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अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं, चुनाव आयोग ने दिया एफआईआर दर्ज करने का आदेश

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 January 2017, 16:24 IST
(फाइल फोटो)

गोवा विधानसभा चुनाव के चलते लगी आचार संहिता का उल्लंघन करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव आयोग ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. 

इस जनवरी के पहले हफ्ते में केजरीवाल ने गोवा की एक चुनावी जनसभा के दौरान विवादित भाषण देते हुए मतदाताओं से कहा था, "कांग्रेस और भाजपा से पैसे लें मगर वोट आप को ही दें. कांग्रेस और भाजपा के लोग उन्हें पैसे देने आएंगे. महंगाई को ध्यान में रखते हुए लोगों को उनसे 5,000 की जगह 10,000 रुपये मांगने चाहिए, वह भी नए नोटों में."

इस बयान के लिए चुनाव आयोग ने केजरीवाल को चेतावनी दी थी. हालांकि आयोग के फैसले को गलत बताते हुए केजरीवाल ने फिर अपना बयान दोहराया था. उन्होंने इस मामले कोलेकर कोर्ट में जाने की बात भी कही थी. केजरीवाल ने कहा था, "वह (आयोग) उनको अपना ब्रांड एंबेसडर बना ले." केजरीवाल ने इस जवाब की कॉपी सोशल मीडिया में भी शेयर की थी.

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केजरीवाल लिखा था, आयोग पिछले 70 सालों से चुनाव में पैसे का चलन को रोकने की नाकाम कोशिश कर रहा है. मेरे इस बयान से कि, दूसरी पार्टी वाले पैसे देंगे, ले लेना, लेकिन वोट झाड़ू को देना से रिश्वतखोरी बंद होगी. 

उन्होंने लिखा, इस बयान को अगर आयोग अपना ले और इसका प्रचार करे तो दो साल में सभी पार्टियां पैसा बांटना बंद कर देंगी.

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी आयोग ने केजरीवाल को रिश्वत संबंधी टिप्पणी के लिए फटकार लगाई थी. आयोग ने चेतावनी दी कि अगर केजरीवाल ऐसे ही आचार संहिता का उल्लंघन जारी रखते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. आप की मान्यता को सस्पेंड या खत्म करने की कार्रवाई भी की जा सकती है. 

केजरीवाल ने आयोग के इस फैसले को गलत बताते हुए शनिवार को ही कहा था कि वे इसके खिलाफ अपील करेंगे. 16 जनवरी को आयोग ने केजरीवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

चुनाव आयोग ने केजरीवाल को फटकार लगाते हुए कहा, आगे से वह (केजरीवाल) चुनाव के दौरान अपने भाषणों में संयम बरतेंगे. आप यह भी ध्यान रखें कि अगर भविष्य में कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन हुआ तो इलेक्शन सिंबल्स (रिजर्वेशन ऐंड अलॉटमेंट) ऑर्डर एक्ट के पैरा 16 के तहत आपके और आपकी पार्टी के खिलाफ आयोग कड़ी कार्रवाई करेगा. इस नियम के तहत आयोग किसी पार्टी की मान्यता खत्म या निलंबित कर सकता है.

First published: 29 January 2017, 16:24 IST
 
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