों की वजह से समस्या पैदा कर रहे हैं ताकि उन्हें भविष्य में फायदा हो सके. हमें उन अधिकारियों को तलाश कर उन्हें बाहर करना होगा.

आप की सरकार को कई झटके लगे लेकिन सरकार अपना काम करती रही 

चौथा पार्टी को राजनीति में बड़े आदर्शों को स्थापित करना है. आप के नेता, विधायक, सांसद और कार्यकर्ता अन्य पार्टियों की तरह बर्ताव नहीं कर सकते. हमारा व्यवहार आदर्श होना चाहिए जो किसी प्रकार के संदेह से परे हो. पंजाब में एक साल के भीतर चुनाव होने हैं. दिल्ली की तरह ही पंजाब आप को गले लगाने को तैयार है. लोगों के बीच वैसी ही उम्मीदें हैं.

लेकिन यह सपना तभी पूरा हो जाएगा जब शेर को पिंजरे में बंद नहीं रखा जाएगा या फिर उसे हर वक्त लड़ना नहीं होगा. कई बार शेयर को खूंखार डैनियल को दोस्त बनाना पड़ता है और यह काम सिद्धांतों से समझौता किए बगैर कि या जाता है. संतुलन बनाना आसान नहीं है लेकिन क्रांति इतनी भी आसान नहीं है. 

First published: 14 February 2016, 1:12 IST
 
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