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नागा शांति समझौते की राह में उभरती कुछ अशांतियां

भारत भूषण | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • नागा और केंद्र सरकार के बीच पैन नागा होहो को लेेकर सहमति बन गई है. समझौते के तहत पैन नागा होहो की स्थापना की जाएगी.
  • इस ईकाई के पास विधायी, बजटीय और बातचीत करने की शक्ति होगी. यह एक चुनी हुई संस्था होगी और इसकी कमान नागाओं के हाथों में होगी.
  • दूसरी अहम शर्त नागा इलाकों के एकीकरण को लेकर है. नागालैंड के बाहर के इलाकों के लिए रीजनल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल बनाई जाएगी. इसमें मणिपुर,अरुणाचल प्रदेश और असम के इलाके शामिल होंगे.

पिछले साल तीन अगस्त को नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक मुईवा) (एनएससीएन-आईएम) के साथ सरकार के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यह बात साफ हो गई थी कि अब यह मामला शांत पड़ जाएगा. इनके साथ बाद में बातचीत किया जाना तय हुआ. 

फ्रेमवर्क एग्रीमेंट बेहद विस्तृत था और इससे भारत में सर्वाधिक लंबे समय से चल रहे सशस्त्र विद्रोह को खत्म करने में मदद मिलती. फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में विस्तृत समाधान के लिए तीन अहम पहलू तय किए गए थे.

फ्रेमवर्क में नागाओं के इतिहास और उनकी स्थिति को यूनिक मानते हुए उसी के मुताबिक समाधान किए जाने का प्रस्ताव रखा गया. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि नागा समस्या का समाधान केंद्र सरकार के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच के संबंधों की तरह नहीं होगा. 

इसमें यह भी कहा गया है कि केंद्र और नागाओं के बीच संप्रभु शक्तियों की साझेदारी होगी और यह काम नागाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्र, राज्य और समवर्ती सूची पर विचार कर किया जाएगा.

दोनों पक्ष वैसे समाधान पर सहमत होंगे जो दोनों को स्वीकार्य हो और इसे आपसी सहमति से तैयार किया जाएगा. इस दौरान दोनों पक्षों की जटिलताओं और परेशानियों का खासा ख्याल रखा जाएगा. 

इसका मतलब यह हुआ कि भारत सरकार नागाओं को समझने की कोशिश कर रही थी ताकि नागा अपनी आकांक्षाओं की पूर्ति किए जाने के दौरान सरकार की राजनीतिक परेशानियों को समझ सकें.

फ्रेमवर्क के तहत यह बात तय थी कि दोनों पक्ष स्थायी समझौते को लेकर काम करेंगे और अब बातचीत का विस्तृत पहलू साफ हो चुका है. बातचीत की समझ रखने वाले नागा सूत्रों के मुताबिक समझौते के चार बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है.

रीजनल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल बनाई जाएगी जिसमें मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और असम के इलाके शामिल होंगे

पहले पैन नागा होहो की स्थापना की जाएगी. इस ईकाई के पास विधायी, बजटीय और बातचीत करने की शक्ति होगी. यह एक चुनी हुई संस्था होगी और इसकी कमान नागाओं के हाथों में होगी.

दूसरा नागालैंड के बाहर के इलाकों के लिए रीजनल ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल बनाई जाएगी. इसमें मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और असम के इलाके शामिल होंगे.

तीसरा संसद एक विशेष नागा कानून बनाएगी जिसे संविधान में जोड़ा जाएगा. विशेष कानून में विषयों का बंटवारा होगा जो केंद्र और नागाओं के बीच विभाजित होंगे. इस तरह नागा संविधान भारतीय संविधान का ही अभिन्न अंग होगा.

चौथा नागा इलाकों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों पर नागाओं की मिल्कियत होगी. उनके पास इन संसाधनों के दोहन का पूरा अधिकार होगा और अगर वह चाहे तो इस मामले में केंद्र सरकार और उसकी ईकाइयों को साझेदार बना सकते हैं.

