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क्या मोदी-अमित शाह के लिए चुनाव आयोग में मचा घमासान, दो आयुक्त आमने-सामने

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 May 2019, 14:42 IST

लोकसभा चुनाव के लिए अंतिम चरण का मतदान कल यानि 19 मई होना है और 23 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे. लेकिन अब जब चुनाव खत्म होने को हैं चुनाव आयोग में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. चुनाव आयोग ने पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं को उनके विववित बयान के लिए अचार संहिता उलंघन का दोषी मानते हुए नोटिस जारी किए और कुछ समय तक प्रचार पर प्रतिबंध भी लगाए.

आयोग द्वारा आचार संहिता तोड़ने के कई फैसलों पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने असहमति जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा को पत्र लिखा है. लवासा ने मांग की है कि आयोग के फैसलों में आयुक्तों के बीच मतभेद को भी ऑफिशियल रिकॉर्ड पर शामिल किया जाए. लेकिन अब मुख्य चुनाव आयोग ने इस पत्र का जबाब देते हुए कहा है कि ''चुनाव आयोग में 3 सदस्य होते हैं और वे एक दूसरे के नहीं हो सकते, किसी भी मुद्दे पर बहस से नहीं भागता, हर चीज का वक्त होता है".

अशोक लवासा देश के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की कतार में सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक लवासा आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों पर पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को लगातार क्लीन चिट और विरोधी दलों के नेताओं को नोटिस थमाए जाने के खिलाफ रहे हैं.

कांग्रेस ने चुनाव आयोग को कहा मोदी का पिट्ठू

इसी बीच कांग्रेस ने भी आयोग और मोदी सरकार पर हमला बोला है और चुनाव आयोग मोदी का पिट्ठू बना चुना है. अशोक लवासा की चिट्ठी से साफ है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और उनके सहयोगी लवासा के बीच मोदी और अमित शाह को लेकर जो अलग मत है, CEC उसे रिकॉर्ड करने को तैयार नहीं हैं. कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्वीट कर कहा ''मोदी सरकार संस्थागत अखंडता के क्षरण की पहचान थी.

First published: 18 May 2019, 14:42 IST
 
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