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असम: 'NRC में नहीं होने पर पर मिलेगा चुनावों में वोट डालने का मौका'

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 August 2018, 14:32 IST

यह पूछे जाने पर कि उन असम निवासियों के मतदान अधिकारों का क्या होगा, जिनका नाम एनआरसी ड्राफ्ट में नहीं है. इस पर सरकार का रुख यह है कि यह चुनाव आयोग पर निर्भर है. दूसरी ओर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ पी रावत ने कहा कि सरकार के एनआरसी ड्राफ्ट में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि उनका नाम असम की मतदाता सूची से स्वतः ही हट जायेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए रावत ने कहा कि अंतिम एनआरसी में उनकी अनुपस्थिति के बावजूद ये राज्य की मतदाता सूचि में बने रहेंगे. अगर वह निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के सामने यह साबित कर देते हैं कि वह भारतीय नागरिक हैं और उसके पास तीन चीजों को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज हैं, तो वह वोटिंग कर सकते हैं.

 

रावत के अनुसार चुनाव आयोग अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले असम के लिए अंतिम चुनावी रोल तैयार करते समय तीनों शर्तों का सामना करने के लिए तैयार है. पहले यह कि वह राज्य में पंजीकृत मतदाता हो, जिसका नाम अंतिम एनआरसी में है, उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. दूसरी- जो मतदाता अंतिम एनआरसी से अनुपस्थित हैं लेकिन ट्रिब्यूनल या अदालत से रहने में कामयाब रहे हैं, वे भी चुनावी रोल पर बना रहेगा.

उन लोगों के लिए जो अंतिम एनआरसी में नहीं हैं और न ही अदालत में उन्होंने चुनौती दी है, यह निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) होगा जो 1950 के जन अधिनियम के प्रतिनिधित्व में निर्धारित मानदंडों के आधार पर अपना इसका फैसला करेंगे. रावत ने कहा, "(ईआरओ) को यह तय करना है कि क्या वह (एनआरसी से अनुपस्थित मतदाता) (मतदाताओं की सूची में) रहना चाहिए या नहीं.

यह पूछे जाने पर कि क्या एनआरसी में नहीं होने पर किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता संदिग्ध मानी जा सकती है. उन्होंने कहा, "मान लीजिए कि मैं असम में रहता हूं लेकिन मेरा जन्म मध्य प्रदेश में हुआ था. आप कैसे कह सकते हैं कि अगर मैं एनआरसी में नहीं हूं, तो मैं भारत का नागरिक नहीं हूं? आप यह नहीं कह सकते हैं. "

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First published: 1 August 2018, 14:31 IST
 
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