ऐसे मामले में संसाधनों के अन्वेषण और दोहन के लिए दोनों पक्षों के बीच संयुक्त उपक्रम का निर्माण किया जाएगा.

मुश्किलें भी कम नहीं

हालांकि इसके बावजूद इस राह में अभी कई ऐसी चुनौतियां हैं जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है. सबसे बड़ी समस्या नागा इलाकों के एकीकरण और पैन नागा होहो की विधायी शक्तियों को लेकर है क्योंकि नागालैंड में पहले से ही चुनी हुई सरकार है और उसके पास विधायी शक्तियां हैं.

एकीकरण के मामले में सरकार ने नागाओं को शायद इस बात की जानकारी दे दी है कि वह इस मामले में कोई डेडलाइन तय नहीं कर सकते क्योंकि राज्यों की सीमाओं में एक प्रक्रिया के तहत ही बदलाव किया जा सकता है. मतलब मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और असम के लोगों को नागाओं के लिए जमीन छोड़नी होगी.

एनएससीएन (आईएम) को यह बताया जा चुका है कि उन्हें सरकार पर ऐसा कुछ भी करने के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए जिससे पूर्वोत्तर के राज्यों में स्थिति बिगड़े.

 नागा इलाकों के संसाधनों पर नागाओं की मिल्कियत होगी. उनके पास इसके दोहन का पूरा अधिकार होगा

हालांकि राज्य पुनर्गठन आयोग जैसी संस्था को बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है लेकिन इसके बावजूद नागा इलाकों के एकीकरण में लंबा समय लगेगा.

ऐसे में जब तक नागा इलाकों का एकीकरण नहीं होता है तब तक नागाओं की दो सरकारें नहीं हो सकतीं. सूत्रों की माने तो इसी वजह से अंतरिक समझौते में कोई डेडलाइन तय नहीं की गई है. तब तक इस इलाके में एक ही सरकार होगी और वह नागालैंड की निर्वाचित सरकार होगी.

एनएससीएन (आईएम) के सूत्रों के मुताबिक वह बातचीत और इसकी प्रगति को लेकर खुश हैं. उन्होंने कहा कि वह नागा इलाकों के एकीकरण के दौरान आने वाली समस्याओं को समझते हैं. हालांकि नागाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के राज्यपाल एससी जमीर की कथित भूमिका को लेकर नाराजगी है. 

एनएससीएन (आईएम) के एक बड़े पदाधिकारी बताते हैं, 'वह नागाओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलते रहे और उनके समाधान के खिलाफ काम करते रहे. मसलन उन्होंने दूसरे समूह को भड़काया जिनकी दिल्ली के साथ बात नहीं बनी थी. जमीर सुस्त पड़ चुके नागा नेशनल काउंसिल को शांति वार्ता में अहम खिलाड़ी बनाना चाहते थे. ताकि समाधान को लेकर चल रही बातचीत को पटरी से उतारा जा सके.'

एनएससीएन (आईएम) मौजूदा मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग को लेकर सकारात्मक रुख नहीं रखती है. हालांकि नागा पीपुल्स फ्रंट के नेता फिलहाल जमीन के प्रभाव में हैं. वह जमीर के कार्यकाल में मंत्री भी रहे हैं जो पूर्व कांग्रेसी हैं. वह राज्य में एक ऐसी सरकार देखना चाहेंगे जो नई दिल्ली के साथ होने वाली बातचीत को पूरा समर्थन देती हो.

First published: 13 April 2016, 11:41 IST
 
भारत भूषण @Bharatitis

एडिटर, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में 25 से ज्यादा सालों का अनुभव. इस दौरान मेल टुडे के संस्थापक संपादक, हिन्दुस्तान टाइम्स के कार्यकारी संपादक, द टेलीग्राफ, दिल्ली के संपादक, एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस के संपादक, इंडियन एक्सप्रेस के वॉशिंगटन संवाददाता, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सहायक संपादक के रूप में काम किया.

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